कल है बहन जी का बर्थ डे, क़रीबीयों के साथ काटेंगी केक-BSP supporters will celebrate party chief Mayawati’s birthday tomorrow

कल है बहन जी का बर्थ डे, करीबियों के साथ काटेंगी केक

ये उनका 62वॉं जन्म दिन है. पार्टी इसे लोक कल्याणकारी दिवस के रूप में मना रही है. ख़ुद बहिन जी ने लखनऊ में एक प्रेस कनफ़्रेंस करने का फ़ैसला किया है. इस मौक़े पर वे मेरे संघर्षमय जीवन और बीएसपी मूवमेंट का सफ़रनामा का विमोचन भी करेंगी.

By: | Updated: 14 Jan 2018 07:15 PM
BSP supporters will celebrate party chief Mayawati’s birthday tomorrow

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश की पुर्व मुख्यमंत्री और बीएसपी सुप्रिमों मायावती 15 जनवरी को अपने करीबी लोगों के साथ बर्थ डे केक काटेंगी. ये उनका 62वॉं  जन्म दिन है. पार्टी इसे लोक कल्याणकारी दिवस के रूप में मना रही है. ख़ुद बहिन जी ने लखनऊ में एक प्रेस कनफ़्रेंस करने का फ़ैसला किया है. इस मौक़े पर वे मेरे संघर्षमय जीवन और बीएसपी मूवमेंट का सफ़रनामा का विमोचन भी करेंगी. जिसे उन्होंने ख़ुद लिखा है. इस किताब को बीएसपी के लोग ‘ब्लू बुक’ कहते हैं. मायावती ने इस साल किताब का तेरहवाँ भाग लिखा है. जिसे पार्टी के सभी बड़े नेताओं को दिया जाता है. लेकिन आम लोग इसे  न तो ख़रीद सकते हैं और न ही ले सकते हैं.


 दिल्ली से लेकर लखनऊ तक केक कटते थे


एक ज़माना था जब बहिनजी के बर्थ डे की चर्चा देश में ही नहीं विदेशों में भी होती थी. महीने भर तक तैयारियां चलती रहती थीं. दिल्ली से लेकर लखनऊ तक केक कटते थे, भोज होता था. मायावती ख़ुद हीरे और सोने के गहनों में सज संवर कर मीडिया के सामने आती थीं. ख़ुद केक काटती थीं और हैप्पी बर्थ डे टू यू के गाने बजते थे. करोड़ों रूपये गिफ़्ट में लोग दे जाया करते थे. लेकिन जब बीएसपी एमएलए शेखर तिवारी ने इंजीनियर मनोज गुप्ता की हत्या कर दी, फिर ये सब तमाशा बंद हो गया.


राजनैतिक जीवन के सबसे मुश्किल दौर में हैं मायावती


मायावती अपने राजनैतिक जीवन के सबसे मुश्किल दौर में हैं. छह सालों से वे यूपी में सत्ता से बाहर हैं. पिछले लोकसभा चुनाव में पार्टी अपना खाता तक नहीं खोल पाई . बीते साल हुए विधानसभा चुनाव में बीएसपी बस 19 सीटों पर सिमट गई. पार्टी के पास इतने भी एमएलए नहीं हैं कि वे अपने बहिनजी को राज्य सभा भेज सकें. नसीमुददीन सिद्दकी, स्वामी प्रसाद मौर्य, इन्द्रजीत सरोज और ब्रजेश पाठक जैसे कई बड़े नेता पार्टी छोड़ चुके हैं. परिवार को हमेशा राजनीति से दूर रखने का दम भरने वाली मायावती को अपने भाई को लाना पड़ा. आनंद कुमार अब बीएसपी में नंबर दो हैं और उपाध्यक्ष भी. उनका बेटा भी अपनी बुआ की पार्टी के यूथ विंग का काम देख रहा है.


राज्यसभा से इस्तीफ़ा देने का नहीं हुआ कोई फ़ायदा


मायावती का हर दाँव उलटा पड़ रहा है. राज्यसभा से इस्तीफ़ा देने का कोई फ़ायदा नहीं हुआ. दलित और मुस्लिम का उनका फ़ार्मूला भी काम नहीं आया. यूपी के लोगों ने तो बीएसपी को ख़त्म मान लिया था. लेकिन हाल में हुए निकाय चुनाव ने बहिन जी की इज़्ज़त बचा ली. मेरठ और अलीगढ़ में उनकी पार्टी के नेता मेयर का चुनाव जीत गए. सहारनपुर और आगरा में भी मुक़ाबला काँटे का रहा. मायावती की चुनौती दूसरे समाज के लोगों को जोड़ने की नहीं है. असली चिंता तो दलितों को साथ बनाए रखने की है. ऊपर से दलित समाज में जिगनेश मेवाणी और चंद्रशेखर जैसे नए नेता उभरने लगे हैं. मायावती के लिए ख़तरा अंदर भी है और बाहर भी.

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Web Title: BSP supporters will celebrate party chief Mayawati’s birthday tomorrow
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