BLOG: क्या इस कड़वाहट से शासन चल पाएगा?

By: | Last Updated: Monday, 18 May 2015 5:35 PM

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और एलजी नजीब जंग के बीच तनातनी बढ़ती जा रही है. लगता है अब ये विवाद राष्ट्रपति के पास जाकर ही सुलझेगा, उपराज्यपाल नजीब जंग ने राजिंदर कुमार की नियुक्ति क्या ख़ारिज की  मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अब इस झगड़े को सुलझाने के लिए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मंगलवार को मुलाक़ात करने वाले हैं.

 

कार्यवाहक मुख्य सचिव शकुंतला गैमलिन की नियुक्ति से तिलमिलाए दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल अब राष्ट्रपति के पास जाकर इस मामले के हल के लिए चर्चा करेंगे. इससे पहले शनिवार को गैमलिन की नियुक्ति को लेकर उपराज्यपाल के साथ अपने विवाद के बाद मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति से मुलाकात का समय मांगा था.

 

सूत्रों के मुताबिक केजरीवाल राष्ट्रपति के साथ अपनी इस मुलाकात के दौरान नौकरशाहों के ट्रांसफर और पोस्टिंग के साथ चुनी हुई सरकार की राय को नजरअंदाज करने जैसे उपराज्यपाल के फैसलों की शिकायत राष्ट्रपति से करेंगे. सूत्र बता रहे हैं कि केजरीवाल राष्ट्रपति से मिलकर उपराज्यपाल के कार्यालय की भूमिका और क्षेत्राधिकार पर भी चर्चा करेंगे .

 

दिल्ली सरकार नियमों का हवाला देते हुए लगातार ये यह कह रही है कि नौकरशाहों के मामले में दिल्ली के मुख्यमंत्री से सलाह ली जाती है और जनहित में सक्षमता के आधार पर ही जो नियुक्ति सही है वहीं फैसला लिया जाता है लेकिन कार्यकारी मुख्य सचिव की नियुक्ति के समय केजरीवाल सरकार से सलाह नहीं ली गई.

 

गैमलिन का तो विवाद चल ही रहा था कि अनिंदो मजूमदार को लेकर भी विवाद गहरा गया. केजरीवाल ने मजूमदार का शनिवार को तबादला दूसरे विभाग में कर दिया था, क्योंकि उन्होंने जंग के निर्देश पर गैमलिन को नियुक्ति पत्र जारी किया था. उपराज्यपाल ने उसी शाम मजूमदार के तबादले को ‘अवैध’ करार दिया और कहा कि इस फैसले पर उनकी मंजूरी नहीं है.

उसके बाद पूरे विवाद में आए राजिंदर कुमार जिनकी नियुक्ति अरविंद केजरीवाल ने उसी पद पर की  जिस जगह अनिंदो मजूमदार तैनात हैं. अब उपराज्यपाल नजीब जंग ने कुमार की नियुक्ति को खारिज कर दिया है, दो अफसर एक ही पद पर काम कर रहे हैं.

 

इसके बाद कुमार की नियुक्ति पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए जंग ने केजरीवाल को एक पत्र लिख दिया. जिसमें मजूमदार के स्थान पर उनकी नियुक्ति को ‘अवैध’ ठहराया गया और साथ ही साफ तौर पर कहा गया कि वरिष्ठ नौकरशाहों के तबादले और नियुक्ति पर आखिरी फैसला लेने का हक उनके पास है.

 

इस तनातनी की वजह से प्रशासनिक गतिविधियों में तो रुकावटें आ ही रही है क्योंकि मुश्किल ये है प्रमुख सचिव का पद ऐसा होता है जिससे एक मुख्यमंत्री को दिन में हर पल हर फैसले के लिए समन्वय साध कर काम करना पड़ता है. ये विवाद का अंत होता दिख नहीं रहा अब देखना ये होगा कि केजरीवाल राष्ट्रपति से मिलने के बाद ये कड़वाहट दूर कर पाते हैं या नहीं.

 

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