बॉलीवुड का सबसे बड़ा स्कैंडल: 'किक' को कैसे मिला सर्टिफिकेट?

By: | Last Updated: Friday, 22 August 2014 3:26 PM
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नई दिल्ली : बॉलीवुड के सबसे बड़े स्कैंडल का पार्ट-3. ये खबर जुड़ी है अब तक साल 2014 की सबसे बड़ी हिट फिल्म सलमान खान की किक से. एबीपी न्यूज को मिले दस्तावेजों के मुताबिक फिल्म को सेंसर बोर्ड का सर्टिफिकेट पहले मिला जबकि एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया से जानवरों के साथ शूटिंग की मंजूरी इसके 24 घंटे बाद. कुछ ऐसा ही अक्षय कुमार की फिल्म इंटरटेनमेंट के साथ भी हुआ है.

 

साल 2014 की सबसे बड़ी हिट फिल्म साबित हो चुकी सलमान खान की फिल्म किक. 25 जुलाई को ईद के दिन रिलीज हुई इस फिल्म ने अब तक 231 करोड़ रुपये की कमाई कर ली है और इस लिहाज से साल की सबसे कमाऊ फिल्म है.

 

चौथे हफ्ते में भी किक की कमाई हर रोज करीब 25 लाख रुपये से ज्यादा है. किक की कमाई का जिक्र इसलिए क्योंकि इसी जुड़ा है आज का खुलासा. इसी से जुड़ा है वो बड़ा सवाल कि क्या इस किक की कमाई से मिली सेंसर बोर्ड के पूर्व सीईओ राकेश कुमार को मलाई? वही राकेश कुमार जो सेंसर का सर्टिफिकेट देने के बदले घूस लेने के इल्जाम में ना सिर्फ सस्पेंड हो चुके हैं बल्कि सीबीआई की हिरासत में भी पहुंच चुके हैं.

 

एबीपी न्यूज ये सवाल इसलिए उठा रहा है कि उसके पास मौजूद हैं ये दो अहम दस्तावेज. जो जारी किया जाता है एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया यानी AWBI की ओर से और जो AWBI की वेबसाइट पर मौजूद है.

 

इस दस्तावेज में फिल्म किक के निर्देशक साजिद नाडियाडवाला के प्रोडक्शन हाउस का पूरा पता यानी मेसर्स नाडियाडवाला ग्रांडसन इंटरटेनमेंट प्राईवेट लिमिटेड, नाडियाड वाला विला, ओशन व्यू, जेपी रोड, वर्सोवा, मुंबई. इसके अगले खाने में लिखा है किक फिल्म के लिए किन-किन जानवरों के साथ शूटिंग की मंजूरी मांगी गई . यानी 3 मुर्गे और 500 कबूतर. इसके आगे जानकारी दी गई है कि किक फिल्म के हीरो सलमान खान मुर्गों और कबूतरों के साथ बाजार का एक सीन शूट करेंगे . जिसकी मंजूरी चाहिए. और फिर बताया गया है ये मंजूरी किक फिल्म के लिए चाहिए और आखिरी खाने में लिखा है एप्रूव्ड यानी मंजूरी दी जाती है.

 

सबसे चौंकाने वाली है इस दस्तावेज की तारीख. 16 जुलाई 2014 . ये तारीख क्यों चौंका रही है. ये बताता है दूसरा दस्तावेज. जो फिल्म सेंसर बोर्ड यानी CBFC की वेबसाइट पर मौजूद है .

 

इस दस्तावेज में दर्ज है कि किक को सेंसर बोर्ड का सर्टिफिकेट कब मिला .  इसमें दर्ज है कि किक को यू ए कैटगरी में सेंसर का सर्टिफिकेट मिला था. और यहां भी दर्ज है एक और तारीख ये तारीख है ये तारीख है 14 जुलाई 2014.

 

एनिमल वेलफेयर बोर्ड ने शूटिंग की मंजूरी दी 16 जुलाई साल 2014 को और सेंसर बोर्ड ने पूरी फिल्म देखकर सेंसर का सर्टिफिकेट इसके 48 घंटे पहले यानी 14 जुलाई साल 2014 को ही जारी कर दिया. सवाल ये भी है कि जब फिल्म को शूटिंग की मंजूरी ही 16 जुलाई को मिली तो सिर्फ 9 दिन में ही यानी 25 जुलाई को फिल्म रिलीज पर्दे पर भी पहुंच गई? आखिर कैसे हुआ किक के साथ ये खेल?

 

हमने इस बारे में फिल्म के निर्माता साजिड नाडियाडवाला से उनका पक्ष भी मांगा है लेकिन उनकी प्रतिक्रिया नहीं आई है. नियम ये है कि सेंसर बोर्ड किसी फिल्म को तभी सेंसर सर्टिफिकेट जारी करता है जब एनिमल वेलफेयर बोर्ड की ना सिर्फ मंजूरी मिल चुकी हो बल्कि पूरी शूटिंग एनिमल वेलफेयर बोर्ड के निर्देशों के मुताबिक हुई हो. सेंसर बोर्ड के पूर्व सीईओ राकेश कुमार की गिरफ्तारी के बाद सेंसर सर्टिफिकेट दिलाने का धंधा करने वाले दलालों ने ये जानकारी सीबीआई को दी है कि किक फिल्म के लिए भी घूस ली गई. सीबीआई अब इसकी जांच में जुटी है.

 

इसी साल रिलीज हुई एक दूसरी फिल्म एंटरटेनमेंट को मिले सेंसर बोर्ड के सर्टिफिकेट को लेकर भी एंजेटों ने गड़बड़ी की शिकायत सीबीआई को दी है. इस फिल्म में भी एंटरटेनमेंट नाम का अहम किरदार एक कुत्ते ने ही निभाया है.

 

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस में सेंसर बोर्ड के पूर्व सीईओ राकेश कुमार की गिरफ्तारी के बाद 20 अगस्त को छपी खबर के मुताबिक अक्षय कुमार की फिल्म इंटरटेनमेंट का जिक्र AWBI यानी एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया की वेबसाइट पर है नहीं लेकिन इसके बावजूद उसे सेंसर का सर्टिफिकेट मिला और फिल्म 8 अगस्त को रिलीज हो गई.

 

ऐसे में सवाल तो उठते ही हैं? मनोरंजन की दुनिया में जानवरों के इस्तेमाल के नियम बेहद सख्त हैं. AWBI की वेबसाइट AWBI.ORG के मुताबिक जानवरों की शूटिंग के लिए सिर्फ आवेदन देना काफी नहीं है. ऐसा तभी किया जा सकता है जब AWBI को तारीख, समय और शूटिंग की जगह की पूरी जानकारी दी जाए और औपचारिक मंजूरी ली जाए. अगर ये जानकारियां नहीं दी जातीं तो बोर्ड के पास NOC  ना देने का पूरा अधिकार सुरक्षित है.

 

यही वजह है कि जब अक्षय कुमार इंटरटेनमेंट फिल्म को प्रमोट करने के लिए कॉमेडी नाइट्स विद कपिल में गए थे तो कपिल शर्मा के प्रोडक्शन हाउस ने 6 अगस्त को ही एनिमल वेलफेयर बोर्ड से एनओसी ले ली थी. ऐसा ना करने पर शो पर कार्रवाई हो सकती थी.

 

ऐसे में सवाल ये है कि क्या किक और इंटरटेनमेंट जैसी फिल्मों को सेंसर का सर्टिफिकेट देने में जल्दबाजी की गई?  क्या सेंसर बोर्ड के सीईओ राकेश कुमार ने सर्टिफिकेट जारी करते वक्त नियमों की अनदेखी की?

 

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक अगर प्रकिया की बात करें तो कोई भी फिल्म जिसमें कोई जानवर दिखाया जाता है उसे एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया ( जिसका हेड ऑफिस चेन्नई में है) से सर्टिफिकेट लेना होता है. अगर ये प्रक्रिया पूरी की जाए तो सेंसर सर्टिफिकेट लेने का काम कम से कम दो महीने में पूरा होता है.

 

लेकिन हम आपको बता चुके हैं कि आनन-फानन में फिल्म और विज्ञापन पास करने के लिए गिरफ्तार हो चुके सेंसर बोर्ड के सीईओ राकेश कुमार पर अपनी जेब गर्म करने का आरोप लगा है. ऐसे में अब सवालों के घेरे में किक और एंटरटेनमेंट जैसी बड़ी फिल्में भी हैं.

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