राजनाथ सिंह का जोड़तोड़ से सरकार बनाने से इनकार, ऐसे बन सकती है दिल्ली में सरकार

By: | Last Updated: Saturday, 6 September 2014 11:47 AM

नई दिल्ली : आम आदमी पार्टी ने पूरा जोर इस बात पर लगा दिया है कि दिल्ली में बीजेपी की सरकार न बन सके. राष्ट्रपति से मिलकर अरविंद केजरीवाल ने कहा कि बिना बहुमत बीजेपी को नहीं सरकार बनाने का मौका नहीं मिलना चाहिए. इसके साथ ही उन्होंने दिल्ली में चुनाव कराने की मांग भी की.

 

अरविंद केजरीवाल बीजेपी पर खरीद फरोख्त और जोड़तोड़ कर सरकार बनाने का आरोप लगा रहे हैं . लेकिन गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कह दिया है कि उनकी पार्टी खरीद फरोख्त कर सरकार बनाने में यकीन नहीं रखती . सवाल उठता है कि फिर दिल्ली में सरकार बनेगी कैसे ?

 

स्टिंग कर बीजेपी को Expose करेंगे ‘आप’ विधायक 

दरअसल दिल्ली में अब बिना जोड़तोड़ के भी सरकार बनाने की कोशिश शुरू हो गई है . इसके तहत दिल्ली के उप राज्यपाल नजीब जंग विधानसभा की बैठक बुला सकते हैं और सदन को नेता चुनने के लिए कह सकते हैं . राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र यानी एनसीटी एक्ट के सेक्शन 9 के तहत उपराज्यपाल को ये अधिकार मिला हुआ है. लेकिन नेता चुनने के वक्त क्या प्रक्रिया अपनाई जाएगी ये स्पीकर को तय करना होगा. गुप्त मतदान होगा या नहीं पार्टियां व्हिप जारी करेंगी या नहीं ये सारा दारोमदार स्पीकर पर होगा .

 

फिलहाल दिल्ली विधानसभा में 67 विधायक हैं .  बीजेपी के 29 आम आदमी पार्टी के 27 कांग्रेस के 8 और अन्य तीन विधायक हैं . ऐसे में बहुमत का आंकड़ा होता है 34 विधायकों का . अब सवाल उठता है कि अगर एनसीटी एक्ट के तहत उपराज्यपाल सदन को नेता चुनने के लिए कहते हैं तब क्या होगा?

 

कांग्रेस किसो को समर्थन न देकर सदन से वॉकआउट कर जाए . ऐसे में सदन की संख्य होगी 59 और बहुमत के लिए जरूरी होंगे 30 विधायक . निर्दलीय विधायक रामबीर शौकीन के साथ मिलकर बीजेपी 30 के आंकड़े तक आराम से पहुंच जाएगी और सरकार बना लेगी . रामबीर शौकीन खुलकर बीजेपी का समर्थन कर चुके हैं .

 

चुनाव कराने के नाम पर आम आदमी पार्टी वॉकआउट कर जाए . ऐसे में सदन की संख्या हो जाएगी 40 यानी बहुमत के लिए चाहिए होंगे 21 विधायक . ऐसी हालत में बीजेपी अकेले दम पर बहुमत साबित कर लेगी .

 

कांग्रेस आप को समर्थन देती है तो ऐसे में बीजेपी को अगर शौकीन और आप के बागी विधायक विनोद कुमार बिन्नी का साथ भी मिल जाता है तो उसकी संख्या रहेगी सिर्फ 31 जबकि आप और कांग्रेस का आंकड़ा हो जाएगा 35. यानी ऐसी हालत में आम आदमी पार्टी की सरकार बन जाएगी.

 

यहां आपको बता दें कि दिल्ली में सरकार बनाने को लेकर आम आदमी पार्टी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में नौ सितंबर को सुनवाई भी होनी है.

 

अनुच्छेद 175 के तहत पहले कब और किसको नेता चुना गया था

संविधान के जानकारों की माने तो उपराज्यपाल सदन बुलाक उससे अपना नेता चुनने के लिए कह सकते हैं . और तब दिल्ली में सरकार बन सकती है , राज्य के लिए अनुच्छेद 175 में ये प्रावधान है. आपको बताते हैं कि इस प्रावधान के तहत पहले कब और किसको नेता चुना गया था.

 

संविधान के जानकार एसके शर्मा की मानें तो दिल्ली में सरकार बनाने को लेकर चल रही माथापच्ची पर विराम लग सकता है. ऐसा करने के लिए उपराज्य पाल को सदन बुलाकर उसे खुद नेता चुनने के लिए कहना होगा. भारतीय संविधान की धारा 175 में भी इस बात का जिक्र है. साथ ही दिल्ली एनसीटी एक्ट भी उपराज्यपाल को इसकी इजाजत देता है—आपको बता दें कि दिल्ली में इस समय राष्ट्रपति शासन लागू है.

 

इतिहास में अगर थोड़ा पीछे जाए तो यूपी में भी 1998 में एक बार ऐसा हो चुका है. उत्तर प्रदेश के राज्यपाल रोमेश भंडारी ने उस समय की कल्याण सिंह सरकार को बर्खास्त कर जगदम्बिका पाल को सीम की कुर्सी पर बैठा दिया था. इसके खिलाफ कल्याण सिंह ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और अदालत ने आदेश दिया कि सदन के नेता का चुनाव सदन में ही किया जाए. सुप्रीम कोर्ट ने पार्टियों के व्हिप जारी करने पर भी पाबंदी लगा दी थी. साथ ही गुप्त मतदान का आदेश दिया था.

 

हालांकि आप नेता संजय सिंह इस तरह के किसी भी पहल के विरोध में खड़े दिखाई दे रहे हैं. संजय सिंह ने इसे संविधान के खिलाफ बताते हुए उपराज्यपाल को आगाह भी किया है

India News से जुड़े हर समाचार के लिए हमे फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर फॉलो करें साथ ही हमारा Hindi News App डाउनलोड करें
Web Title: BJP will never do horse trading: Rajnath Singh
Explore Hindi News from politics, Bollywood, sports, education, trending, crime, business, साथ ही साथ और भी दिलचस्प हिंदी समाचार
और जाने: BJP horse trading rajnath singh
First Published:

Get the Latest Coupons and Promo codes for 2017