Rail Budget 2015: 12 बजे पेश होगा रेल बजट, सूत्रों के मुताबिक किराया न बढ़ेगा न घटेगा

By: | Last Updated: Thursday, 26 February 2015 12:52 AM

नई दिल्ली: अब से कुछ घंटे बाद रेल मंत्री सुरेश प्रभु संसद में अपना पहला रेल बजट पेश करेंगे. रेल बजट में आपके लिए क्या हो सकता, किराया बढ़ेगा या नहीं, बुलेट ट्रेन कब चलेगी, सुरक्षा और सुविधाओं का क्या होगा. 

 

नौ महीने सरकार चलाने के बाद रेलवे में क्या बदलाव देखने को मिलेगा यह तो आज रेल बजट पेश होने के बाद ही पता चलेगा.

 

आज रेल बजट में रेल का किराया बढ़ेगा या घटेगा? नई रेलों की घोषणा होगी? क्या मॉर्डन इंडिया रेलवे में भी दिखेगा? सुरक्षा के लिए रेलवे क्या करने वाला है? क्या रेलवे में मोदी का स्वच्छ भारत मिशन दिखेगा? और घाटे में चल रही रेलवे को फायदे का फॉर्मूला क्या है? इन सवालों का जवाब जानने की इच्छा आपके मन में कहीं ना कहीं चरम पर होगी.

 

आपकी इसी उत्सुकता के लिए रेल बजट से ठीक पहले हम आपको बताने जा रहा है बजट की कुछ खास बातें जो आपके काम की बातें हैं और इस रेल बजट में जानना चाहते हैं.

 

दोपहर 12 पेश होगा रेल बजट. रेल मंत्री का भषण आप एबीपी न्यूज़ पर हिंदी में भी सुन सकते हैं.

 

रेल किराए का क्या होगा?

 

इस सवाल के जवाब को भले ही रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा ने टाल दिया हो लेकिन बजट में इस बात की संभावना कम है कि इस बार यात्रियों की जेब पर कोई बोझ बढ़ेगा. यानी रेल किराये में बढ़ोतरी नहीं होगी. लेकिन इस बार में बजट में खबर ये नहीं है कि रेल किराया बढ़ेगा बल्कि लोग इस तरफ देख रहे हैं कि क्या रेल किराया घटेगा. डीज़ल के दाम में 14 रुपये की कमी आई है लेकिन पेंच ये है कि बिजली 4% महंगी हुई है. डीजल के घटते दाम से इस साल करीब पंद्रह हजार करोड़ रुपये की बचत हो सकती है.

 

आपको बता दें कि अभी रेलवे के 676 प्रोजेक्ट चल रहे हैं जिनमें सिर्फ 317 ही पूरे हो पाए. यानी 359 अधूरे  हैं. इन अधूरे प्रोजेक्ट के लिए 1 लाख 82 हज़ार करोड़ रुपये की ज़रूरत है.

 

ऐसे में रेल किराया कम नहीं करके सरकार पैसे जुटाने की कोशिश करेगी. सुरेश प्रभु 1 लाख 82 हजार करोड रुपये की कमाई का रोडमैप भी रखने वाले हैं.

 

वैसे भी साल के आखिर में बिहार से पहले कोई चुनाव है नहीं. इसलिए हो सकता है रेल मंत्री लोक लुभावन के लालच नें न आएं और यात्री किराया कम न करें. किराए तो नहीं बढ़ेंगे, लेकिन स्वच्छता का Cess अलग से लगाया जा सकता है यानी स्वच्छ रेल के लिए पैसा आपकी जेब से लगेगा.

 

मालभाड़े का क्या होगा?

 

पिछले कई सालों से रेलवे ने यात्री किराया नहीं बढ़ाया है. इस वजह से टिकट के पैसे से रेलवे को आधा खर्च ही मिल पाता है और यात्री किराये का घाटा 24 हजार करोड़ तक पहुंच गया है. रेलवे इस घाटे की भरपाई फिलहाल माल ढुलाई की आमदनी से कर रही है.

 

इसका मतलब आपकी टिकट अगर रेलवे को 1,000 की पड़ती है तो रेलवे आपसे 500 लेती है और 500 माल ढुलाई की कमाई से पूरा करती है. इस संतुलन के रेल बजट में कुछ हद तक ठीक होने का अनुमान जताया जा रहा है.

 

वैसे, अगर अनुमानित जीडीपी दर 7.4% मानें तो इस साल माल ढुलाई ज़्यादा होनी चाहिए. जिससे रेलवे की आमदनी बढ़ेगी. इसके अलावा  डीज़ल का ख़र्च कम होने से यात्री किराये का घाटा भी कम होगा. और माल ढुलाई बढ़ने से आमदनी बढेगी तो घाटा और कम होगा.

 

वैसे भी डीजल सस्ता होने से रेल मंत्रालय को 12 से 15 हजार करोड़ रुपए की बचत होगी. इन सारे समीकरणों पर गौर करें तो माल किराया अगर नहीं घटता है तो कम से कम बढ़ेगा भी नहीं.

 

नई ट्रेनों का ऐलान?

 

इस बार नई ट्रेनों की संख्या सौ से ज्यादा नहीं होगी. यानी हर बार से कम. पिछली बार एक सौ साठ नई ट्रेनों की घोषणा हुई थी.

 

बिहार पर मेहरबानी

 

बिहार में इस साल चुनाव होने हैं इसलिए बिहार पर मेहरबानी दिखाने की उम्मीद है. जन साधारण एक्सप्रेस की तरह बिना रिजवर्शेन वाली ट्रेनों की घोषणा हो सकती है. भारत की  गौरवशाली परंपरा को दिखाने के लिए भारत गौरव नाम से नई ट्रेन का एलान हो सकता है.

 

विमान जैसे टॉयलेट

 

राजधानी या शताब्दी की नई सेवाएं तो शुरू होने की उम्मीद नहीं है लेकिन  20 नई राजधानी,शताब्दी ट्रेनें मतलब नई इंजन ट्रेनों का एलान हो सकता है. हवाई जहाज जैसे वैक्यूम टॉयलेट (vacuum toilet) अब ट्रेनों में भी होंगे यानी पानी की तो बचत होगी ही साथ ही साफ-सफाई भी फ्लाइट जैसी हो जाएगी.

 

अभी ट्रेनों में टॉयलेट की जो हालत होती है तो किसी से पूछने की जरूरत नहीं है. लिहाजा सरकार ने साफ सफाई और बेहतर सुविधा पर जोर दने का फैसला किया है.

 

स्वच्छ भारत अभियान के तहत 100 और ट्रेनों में हाउसकीपिंग सर्विस शुरू की जाएगी. स्वच्छ स्टेशन स्कीम में 6 और स्टेशन शामिल किये जाएंगे. 2016 के बाद सिर्फ LHB कोच बनेंगे जिसमें बायोटॉयलेट होगा.

 

हाई-फाई रेलवे

 

हाईफाई रेलवे की झलक भी रेल बजट में दिखने वाली है. यात्रियों की सुविधा के लिए स्मार्टफोन एप्प बनाए जाएंगे. महिला यात्रियों के लिए खास स्मार्टफोन एप्प रहेगा.

 

कई स्टेशनों औऱ ट्रेनों में वाई-फाई सुविधा दी जाएगी. नेत्रहीन यात्रियों के लिए नए डिब्बों में ब्रेल में भी साइन लगे रहेंगे. डीजल गाड़ियों में नॉयज़ रिडक्शन सिस्टम लगेगा जिससे शोर अंदर कम आएगा, विदेशों की तरह. प्रीमियम गाड़ियों के इंटीरियर NID यानी नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन के डिजाइनर बनाएंगे. यात्रियों के लिए पोर्टल और एप्प जिसमें कोई भी कंप्लेंट ऑनलाइन दर्ज करा सकेगा.

 

यानी सरकार की कोशिश यात्रियों को हर वो सुविधा देने की है जिसके आज की तारीख में वो हकदार हैं. बिना गार्ड वाले फाटक पर हादसे रोकने के लिए ट्रेनों में स्क्रीन डिस्प्ले लगाए जाने का एलान हो सकता है जिससे ड्राइवर को मालूम चल जाएगा कि आगे बिना गार्ड वाला रेलवे फाटक है.

 

बिना गार्ड के फाटक वाले रेलवे क्रॉसिंग पर ज्यादा हादसे न हो इसके लिए बजट में locopilots के सामने इंजन में विमान की तर्ज़ पर स्क्रीन डिस्प्ले लगाने की बात हो सकती है. ताकि ड्राइवर को पहले से पता हो कि आगे बिना गार्ड वाला फाटक है.

 

उम्मीद की जा रही है कि बजट में मोदी सरकार का सुरक्षा पर जोर रहेगा और बिना गार्ड की रेलवे क्रॉसिंग के लिए खास तौर पर मुख्य बजट से रेलवे 20 हजार करोड़ रुपये अलग से मांग सकती है.

 

2010 की रिपोर्ट के मुताबिक देश में 15993 बिना गार्ड वाले रेलवे फाटक थे. 2012 की सरकारी रिपोर्ट बताती है कि 15 हजार से ज्यादा लोगों की जान हर साल इस तरह की जगहों पर लापरवाही की वजह से जाती है.

 

बजट में तकनीक पर जोर रहने की उम्मीद है. और ट्रेनों में रेडियो फ्रीक्वेंसी टैग लगाने का एलान हो सकता है ताकि ट्रेनों के डिब्बों के बारे में सही और सटीक जानकारी हर वक्त मिलती रहे.

 

पिछले साल अगस्त महीने में बिहार में एक ट्रेन अजीबोगरीब तरीके से गायब हो गई थी. गोरखपुर- मुजफ्फरपुर पैसेंजर ट्रेन सोलह दिन तक रेलवे के रडार से गायब रही . ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि डिब्बों को ट्रैक करने के लिए हमारे पास ठोस तकनीक नहीं है. उम्मीद की जा रही है कि इस बजट में इस पर  और जोर रहेगा.

 

डिब्बों को ट्रैक करने के लिए उनपर रेडियो फ्रीक्वेंसी वाले टैग लगेंगे. कौन से डिब्बा कौन से स्टेशन पर या यार्ड में है और कौन सी ट्रेन से जोड़ा जा सकता है. या फिर इस सामान ले जा रहा डिब्बा अभी कहां पहुंचा है, ये सब आसानी से पकड़ में आ जाएगा.

 

रेडियो फ्रीक्वेंसी टैग नहीं होने की वजह से अभी होता ये है कि हिसाब किताब लगाने में रेलवे को ज्यादा लोग और समय लगता है. इसके लगने से ये सब आसानी से कंप्यूटर पर मिल जाएगा और बहुत समय और साधन बचेंगे.

 

मुंबई में लोकल ट्रेनों पर या फिर दिल्ली में चलने वाली मेट्रो पर जिस तरीके के विज्ञापन आपको देखने को मिलते थे अब वैसे विज्ञापन आपको बाकी ट्रेनों पर भी देखने को मिल सकते हैं.

 

पूर्व बैंकिंग सचिव डी के मित्तल की कमेटी ने ट्रेनों को स्पॉन्सर करने की सिफारिश की है. मतलब ये कि आने वाले दिनों में ट्रेनों के नाम कोका-कोला, पेप्सी, हल्दीराम के नाम पर कर दिये जाए.

 

मतलब जैसे अभी ट्रेनों के नाम गंगा एक्सप्रेस, नर्मदा एक्सप्रेस, वैशाली एक्सप्रेस, पूर्वा एक्सप्रेस हैं ना वैसे ही अब स्पॉन्सर करने वाली कंपनियों के नाम पर होंगी. 

 

अगर ऐसा हुआ तो पूरी ट्रेनें उस कंपनी के विज्ञापन के रंग में रंगी हुई भी हो सकती हैं. बोगी के बाहर या फिर ट्रेन के अंदर, टिकटों पर भी विज्ञापन हो सकते हैं. यानी कंपनियों का प्रचार होगा और रेलवे की आमदनी बढ़ेगी.

 

ट्रेनों और स्टेशन की ब्रैंडिंग से 2000 करोड़ रुपये की कमाई का लक्ष्य है. इस वक्त 50 हजार यात्री डिब्बे हैं. ढाई लाख मालगाड़ियों के डिब्बे हैं. 10 हजार इंजन हैं और 7 हजार स्टेशन हैं. यानी स्पॉनसरशिप की अपार संभावनाएं हैं. 100 चुनिंदा स्टेशनों पर शॉपिंग कॉम्प्लेक्स की जगह निकालकर उससे रेलवे की अतिरिक्त कमाई की घोषणा बजट में हो सकती है.

 

रेलवे के पास कुल 3.9 लाख हेक्टेयर ज़मीन है जिसमें 43 हजार हेक्टेयर इस्तेमाल नहीं हो रही. इस ज़मीन पर कॉम्प्लेक्स वगैरह बनाकर कमाई की जा सकती है.

 

तकरीबन 8000 स्टेशनों को व्यवस्थित करने के लिए वेबसाइट पर डाल कर ओपन बिडिंग के ज़रिये developers को आकर्षित करने के कोशिश की जा सकती है.

 

तत्काल और प्रीमियम ट्रेनों में जो डायनैमिक प्राइसिंग होती है यानी देर से लेने पर टिकट मंहगा और जल्दी लेने पर सस्ता. वो सिस्टम कई और ट्रेनों में भी लागू किया जा सकता है. इससे आमदनी तो होगी ही यात्रियों को भी सीट मिलने में सहलूयित होगी.

 

 

मेक इंडिया का रहेगा असर

पीएम मोदी अपने भाषणों में जिस मेक इन इंडिया की बात करते हैं उसका नमूना रेल बजट में दिखने की उम्मीद है .   200 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलने वाली Hi- speed ट्रेनों के डिब्बे चेन्नई में Make in India के तहत बनाने की घोषणा होगी.

 

कई इंजन के पुर्जे जैसे क्रैंक शाफ्ट, ऑल्टरनेटर और पहिए इंपोर्ट करने के बजाय ‘मेक इन इंडिया’ के तहत बनाने की घोषणा बजट में हो सकती है. रेलवे जो कल पुर्जे बाहर से इम्पोर्ट करती है उसमें जॉइंट वेंचर के जरिय देश पर निर्भरता बढ़ने की बात इस बजट में की जायेगी . एक अनुमान के मुताबिक 4000 करोड़ हम सालाना बाहर से सामान लेने में खर्च करते है .

 

 

पूवांचल में चलेंगी इंटरसिटी ट्रेनें

पूर्वोत्त राज्यों में भी इंटरसिटी यानी DEMU ट्रेनें चलेंगी. अभी तक ये सिर्फ बड़े शहरों तक ऑफिस वालों या कारोबारियों को पहुंचाने के लिए चलती हैं. जैसे मेरठ-दिल्ली, दिल्ली-रोहतक वगैरह.  इस तरह की ट्रेनें पूर्वोत्तर राज्यों में चलाने की घोषणा होगी.

 

एबीपी न्यूज स्पेशल: रेलवे की सेहत कैसी है? 

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