‘‘क्या यही थे अच्छे दिन ’’

By: | Last Updated: Saturday, 28 February 2015 4:42 PM
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कानपुर: कभी मैनचेस्टर आफ ईस्ट कहे जाने वाले औद्योगिक शहर कानपुर के उद्यमियों और व्यापारियों ने आज पेश हुये आम बजट पर गहरी निराशा जाहिर करते हुए सवाल किया कि ‘‘क्या यही थे अच्छे दिन ?’’

 

कानपुर के पूर्व सांसद और केन्द्रीय मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने कहा कि इस बजट से आम आदमियों और वेतन भोगी कर्मचारियों को कोई लाभ नहीं होगा बल्कि इससे बड़े उद्योगपतियों और कॉरपोरेट घरानों को खुश करने की कोशिश की गयी है. उन्होंने कहा कि बजट में सर्विस टैक्स बढ़ाने से आम आदमी को रोजमर्रा की जरूरतों के लिये अपनी जेब अधिक ढीली करनी पड़ेगी.

 

उन्होंने मोदी सरकार के चुनावी स्लोगन ‘अच्छे दिन आने वाले हैं’ का जिक्र करते हुए कहा कि जनता के तो नहीं, लेकिन कॉरपोरेट सेक्टर के अच्छे दिन जरूर आ गये हैं.

 

इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के प्रदेश उपाध्यक्ष सुनील वैश्य ने बजट को निराशाजनक बताते हुए कहा कि इसमें लघु उद्योगों के बेहतर भविष्य के लिए कुछ भी नहीं है.

 

उन्होंने कहा कि सर्विस टैक्स बढ़ने से सबसे ज्यादा नुकसान कानपुर के पान मसाला क्षेत्र को होगा जो कानपुर के उद्योग की रीढ़ है. सर्विस टैक्स बढ़ने से आम आदमी और छोटे व्यापारियों की कमर भी टूट जायेगी.

 

चमड़ा उद्योग के प्रमुख व्यापारी इमरान सिद्दिकी ने कहा कि इस बजट से चमड़ा उद्योग को कोई फायदा नही होगा बल्कि जूता बनाने वाले व्यवसायी को फायदा होगा.

 

उन्होंने कहा कि सरकार अगर करोड़ों रूपये का राजस्व देने वाले चमड़ा उद्योग को फायदा देना चाहती है तो उसे पहले मूलभूत सुविधायें देना चाहिए और पर्यावरण विभाग की दुश्वारियों से राहत देनी चाहिए.

 

शहर के पान मसाला उद्योग के प्रमुख व्यापारी राकेश अग्रवाल ने कहा कि वह अपने कारोबार को बंद करने पर मजबूर हो जायेंगे.

 

आटोमोबाइल उद्योग से जुड़े जेएस अरोड़ा प्रिंस ने शिकायती लहजे में कहा ‘‘पहले जब ग्राहक हमारे सर्विस सेंटर पर गाड़ी की सर्विस कराने आता था तो उसे सर्विस चार्जेस के अलावा करीब साढ़े 12 प्रतिशत टैक्स देना पड़ता था लेकिन अब इस सर्विस टैक्स में करीब दो प्रतिशत का बढ़ावा कर दिया गया है.

 

ऐसे में हमारे सर्विस सेंटरों पर कोई ग्राहक क्यों आएगा ? अब ग्राहक सड़क किनारे बैठे आटो मैकेनिक से अपनी गाड़ी की सर्विस कराएगा और उसे सर्विस टैक्स भी नहीं देना पड़ेगा. ’’ बजट में टैक्स स्लैब में छूट न देने से नौकरीपेशा लोग भी नाखुश हैं.

 

स्कूल में शिक्षिका विनीता द्विवेदी कहती हैं ‘‘टैक्स स्लैब वही है लेकिन सर्विस टैक्स बढ़ने से हर चीज मंहगी होगी और घर का खर्च चलाना मुश्किल होगा. ’’ मोबाइल फोन के प्रमुख व्यापारी सुशील वाधवानी बाटू ने शिकायत की कि इस बजट से मंहगाई बढ़ेगी और इसका खामियाजा छोटे व्यापारियों पर पड़ेगा.

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