सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दिए तीन काले धन वालों के नाम, प्रदीप बर्मन, पंकज लोढिया, राधा टिम्ब्लू के नामों का खुलासा

By: | Last Updated: Monday, 27 October 2014 4:57 AM
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नई दिल्ली: काले धन पर आज बड़ा खुलासा हुआ है. सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने काले धन पर हलफनामा दिया है. इस हलफनामे में 3 ऐसे लोगों के नाम हैं जिनके खाते स्विस बैंक में हैं. डाबर ग्रुप के पूर्व निदेशक प्रदीप बर्मन, राजकोट के बुलियन कारोबारी पंकज लोढिया और गोवा की खनन कारोबारी राधा टिंब्लो और उनके परिवार के चार लोगों के नाम इस हलफनामे में हैं.

 

LIVE UPDATE:

 

# आम आदमी पार्टी नेता अरविंद केजरीवाल ने स्विस बैंक के 15 खातेदारों के नाम बताएं. उनके मुताबिक मुकेश अंबानी, अनिल अंबानी, कोकिलाबेन अंबानी,  संदीप टंडन, अनु टंडन, प्रवीण स्वामी, नरेश गोयल  हैं.

 

# केजरीवाल का कहना है कि कालेधन के सारे नाम सार्वजनिक किए जाएं और सभी के खिलाफ एक्शन हो.

 

# सीपीएम नेता सीताराम येचुरी का कहना है कि सरकार की मंशा सारी जानकारी नहीं देने की है. उनकी पार्टी इस मुद्दे को संसद में उठाएगी.

 

 

पीटीआई के मुताबिक सरकार ने तीन काले धन वाले लोगों के नाम कोर्ट में दिए हैं. इन खातेदारों में डाबर के निदेशक प्रदीप बर्मन और राजकोट के बुलियन कारोबारी पंकज चमनलाल लोढ़िया के नाम है.

 

कालाधन: तीन नाम आए, मोदी जी! इन सवालों के जवाब कौन देगा? 

इसके साथ ही गोवा के खनन कारोबारी राधा टिम्ब्लू का नाम भी सरकार ने अपने हलफनामे में दिया है.

कांग्रेस नेताओं के भी नाम!

 

दूसरी ओर एनडीटीवी ने दावा किया है कि स्विस बैंक के खातेदारों में कांग्रेस के 4 नेताओं की जांच हो रही है. एनडीटीवी के दावों के मुताबिक कांग्रेस के दो नेता महाराष्ट्र से आते हैं, जबकि एक का संबंध यूपी से है. एक नेता यूपीए सरकार में राज्य मंत्री रहे हैं.

 

प्रदीप बर्मन की सफाई

 

कौन हैं प्रदीप बर्मन! 

काले धन में नाम सामने आने पर डाबर के निदेशक प्रदीप बर्मन ने अपना पक्ष रखते हुए कहा है  कि, ”खाता खुलने के वक्त मैं NRI था. नियमों के मुताबिक खाता खुला था. इनकम टैक्स को सारी जानकारी थी. मैंने सारे टैक्स चुकाए थे.”

 

प्रशांत भूषण का आरोप

 

आम आदमी पार्टी के नेता प्रशांत भूषण का कहना है कि सरकार ने काले धन वाले के नाम तो बताएं हैं, लेकिन वो बड़े नाम नहीं बताए गए हैं जिनके नाम उनकी पार्टी पहले ही उजागर कर चुकी है. भूषण का कहना है कि स्विस बैंक में मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी सहित कई बड़े कारोबारियों के खाते हैं, लेकिन सरकार उसपर चुप्पी साध रखी है.

 

कांग्रेस का बीजेपी पर वार

 

कांग्रेस नेता राशिद अल्वी का कहना है कि तीन नाम ही क्यों बताए गए और नाम बताने से काम नहीं चलेगा बल्कि पैसे वापस लाने होंगे. अल्वी ने कहा कि ये जो नाम बताए गए हैं उनमें किसी का भी किसी राजनीतिक पार्टी से संबंध नहीं है.

 

टाइम्स ऑफ इंडिया का दावा-

 

 

आपको बता दें कि पहले ये खबर थी कि सरकार 136 लोगों के नाम बताएगी लेकिन सरकार आज सिर्फ 3 लोगों के नाम लेकर सुप्रीम कोर्ट बताए गए. तीन नाम उन लोगों के है जिनके खिलाफ सरकार ने कानूनी कार्रवाई शुरू कर रखी है. सरकार का मानना है कि बिना पूरी जांच के लिए किसी का नाम बताना ग़लत होगा.

 

‘काले धन वालों की पूरी लिस्ट सार्वजनिक होनी चाहिए’

 

काले धन को लेकर जितनी राजनीति हो रही है उससे लगता है कि सिर्फ 3 नाम देने से विवाद औऱ बढ़ेगा क्योंकि काले धन को लेकर कानूनी लड़ाई लड़ रहे लोग और बीजेपी के नेता भी चाहते हैं कि पूरे नाम बताए जाने चाहिए.

 

राम जेठमलानी और स्वामी क्या चाहते हैं?

भारत सरकार को यूरोप के देशों से 800 भारतीयों के बैंक खातों की सूची मिली थी. राम जेठमलानी और सुब्रमण्यम स्वामी उन लोगों के नाम सार्वजनिक करने की मांग कर रहे हैं जिनके नाम यूरोप से दी गई सूची में शामिल हैं. बीजेपी जब विपक्ष में थी तब उसने मनमोहन सरकार से लिस्ट को सार्वजनिक करने की जोरदार मांग की थी.

 

 

कालेधन पर सरकार की दिक्कत!

हर जगह से सवाल हो रहा है. लिस्ट को सार्वजनिक करने में जो समस्या यूपीए सरकार बताती थी वही मुश्किल बीजेपी सरकार बता रही है. आखिर सरकार को नाम बताने में क्या दिक्कत है?

 

काला धन रखने वालों के नाम सार्वजनिक करने की हमेशा से मांग करने वाली बीजेपी सत्ता में आते ही पलट गई. मोदी सरकार की तरफ से बताया गया कि डबल टैक्सेशन अवॉयडेंस ट्रीटी के चलते सरकार काला धन रखने वालों का नाम नहीं बता सकती. कांग्रेस ने तुरत सरकार पर हमला बोल दिया. कांग्रेस का कहना था कि यूपीए सरकार ने भी अपनी इसी मजबूरी के चलते नामों को सार्वजनिक नहीं किया था. कांग्रेस ने बीजेपी पर चुनाव दौरान जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया. अपने खिलाफ विरोध बढ़ता देख वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सफाई दी.

 

ABP स्पेशल: क्या है कालाधन, कहां से आया 800 खाताधारियों के नाम और सरकार को नाम बताने में क्या है दिक्कत?

 

विदेशी बैंकों में काला धन जमा करने वालों के नाम शीघ्र सार्वजनिक कर दिए जाएंगे. जिन खाताधारकों के खिलाफ भारतीय अधिकारी आरोप दायर कर रहे हैं, सरकार उनके नाम अदालत के सामने उजागर कर देगी. जेटली ने एक न्यूज चैनल से बातचीत में यहां तक कह दिया कि विदेश में काला धन रखने वालों के नाम उजागर हो गए तो कांग्रेस को ही शर्मिदा होना पड़ेगा. जेटली के इस बयान के बाद कांग्रेस ने बीजेपी पर ब्लैकमेल करने का आरोप लगाया.

 

विदेशी बैंकों में जिन 800 खाताधारियों के नाम सार्वजनिक करने की मांग की जा रही है आखिर उनका नाम भारत में कैसे आया?

 

भारत से काला धन इकठ्ठा कर विदेशी बैंकों में जमा करने वालों के राज़ धीरे-धीरे खुलना शुरू हुआ. जेनेवा में फ़्रांस सरकार ने भारत को 700 बैंक खातों की सूची सौंपी, जिसके बाद सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज इन खातों की जांच में जुट गया. जर्मनी ने भी भारत सरकार को उन लोगों के नाम की सूची सौंपी जिनके विदेशी खातों में पैसे जमा हैं.

 

काले धन का मुद्दा गर्माता जा रहा है. सरकार के पास 800 विदेशी खाताधारकों के नाम जब मौजूद हैं तो सिर्फ 136 लोगों के नाम क्यों बताए जाएंगे? बाकी लोगों के नाम बताने में क्या मुश्किल हैं- आखिर क्या है काले धन का सच? लेकिन क्या है काला धन?

 

नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनैंस ऐंड पॉलिसी (एनआईपीएफपी) के मुताबिक, काला धन वह आय होती है जिस पर टैक्स की देनदारी बनती है लेकिन उसकी जानकारी टैक्स डिपार्टमेंट को नहीं दी जाती है. इसी वजह से सबसे ज्यादा काला धन पैदा होता है.

 

काले धन की लिस्ट में यूपीए के पूर्व मंत्री का नाम ?

 

आपराधिक गतिविधियों से भी काला धन बनता है. सरकारी अफसर की रिश्वतखोरी और चोरी, अवैध माइनिंग, जालसाजी और घोटाले की वजह से काला धन तेजी से बढ़ा है.

 

सवाल ये है कि आखिर विदेश में कितना काला धन है जिसको लेकर इतना हंगामा हो रहा है.

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