ब्लॉग: आखिर सोनिया गांधी ने इंदिरा गांधी की याद क्यों दिलाई?

By: | Last Updated: Tuesday, 8 December 2015 12:31 PM
Blog on Sonia Gandhi statement

नई दिल्ली: नेशनल हेरल्ड केस में कांग्रेस ने मोदी सरकार पर राजनीतिक बदले की भावना रखने का आरोप लगाया है. कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने आक्रामक अंदाज में कहा है कि ‘मैं इंदिरा गांधी की बहू हूं. मैं किसी से डरती नहीं ‘  सोनिया गांधी ने ये भी कहा कि वो परेशान नहीं हैं. कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने भी कहा है कि मोदी सरकार बदले की राजनीति कर रही है.

 

जैसा कि आप जानते है दिल्ली हाई कोर्ट ने 7 दिसंबर को नेशनल हेरल्ड मामले में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, उपाध्यक्ष राहुल गांधी समेत 6 लोगों को झटका दिया था. हाईकोर्ट ने इन लोगों की अपील को खारिज करते हुए इन्हें निचली अदालत में पेश होने का आदेश दिया था. हालांकि कांग्रेस कह रही है कि इस फैसले को चुनौती देगी. नेशनल हेरल्ड केस जब अदालत में लड़ा जा रहा है फिर कांग्रेस क्यों कह रही है कि गांधी परिवार के खिलाफ मोदी सरकार खुन्नस उतार रही है?

 

नेशनल हेरल्ड समाचार पत्र की अरबों रुपये की संपत्ति हड़पने के आरोप से घिरे हैं कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी. सोनिया गांधी ने क्यों कहा है कि वो इंदिरा गांधी की बहू हैं और वो किसी से डरती नहीं हैं इसका जवाब हम तलाश करेंगे आगे. पहले जानने की कोशिश करते हैं कि नेशनल हेरल्ड मामला क्या है और किस तरह सोनिया और राहुल गांधी इस कथित घोटाले से घिरे हैं.

 

बीजेपी नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने निचली अदालत में याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि नेशनल हेराल्ड ट्रस्ट में पैसों के लेन-देन में कानून का उल्लंघन हुआ है. स्वामी ने अपनी याचिका में कहा है कि सोनिया और राहुल ने कांग्रेस पार्टी से लोन देने के नाम पर नेशनल हेराल्ड की 5 हजार करोड़ की संपत्ति जब्त कर ली.

 

पहले नेशनल हेराल्ड की कंपनी एसोसिएट जरनल लिमिटेड AJL को कांग्रेस ने 26 फरवरी, 2011 को 90 करोड़ का लोन दिया. इसके बाद 5 लाख रुपये से यंग इंडियन कंपनी बनाई गई, जिसमें सोनिया और राहुल की 38-38 फीसदी हिस्सेदारी है.

 

शेष हिस्सेदारी कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नांडिस के पास है. बाद में 10-10 रूपये के नौ करोड़ शेयर यंग इंडियन को दे दिए गए और बदले में यंग इंडियन को कांग्रेस का लोन चुकाना था. 9 करोड़ शेयर के साथ यंग इंडियन को AJL के 99 फीसदी शेयर हासिल हो गए.  इसके बाद कांग्रेस ने 90 करोड़ का लोन भी माफ कर दिया. यानी यंग इंडियन को मुफ्त में स्वामित्व मिल गया .

 

आइए अब ये पता लगाने की कोशिश करते हैं कि आखिर सोनिया गांधी के ये कहने का क्या मतलब है कि वो इंदिरा गांधी की बहू हैं और उन्हें डर नहीं लगता? सवाल ये भी है कि नेशनल हेरल्ड विवाद से घिरी सोनिया गांधी खुद को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का बहू बताकर आखिर कहना क्या चाहती हैं? सोनिया गांधी के  ‘इंदिरा की बहू’  वाले बयान को समझने के लिए चलना पड़ेगा इतिहास के पन्नों में. 

 

1975 का साल था. इंदिरा गांधी देश की प्रधानमंत्री थीं. 12 जून, 1975 को एक अदालती फैसले में इंदिरा गांधी के चुनाव को निरस्त कर दिया गया. हालांकि उन्हें  सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की मोहलत दी गई लेकिन सुप्रीम कोर्ट से भी इंदिरा गांधी को पूर्ण राहत नहीं मिली.

 

सुप्रीम कोर्ट ने इंदिरा गांधी को बतौर प्रधानमंत्री संसद में आने की इजाजत तो दी, लेकिन बतौर लोकसभा सदस्य वोट करने पर प्रतिबंध लगा दिया. इस फैसले से इंदिरा गांधी इतना नाराज हुईं कि अगले दिन ही उन्होंने बिना कैबिनेट की औपचारिक बैठक के आपातकाल लगाने की अनुशंसा राष्ट्रपति से कर डाली, जिस पर राष्ट्रपति ने 25 और 26 जून की मध्य रात्रि में ही अपने हस्ताक्षर कर डाले और इस तरह देश में लग गई पहली और आखिरी इंटरनल इमरजेंसी. लोगों के मौलिक अधिकार छीन लिए गए.

 

इंदिरा गांधी ने चुन-चुन कर अपने विरोधी नेताओं को जेल में डाल दिया. भारत में करीब 21 महीने तक आपातलकाल रहा. इस दौरान इंदिरा गांधी ने अपने बेटे संजय गांधी के साथ मनमानी तरीके से शासन चलाया. प्रेस की आजादी ले ली गई. सरकार के खिलाफ विरोध का अधिकार लोगों से ले लिया गया. लाखों की संख्या में जबरन लोगों की नसबंदी कराई गई. सरकार के किसी फैसले का जो भी विरोध करता उसे जेल में डाल दिया जाता.

 

आखिरकार 21 मार्च 1977 को इंदिरा गांधी ने आपातकाल यानी इमरजेंसी वापस लेने का एलान किया. इसके साथ ही देश में आम चुनाव कराने की घोषणा हुई. लोकसभा चुनाव में इंदिरा गांधी की पार्टी कांग्रेस की करारी हार हुई. इंदिरा गांधी खुद चुनाव हार गईं. इंदिरा के बेटे संजय गांधी भी संसद नहीं पहुंच सके.

 

देश में मोरारजी देसाई की अगुवाई में जनता पार्टी की सरकार बनी. मोरारजी देसाई देश के प्रधानमंत्री बने जबकि गृह मंत्री बनाए गए चौधरी चरण सिंह. जनता सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जे.सी. शाह की अध्यक्षता में एक जांच आयोग गठित किया. शाह कमीशन को आपातकाल के दौरान हुई ज्यादतियों का और अनियमितताओं की जांच का जिम्मा दिया गया.

 

शाह कमीशन की रिपोर्ट के आधार पर इंदिरा गांधी के खिलाफ तत्कालीन गृह मंत्री चौधरी चरण सिंह ने कार्रवाई का आदेश दिया. इंदिरा गांधी और संजय गांधी दोनों को जेल भेज दिया गया. इंदिरा गांधी को दिल्ली के तिहाड़ जेल में रखा गया.

 

इंदिरा गांधी के जेल भेजे जाने का पूरे देश में विरोध शुरू हो गया. लोगों के बीच ये धारणा बनने लगी कि जनता सरकार इंदिरा गांधी और उनके बेटे संजय गांधी के खिलाफ बदले की राजनीति से कार्रवाई कर रही है. जेल से बाहर आते ही इंदिरा गांधी को खोई हुई लोकप्रियता वापस मिल चुकी थी.

 

इस बीच जनता पार्टी सरकार के नेताओं के बीच आपस में खींचातानी शुरू हो गई थी. बहुत कम समय बाद ही जनता सरकार अपने अंतर्विरोधों की वजह से गिर गई. कुछ ही महीनों बाद लोकसभा चुनाव हुआ और इसमें इंदिरा गांधी की फिर से वापसी हुई.

 

इसलिए नेशनल हेरल्ड केस में जब सोनिया गांधी ने खुद को इंदिरा गांधी की बहू होने की याद दिलाई और खुद को निडर साबित करने की कोशिश की तो कहीं न कहीं उनका इशारा इंदिरा गांधी को तिहाड़ भेजे जाने के बाद मिली उस सहानुभूति से था जिसकी याद दिलाना चाहती हैं सोनिया गांधी.

India News से जुड़े हर समाचार के लिए हमे फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर फॉलो करें साथ ही हमारा Hindi News App डाउनलोड करें
Web Title: Blog on Sonia Gandhi statement
Explore Hindi News from politics, Bollywood, sports, education, trending, crime, business, साथ ही साथ और भी दिलचस्प हिंदी समाचार
First Published:

Get the Latest Coupons and Promo codes for 2017