दिल्ली: बेदी को लाने का बीजेपी का 'मास्टरस्ट्रोक' फुस्स रहा

By: | Last Updated: Tuesday, 10 February 2015 10:21 AM
BJP’s ‘masterstroke’ of bringing Bedi boomerangs

नई दिल्ली: पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण बेदी को दिल्ली विधानसभा चुनाव से ठीक पहले जब बीजेपी ने मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया तो इसे आरविंद केजरीवाल के खिलाफ पार्टी का ‘मास्टर स्ट्रोक’ कहा गया था, लेकिन यह कदम पूरी तरह नाकाम साबित हुआ. खुद किरण बेदी के राजनीतिक भविष्य को लेकर भी संशय की स्थिति पैदा हो गई है.

 

पुलिस सेवा में चर्चित रहीं 65 साल की किरण बेदी लोकपाल आंदोलन में टीम अन्ना की प्रमुख सदस्य थी. मुख्यमंत्री के उम्मीदवार के तौर पर उन्होंने पूरी ताकत लगाई और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित बीजेपी के सभी शीर्ष नेताओं ने उनके लिए प्रचार किया.

 

तमाम कोशिशों के बावजूद बेदी की रैलियों में भीड़ नहीं जुट रही थी और दिल्ली बीजेपी के नेताओं की ओर से कथित तौर पर सहयोग नहीं मिलने के कारण उनका प्रचार अभियान फीका था.

 

माना जा रहा है कि दिल्ली बीजेपी के नेताओं को यह नाराजगी थी कि बेदी को उन पर थोपा गया है. दिल्ली बीजेपी के कुछ नेता उनके साथ सामंजस्य नहीं बैठा पा रहे थे और इसी क्रम में पार्टी के भीतर मतभेद भी उभरे.

 

मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित होने के बाद बेदी पर मीडिया की पैनी नजर रहने लगी और इसी दौरान यह भी पता चला कि 1982 में डीसीपी (यातायात) रहते हुए इंदिरा गांधी की कार उठवाने के उनके दावे में पूरी सच्चाई नहीं थी.

 

किरण बेदी पर सोशल मीडिया में भी जमकर निशाना साधा गया. उनकी ओर से साल 2011 में मोदी के बारे में किए गए ट्वीट को लेकर भी उनको घेरा गया. बीजेपी में शामिल होने के बाद बेदी ने कहा कि मोदी के प्रेरक नेतृत्व के कारण वह इस पार्टी से जुड़ीं.

 

किरण बेदी पर यह भी आरोप लगा कि लोकपाल आंदोलन के समय वह बीजेपी के संपर्क में थीं क्योंकि उन्होंने कोयला खदान आवंटन मामले पर अगस्त, 2012 में तत्कालीन बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी के आवास के बाहर प्रदर्शन करने से इंकार किया था. उस समय ‘इंडिया अगेनस्ट करप्शन’ ने इस मामले में विभिन्न राजनीति नेताओं के निवास का घेराव करने का निर्णय किया था. बेदी ने वादा किया था वह निजी हमले नहीं करेंगी, लेकिन बाद में वह केजरीवाल पर खुलकर हमले बोलने लगी. उन्होंने अपने पूर्व साथी केजरीवाल को ‘जहरीले’ प्रभाव वाला और ‘झूठा’ करार दिया था.

 

आंदोलन के समय मिलकर काम करने वाले बेदी और केजरीवाल के बीच राजनीति में कदम रखने को लेकर दरार आ गई. केजरीवाल ने जब आम आदमी पार्टी बनायी तो बेदी ने इस कदम की आलोचना की. उस वक्त उन्होंने कहा कि वह अन्ना हजारे के साथ काम करेंगी और किसी राजनीतिक दल में कभी शामिल नहीं होंगी.

 

दिसंबर, 2013 के विधानसभा चुनाव से पहले केजरीवाल ने बेदी को आप की ओर से मुख्यमंत्री का उम्मीदवार बनने की प्रस्ताव दिया, लेकिन उन्होंने इंकार कर दिया.

 

लोकसभा चुनाव के दौरान बेदी ने खुलकर बीजेपी और मोदी का समर्थन किया. चुनाव के बाद भी उन्होंने मोदी सरकार का समर्थन जारी रखा और बीजेपी में शामिल होने अपनी इच्छा का संकेत देती रहीं.

 

बेदी का जन्म नौ जून, 1949 को पंजाब के अमृतसर में हुआ था. स्कूली दिनों में वह एनसीसी की सक्रिय सदस्य थीं. कॉलेज के दिनों में वह टेनिस खिलाड़ी थीं. वह 1972 में पुलिस सेवा में शामिल हुई और देश की पहली महिला आईपीएस अधिकारी बनीं.

 

साल 1975 की गणतंत्र दिवस की परेड में उन्होंने दिल्ली पुलिस की संपूर्ण पुरूष टुकड़ी का नेतृत्व किया. ऐसा करने वाली वह पहली महिला अधिकारी थीं. तिहाड़ जेल की महानिदेशक रहते हुए उन्होंने कई सुधारों को अंजाम दिया.

 

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