जासूसी कांड में 5 बड़ी कंपनियों के अधिकारी गिरफ्तार, अबतक 12 गिरफ्तारियां

By: | Last Updated: Saturday, 21 February 2015 12:30 PM

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने 5 और बड़ी कंपनियों के अधिकारियों की गिरफ्तारी की है. अब तक कुल 12 गिरफ्तारियां हो गई हैं. रिलायंस के शैलेश सक्सेना, केयर्न इंडिया के के नायर , एस्सार के विनय कुमार. एडीएजी के डीजीएम ऋषी आनंद की गिरफ्तारियां हुई हैं. जुबीलैंट एनर्जी के सुभाष चंद्रा भी गिरफ्तार किए गए हैं.

 

पेट्रोलियम मंत्रालय में जासूसी के मामले के इस केस में रिलायंस के एक कर्मचारी को भी हिरासत में लिया गया है . पुलिस उससे पूछताछ कर रही है. इस बीच सबसे बड़ी खबर ये सामने आयी है कि जासूसी के तार, सिर्फ पेट्रोलियम मंत्रालय तक ही नहीं, बल्कि बिजली मंत्रालय तक फैले हुए हैं. बजट भाषण की जानकारी भी लीक हुई है.

 

जासूसी कांड के घेरे में मुकेश अंबानी की कंपनी, अब तक सात गिरफ्तार 

आज दिल्ली पुलिस ने शांतनु सैकिया नामके जिस शख्स को गिरफ्तार किया है वह इंडियन पेट्रो डॉट कॉम नाम की वेबसाइट चलाता है, कहा जा रहा है कि पहले वो पत्रकार भी रह चुका है. दूसरा गिरफ्तार शख्स है प्रयास जैन जो ऑस्ट्रेलिया की एनर्जी कंपनी मेडिट का प्रमुख है. इन दोनों को मिलाकर अबतक सात गिरफ्तारियां हो चुकी हैं . गिरफ्तार होने वालों में पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के चपरासी की भी गिरफ्तारी हो चुकी है.

 

जासूसी: कौन हैं शांतनु सैकिया और प्रसाद जैन? 

पेट्रोलियम मंत्रालय में जासूसी के इस मामले से परे देश में हड़कंप मच गया है, और अभी इस मामले में कुछ और गिऱफ्तारियां हो सकती हैं .  पेट्रोलियम मंत्रालय में जासूसी के चार आरोपियों को पुलिस ने रिमांड पर लिया है जबकि तीन को ज्युडिशियल कस्टडी में जेल भेज दिया गया है. जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किए गए सातों आरोपियों को आज कोर्ट में पेश किया गया.

 

पेट्रोलियम मंत्रालय में जासूसी के आरोप में गिरफ्तार आसाराम वही शख्स है जो पेट्रोलियम मंत्री के दरवाजे के बाहर पिछले पंद्रह सालों से बैठा करता था. आसाराम का कहना है कि मेरा लेनादेना नहीं. बेटा आता था. मुझे 17 को पता चला.

 

आसाराम के दो बेटे ललता प्रसाद और राकेश कुमार इस पूरे रैकेट के अहम किरदार हैं. दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने आसाराम और इनके दो बेटों के साथ दफ्तर में काम करने वाले कर्मचारी ईश्वर सिंह को गिरफ्तार किया. पुलिस ने इनसे पूछताछ के आधार पर पूर्व पत्रकार शांतनु सैकिया और ऑस्ट्रेलिया की एनर्जी कंपनी मेडिट के प्रमुख प्रयास जैन को गिरफ्तार किया है.

 

कैसे होती थी जासूसी ?

 

पुलिस के मुताबिक मंत्रालय में जासूसी के इस काम में मल्टी टास्किंग कर्मचारी आसाराम और ईश्वर सिंह शामिल थे. ये दोनों ललता प्रसाद और राकेश कुमार को दस्तावेज चुराने में मदद करते थे. दोनों भाई मंत्रालय में अस्थाई कर्मचारी के तौर पर काम कर चुके हैं. मल्टी टास्किंग कर्मचारी वो होते हैं जो दफ्तर में पानी पिलाने से लेकर फोटोकॉपी कराने, फाइल पहुंचाने और दरवाजे पर बैठने का काम करते हैं. इन एमटीएस कर्मचारियों की अहम दस्तावेजों तक पहुंच थी.

 

आशाराम और ईश्वर सिंह लंबे अरसे से शास्त्री भवन में काम कर रहे थे आशाराम के रिटायरमेंट में एक साल और ईश्वर सिंह के रिटायरमेंट में चार साल बाकी थे इन्हे पता था कि सीसीटीवी कैमरे कहां से आन आफ होते है उस कमरे की डूप्लीकेट चाबी बनवा कर सीसीटीवी आफ कर देते थे.

 

ईश्वर के बेटों ललता और राकेश ने इसी के जरिये जासूसी शुरू की गई. तीसरा शख्स राजकुमार चौबे है जो ड्राइवर था. ये सभी जानकारी निकालकर कंपनियों, थिंक टैंक और लॉबिस्टों तक पहुंचाते थे.

 

अभी तक की जांच से पता चला है कि पेट्रोलियम मंत्रालय के दस्तावेज निकलने के बाद प्रयास जैन और शांतुन सेकिया तक पहुचते थे जैसे दस्तावेज वैसे पैसे की तर्ज पर इन्हे पचास हजार से एक लाख रुपये दिए जाते थे ये आगे कितना पैसा लेते थे इसकी जांच जारी है.

 

कैसे पकड़ी गई जासूसी ?

 

सरकार को इस बात की भनक लग चुकी थी कि मंत्रालय के गलियारों में दलाल घूम रहे हैं लिहाजा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने कैबिनेट सचिव को चिट्ठी लिखकर सचेत भी किया था. और पेट्रोलियम मंत्रालय में हो रही धांधली की तरफ आईबी की भी नजर थी और दिल्ली पुलिस को पहली जानकारी वहीं से मिली थी. बुधवार की रात पुलिस ने जाल बिछाकर जासूसों को तब गिरफ्तार किया जब वे इंडिगो कार से शास्त्री भवन परिसर में दाखिल हुए थे. दो जासूस दफ्तर में गया था. तीसरा कार में ही बैठा रहा. दो घंटे बाद उनके दफ्तर से निकलने पर पुलिस ने गिरफ्तार किया. मंत्रालय में घुसने के लिए जासूसों के गैंग ने फर्जी दस्तावेज बनवा रखे थे. उनकी कार पर फर्जी सरकारी स्टिकर भी लगा था. शक है कि जासूसी का ये खेल कम से कम 15 साल से चल रहा था. पुलिस ने गिरफ्तार लोगों से दफ्तर की डुप्लीकेट चाबियां मिली हैं. इनका इस्तेमाल दफ्तर में घुसने के लिए होता था. फर्जी पहचान पत्र और पास भी मिले हैं. इंडिगो पर भारत सरकार का कार स्टिकर लगा था. वह भी फर्जी था.

 

जासूसी से किसे फायदा ?

 

जासूसी से उन कंपनियों को फायदा हो सकता है जो मंत्रालय से सीधे तौर पर जुड़े हैं. ऐसी कंपनियों को फायदा हो सकता है जिनकी सरकार से मुकदमेबाजी चल रही है वो जानना चाहेंगे कि कोर्ट में सरकार क्या पक्ष रखने वाली है. सरकार की भविष्य में क्या नीतियां रहेंगी ये पता चलना उन कंपनियों के लिए फायदेमंद हो सकता है जो एनर्जी सेक्टर से जुड़ी हैं. और इसीलिए पेट्रोलियम मंत्रालय के कर्मचारियों के जरिये सरकार का पक्ष जानने के लिए कागजात लीक करवाए गए हैं.

 

गुरवार को पीटीआई के हवाले से खबर आई थी कि रिलायंस के एक कर्मचारी को हिरासत में लिया गया. रिलायंस के अधिकारी की सफाई आई थी कि आरआईएल जांच में हरसंभव मदद करेगी. पुलिस ने उस रिलायंस के कर्मचारी को गिरफ्तार नहीं किया.

 

कोर्ट में आरोपियों की पेशी के दौरान खुलासा हुआ कि जासूसी के तार पेट्रोलियम मंत्रालय से आगे बढकर कोयला और मंत्रालय तक भी हो सकते हैं. पुलिस को पूछताछ के दौरान पता चला है कि पैट्रोलियम मंत्रालय के चार लोगों का ये गैंग पिछले दो सालों से जैन औऱ सैकिया के संपर्क में था क्राइम ब्रांच अब इन लोगों के बैक खातों की डिटेल छान रही है कि उनमें कितना पैसा आय़ा.

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