क्या कालाधन कभी वापस आ पाएगा या लिफाफे में ही बंद रह जाएगा?

By: | Last Updated: Wednesday, 29 October 2014 1:51 PM

नई दिल्ली : खोदा पहाड़ निकली चुहिया. कुछ यही अब तक काले धन के मसले पर हो रहा है. चुनाव प्रचार में बड़े-बड़े दावों के बीच हकीकत यही है कि अब तक सरकार खाली हाथ है. हजारों करोड़ के दावों के बीच अब तक सरकार ये बता पाने की हालत में नहीं है कि विदेशों में आखिर कितना काला धन है? और सबसे बड़ा सवाल कि क्या कालाधन कभी वापस आ पाएगा. या लिफाफे में ही बंद रह जाएगा.

 

सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को सौंपी 627 कालेधन खाताधारकों की लिस्ट 

चुनाव प्रचार में विदेशों में काला धन बड़ा मुद्दा बना था . पीएम पद की दौड़ में शामिल नरेंद्र मोदी ने इसे खूब भुनाया भी था . लेकिन आज मोदी सरकार को काले धन पर कटघरे में खड़ा किया जा रहा है.

 

रामदेव ने कहा कि मोदी की नीयत पर शक नहीं है लेकिन अब जो देरी हो रही है उससे आशंका का माहौल तैयार हो रहा है. चुनाव से पहले जो दावे हुए थे जरा उस पर भी नजर डालिए.

 

विदेशों में कितना कालाधन जमा है?

 

2006 में यूपीए सरकार ने श्वेत पत्र के जरिये बताया था कि विदेशों में 23 हजार 373 करोड़ काला धन है. 2010 में ये आंकड़ा घटकर 9 हजार 295 करोड़ हो गया. बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी का दावा है कि 120 लाख करोड़ काला धन है . सीपीएम नेता सीताराम येचुरी के मुताबिक 10 लाख करोड़ से ज्यादा काला धन है . कालाधन वापस लाने की मुहिम में सबसे आगे रहे रामदेव का तो दावा है कि देश का 400 लाख करोड़ रुपए काले धन के तौर पर विदेश में जमा है .

 

अभी तक की जांच में जो तथ्य सामने आ रहे हैं उनसे ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार के पास विदेशों में काला धन रखने वाले बैंक खातों की पूरी जानकारी नहीं हैं. अभी तक सरकार ने जिन तीन लोगों के नाम उजागर किए हैं उनके खातों की जांच के दौरान आयकर विभाग ने मात्र 2 साल का आकलन किया है. यानी सरकार के पास ना पहले की जानकारी है ना बाद की.

 

अब जरा उस हकीकत पर नजर डालिए जो सरकार कोर्ट में पेश कर रही है. इनकम टैक्स विभाग ने तमाम कोशिशों के बाद भी डाबर के प्रदीप बर्मन के ज्यूरिख के HSBC के खाते में करीब साढ़े बत्तीस लाख डॉलर की जानकारी निकाल पाई है जो आज के मुताबिक 18 करोड़ होते हैं. सरकार ने जो 627 नाम सुप्रीम कोर्ट को बताए हैं. इनमें से आधे नामों के खिलाफ जांच भी नहीं चल रही क्योंकि ये लोग NRI हैं.

 

एनआरआई कैसे इस जांच से बच रहे हैं 

 

आयकर अधिनियम की धारा 147-48 के तहत. लोगों के खिलाफ केवल पिछले उनके 16 सालों की जांच कर सकता है. बड़ा सवाल ये है कि जिनके खाते 16 साल पहले के हैं उनके खिलाफ जांच बंद हो जाएगी.

 

बर्मन के खिलाफ आरोप पत्र में आयकर विभाग ने ये भी कहा है कि बर्मन ने खुद तो जानकारी दी नहीं बल्कि ये कोशिश भी की कि विदेशों से कोई जानकारी ना आने पाए. यही बात बाकियों पर भी लागू हो रही है.

 

अगर बैंक खाता धारक तैयार हो जाए तो सारा खातों की डीटेल मिलनी बेहद आसान हो जाएगी. नियमों के मुताबिक इसके लिए खाता धारक को मात्र एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करने होंगे. लेकिन दिलचस्प तथ्य ये भी है कि जिन लोगों का नाम काला धन के लिए लिया जा रहा है उनमें से एक ने भी सरकार को आकर नहीं बताया है कि उनका विदेश में खाता है.

 

अब तक विदेशों से एक पैसा भी वापिस नहीं आया है. सिर्फ आंकड़े बताए जा रहे हैं. अब सवाल ये काला धन का जो मुद्दा चुनावों में बीजेपी ने उठाया था क्या अब वो

उसी के गले की फांस बनने वाला है.

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