कल का बजट आज: क्या हो सकती हैं घोषणाएं?

By: | Last Updated: Wednesday, 9 July 2014 4:18 PM

नई दिल्ली : वित्त मंत्री अरूण जेटली आज आम बजट पेश करने वाले हैं. चलिए हम आपको बताते हैं कि क्या है उम्मीदें और आज बजट में क्या हो सकती हैं घोषणाएं?

 

टैक्स में छूट मिलेगी?

 

सबसे बड़ी उम्मीद जो हर बजट से आम आदमी लगाता है वो ये कि उसका इनकम टैक्स माफ हो जाए. अभी साल में 2 लाख रुपये तक की कमाई पर टैक्स नहीं लगता. चर्चा तो बहुत है कि अच्छे दिन की शुरुआत इसी बड़ी घोषणा से करेगी सरकार कि ये लिमिट बढ़ाकर 3 लाख कर दी जाए. यानी 3 लाख  सालाना कमाई पर कोई टैक्स नहीं लगेगा. 2 से 5 लाख सालाना पर अभी 10 फीसद टैक्स लगता है. अगर टैक्स 3 लाख रुपये के बाद लगाना शुरू होगा तो 2 से 3 लाख के बीच के एक लाख रुपये पर जो 10 फीसद यानी 10 हजार रुपये टैक्स आप देते है वो बच जाएगा. यानी सभी करदाताओं को 10 हजार रुपये सालाना की बचत हो जाएगी. 

 

ये उम्मीद इसलिए भी है कि पिछली सरकार के डायरेक्ट टैक्स कोड के लिए संसद की स्थाई समिति ने जो सिफारिश दी थी वो भी 3 लाख कर देने की थी और उस समिति के अध्यक्ष बीजेपी के यशवंत सिन्हा थे. और खुद अरुण जेटली तो विपक्ष में रहते हुए कहते थे कि 5 लाख रुपये तक इनकम टैक्स नहीं लगना चाहिए. इसलिए ये माना जा रहा था कि मोदी सरकार में ये लिमिट 3 लाख तकतो  हो ही जाएगी. इससे जनता के हाथ में पैसा आएगा जो खर्च होगा तो उद्योग की बिक्री बढ़ेगी और अर्थव्यवस्था पटरी पर लौटेगी. लेकिन इसमें दिक्कत ये है कि इससे लगभग 30 हजार करोड़ का नुकसान हो सकता है सरकार को. या तो अरुण जेटली उम्मीद जताएं कि जीडीपी विकास दर फर्राटा भरती हुए फिर 9-10 फीसद हो जाएगी जिससे सबकी कमाई ज्यादा होगी तो कंपनियां और लोग टैक्स ज्यादा देंगे और 30 हजार करोड़ के नुकसान की भरपाई हो जाएगी. लेकिन वो तो होता नहीं दिख रहा. इकोनॉमिक सर्वे में इस साल विकास दर 5.4 फीसद से 5.9 फीसद रहने का अनुमान है. ऊपर से सूखे का खतरा बना हुआ है. यानी अगर इनकम टैक्स लगाने की सीमा तीन लाख रुपये कर के 30 हजार करोड़ का नुकसान होगा तो  उसकी भरपाई करने के लिए जेटली के पास तीन रास्ते हैं .

 

एक, या तो सब्सिडी कम करनी होगी, यानी डीजल, एलपीजी, केरोसीन, खाद के दाम बढ़ाने होंगे जो अगर कर दिया तो लोग पूछेंगे अच्छे दिन का क्या हुआ?

 

दो, या तो कंपनियों का टैक्स बढ़ाना होगा, उसमें दिक्कत ये कि कंपनियों को नुकसान हो गया तो अर्थव्यवस्था की गाड़ी रफ्तार कैसे पकड़ेगी

 

या फिर तीसरा रास्ता है कि एक्साइज ड्यूटी, इंपोर्ट ड्यूटी वगैरह बढ़ा दी जाए. लेकिन उससे तो सामान महंगा हो जाएगा औऱ महंगाई बढ़ गई तो सबको नुकसान.

 

इसलिए इस सबसे बड़ी घोषणा पर ग्रहण के बादल मंडरा रहे हैं. यानी हो सकता अबकी बार मोदी सरकार कहे करो थोड़ा इंतजार.

 

निवेश में टैक्स छूट की सीमा बढ़ेगी?

 

टैक्स में जो बड़ी राहत अरुण जेटली के बजट में मिल सकती है वो मिल सकती है उनको जो बचत करें. यानी तभी जब पैसा सेक्शन 80C के तहत निवेश करें. अभी इस के तहत बीमा, पीएफ वगैरह में एक लाख तक निवेश पर इनकम टैक्स नहीं लगता. यानी अगर एक लाख रुपये तक इंश्योरेंस प्रीमियम, पीएफ वगैरह निवेश कर दें तो उस पैसे पर टैक्स नहीं लगता जो निवेश कर दिया. इसमें उनको ज्यादा फायदा होता है जो ज्यादा कमाते हैं. क्योंकि 2 लाख से 5 लाख सालाना कमाने वालों का टैक्स बनता है 10 फीसदी. वो अगर पूरा एक लाख किसी तरह निवेश भी कर दें तब भी एक लाख पर 10 फीसद ही बचता है, यानी 10 हजार.  औऱ 5 लाख रुपये से 10 लाख रुपये सालाना कमाने वाले जो 20 फीसद के इनकम टैक्स स्लैब में आते हैं वो 1 लाख रुपये निवेश करते हैं तो उनके 20 हजार रुपये बच जाते हैं. इसी तरह साल में 10 लाख से ज्यादा कमाने वाले अगर 80C के तहत एक लाख रुपये इंश्योरेंस, पीएफ वगैरह में निवेश करते हैं तो उनके टैक्स के 30 हजार रुपये बच जाते हैं क्योंकि उनका टैक्स 30 फीसद पड़ता है.

 

इस एक लाख की लिमिट को जेटली बढ़ा कर डेढ लाख या दो  लाख तक कर सकते हैं. यानी अभी से दुगनी हो सकती है लिमिट. यानी अभी जिनका 10 हजार टैक्स बचता है उनका 20 हजार बच सकेगा, जो 20 बचाते हैं वो 40 बचाएंगे, और जो 30 हजार बचा सकते हैं वो 60 हजार तक टैक्स बचा सकेंगे. लेकिन फिर इनवेस्टमेंट भी तो एक लाख का डबल करना होगा, दो लाख. जो तीन-चार लाख साल में कमाता हो उसके लिए तो इसका खास मतलब नहीं क्योंकि 3-4 लाख में से 2 लाख निवेश कर देगा तो खाएगा क्या?

 

लेकिन टैक्स में राहत के नाम पर ये अरुण जेटली के बजट की बड़ी घोषणा हो सकती है. भले ही 30 हजार रुपये की एक्स्ट्रा टैक्स बचत साल में 10 लाख से ज्यादा कमाने वालों को ही मिलेगी लेकिन संदेश तो यही जाएगा कि 30 हजार रुपये की टैक्स बचत दे दी सरकार ने. सरकार को ये फायदा होगा कि टैक्स में ये वाली बचत करने के लिए लोगों एलआईसी, पीपीएफ, 5 साल वाली बैंक की एफडी वगैरह में पैसा डालेंगे जो असल में सरकार के ही तो काम आएगा. ये भी हो सकता है कि लिमिट बढ़ाने के साथ-साथ ये भी तय कर दिया जाए कि एक्स्ट्रा टैक्स छूट तभी मिलेगी जब निवेश इंफ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड में हो. क्योंकि इंफ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड का पैसा तो सड़क, पुल, बंदरगाह  वगैरा बनाने के ही काम आता है तो जेटलीजी को वहां पैसा जुटाने में आसानी हो जाएगी.

 

लेकिन अगर 80C में निवेश करने की लिमिट एक लाख से दो लाख की जाती है तो आपका तो टैक्स बचेगा लेकिन सरकार को करीब 30 हजार करोड़ कम टैक्स मिलने का अनुमान है. 30 हजार करोड़ की भरपाई करना शायादजेटली के लिए आसान न हो इसलिए हो सकता है निवेश की सीमा को डबल न कर के एक से बढ़ा कर डेढ लाख किया जाए. और उसमें तय हो कि 30 हजार या 50 हजार इंफ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड में ही लगाने हों.

 

होम लोन पर टैक्स छूट बढ़ेगी?

 होम लोन पर टैक्स छूट की बड़ी उम्मीद लगाए बैठे हैं लोग मोदी सरकार के पहले बजट से. सबको घर का सपना भी दिखाया था मोदी ने चुनाव में. अभी साल भर में होम लोन का डेढ लाख तक का ब्याज चुकाने पर वो ब्याज का पैसा आपकी कमाई में से घटा दिया जाता है. मतलब उतने पैसे पर लगने वाला टैक्स बच जाता है. ये लिमिट अभी डेढ लाख है. जो कई साल से वही बनी हुई है. अगर ये लिमिट बढ़ा कर दो लाख कर दी जाती है तो एक्स्ट्रा पचास हजार रुपये पर टैक्स बच जाएगा. इसमें भी जो ज्यादा कमाता है उसका ज्यादा टैक्स बचता है. क्योंकि 10 फीसद इनकम टैक्स देने वाले अगर साल में डेढ लाख होम लोन का ब्याज दें तो उनका 10 फीसद ही बचता है, यानी 15 हजार. जो 20 फीसद स्लैब में आते हैं, उनका डेढ लाख पर 30 हजार बच जाता है और 30 फीसद स्लैब वालों का डेढ लाख पर 45 हजार टैक्स बच जाता है. अब अगर ये लिमिट बढ़ा कर दो लाख कर दी जाए तो 10 फीसद वालों की बचत 15 हजार से बढ़कर 20 हजार हो जाएगी, 20 फीसद वालों की 30 हजार से बढ़कर 40 हजार हो जाएगी. और 10 लाख सालाना से ज्यादा कमाने वाले 30 फीसद टैक्स देते हैं उनकी बचत अभ डेढ लाख पर होती है 45 हजार, वो बढ़कर हो जाएगी 60 हजार. यानी उनके हाथ में आएंगे 15 हजार रुपये एक्सट्रा सालभर में. वैसे भी दो लाख रुपये होम लोन का ब्याज देने वालों की कमाई साल में 10 लाख से ज्यादा ही होगी. क्योंकि कम कमाई वाले ऐसा भारी लोन ही क्यों लेंगे.

 

तो ये लिमिट डेढ लाख से बढ़कर दो  लाख हो गई तो साल में 10 लाख से ज्यादा कमाने वालों को 15 हजार रुपये की एक्स्ट्रा बचत हो जाएगी. लेकिन इसके खिलाफ दलील ये है कि क्या साल में सिर्फ 15 हजार रुपये की बचत बढ़ जाएगी तो लोगों के लिए मकान लेना आसान हो जाएगा? या इससे  रीयल एस्टेट सेक्टर में जान आ जाएगी? हां पिछली सरकार ने 25 लाख तक के लोन पर एक लाख रुपये पर अतिरिक्त छूट दी थी सिर्फ एक साल के लिए. उस स्कीम को मोदी  सरकार आगे बढ़ा सकती है. यानी 25 लाख तक वालो होम लोन पर ढाई लाख  तक के ब्याज पर टैक्स नहीं.

 

मकान होगा सस्ता?

सबको घर देने का सपना जो मोदी सरकार ने दिखाया है, इस बजट में उसके लिए काफी कुछ हो सकता है. भले ही आप सिर्फ होम लोन पर औऱ ज़्यादा टैक्स छूट की उम्मीद लगाए बैठे हों, लेकिन वित्त मंत्री आम आदमी के लिए सस्ते मकानों वाले कंस्ट्रक्शन प्रॉजेक्ट के लिए टैक्स छूट दे सकते हैं.

 

रीयल एस्टेट सेक्टर में विदेशी निवेश लाने के लिए बड़े कदमों  की घोषणा कर सकते हैं. कंस्ट्रक्शन में सर्विस टैक्स में बदलाव हो सकता है. रीयल एसटेट  सेक्टर में निवेश बढ़ाने के लिए रीयल एस्टेट इनवेस्टमेंट ट्रेस्ट के ज़रिए छोटे निवेशकों को भी रीयल एस्टेट सेक्टर में निवेश के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है. और इस तरह इन सब कदमों से मकानों की कीमत में कमी आने की उम्मीद की जा सकती है.

 

मंहगाई रोकने के लिए खास फंड?

 

फल सब्जियों की महंगाई से निपटने के लिए मोदी सरकार बजट में प्राइस स्टैबिलाइजेशन फंड का एलान करेगी. इसका सीधा मतलब ये होगा कि केंद्र सरकार अपने बजट में से एक तय रकम अलग रख देगी इस महंगाई से निपटने वाले फंड में. फिर अगर साल में कभी भी खाने-पीने की किसी चीज के दाम बढ़े और कोई राज्य सरकार सामान को खरीदकर लोगों को सस्ता देना चाहे तो इस फंड के पैसे का इस्तेमाल हो सकता है. अगर सरकार सस्ता बेचेगी तो बाजार में दाम भी गिर जाएंगे, और सरकार के पास ये फंड मौजूद होगा जिससे वो महंगा खरीद कर सस्ता बेच सकती है और इस तरह महंगाई को काबू में ला सकती है. ये है वो कॉन्सेप्ट जिसकी घोषणा होगी बजट में.

 

15 हजार के मेडिकल बिल की लिमिट बढ़ेगी?

अभी सैलरी पाने वाले कर्मचारियों को साल में 15 हजार रुपये के मेडिकल बिल देने पर उस 15 हजार रुपये पर टैक्स की बचत हो जाती है. और कनवेयेंस अलॉवेंस के नाम पर दफ्तर आनेजाने के लिए हर महीने 800 रुपये यानी साल भर में 9600 रुपये पर टैक्स नहीं लगता. ये मेडिकल के 15 हजार और कनवेयेंस के 9,600 कई साल से चले आ रहे हैं. महंगाई कहां से कहां पहुंच गई लेकिन ये लिमिट नहीं बदली. इस बार उम्मीद है कि अगर वित्त मंत्री इनकम टैक्स के स्लैब नहीं बदल पाए, या निवेश पर बचत की लिमिट नहीं बढ़ा पाए या होम लोन पर औऱ ज्यादा टैक्स छूट नहीं दे पाए, तो कम-अस-कम ये मेडिकल बिल के 15,000 और ट्रांसपोर्ट पर हर महीने के 800 वाली टैक्स छूट की लिमिट बढ़ा दें और सैलरी वालों का कुछ भला करें.

 

इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड गाड़ियां होंगी सस्ती?

गाड़्यों के दाम में तो खास बदलाव नहीं होने वाला. क्योंकि वित्त मंत्री ने कुछ दिन पहले ही कह दिया था कि एक्साइज की जो छूट गाड़ियों पर दी जा रही है, वो दिसंबर तक जारी रहेगी.

 

लेकिन बजट में इलेक्ट्रिक औऱ हाईब्रिड गाड़ियां जरूर सस्ती की जा सकती है. महिंद्रा रीवा की छोटी इलेक्ट्रिक गाड़ी e2o अभी 6 लाख से भी महंगी है. पेट्रोल डीजल पर निर्भरता कम करने के लिए बिजली से चार्ज होने वाली गाड़ियों को टैक्स में छूट मिलेगी तो ये सस्ती हो सकती है. साथ ही हाइब्रिड गाड़ियां जो पेट्रोल और बैटरी दोनों की पावर से चलती हैं, जैसे टोयोटा की प्रियस, वो भी बजट में सस्ती की जा सकती हैं. साथ ही ट्कों और बसों की बिक्री बढ़ाने के लिए कुछ प्रोत्साहन उनके लिए भी हो सकता है.

 

गांव में ब्रॉडबैंड, मोबाइल बैंकिंग

देश में निजी बैंकों की संख्या बढ़ाने के लिए कई प्रोत्साहन बजट में दिए जा सकते हैं. सरकारी बैंकों के लिए कई कदमों की घोषणा होगी बजट में . खासतौर पर ऐसे लोन पर जो सरकारी बैंकों ने दे रखे हैं और उन्हें अब वसूली की उम्मीद नहीं हैं. यानी बट्टे खाते के कर्जे. ऐसे कर्जों को खातों में चढ़ाने के नये नियम बनाए जा सकते हैं.

 

गांवों में बैंकों की शाखाएं बढ़ाने के लिए भी कई प्रावधान बजट में किये जा सकते हैं. जहां तक ग्राहकों का सवाल है, तो एक ऐसी स्कीम की घोषणा हो सकती है जिस के जरिये आप अपने बेसिक मोबाइल फोन से भी बैंक खाते को ऑपरेट कर सकें. अभी मोबइल बैंकिंग के लिए स्मार्टफोन इस्तेमाल करना पड़ता है. बजट में जिस योजना की घोषणा हो सकती है उससे बेसिक फोन से भी मोबाइल बैंकिंग हो सकेगी. हर गांव तक ब्रॉडबैंड पहुंचाने की स्कीम का भी बजट में एलान किया जाएगा.

 

नौकरियों औऱ मैन्युफैक्चरिंग पर जोर

बजट में ऐसी कई घोषणाएं होंगीं, जिनका मकसद होगा रोजगार बढ़ाना. खासकर कारखानों में. क्योंकि मैन्युफैक्चरिंग पर जोर रहता है खुद पीएम का भी. मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र के लिए खास प्रोत्साहन की घोषणा होना तय है बजट में. खासकर आईटी मैन्युफैक्चरिंग में. नौकरियां बढ़ाने के लिए कई क्षेत्रों में विदेशी निवेश भी लाया जा सकता है. जैसे मनमोहन सरकार ने रीटेल में एफडीआई के लिए भी नौकरियों की दलील दी थी, वैसे ही मोदी सरकार कई और क्षेत्रों में एफडीआई की घोषणा कर सकती है.

 

लेकिन किराना में एफडीआई के विरोध की नीति नहीं बदलेगी. बल्कि छोटे किराना दुकानदारों के लिए भी एक अलग फंड की घोषणा हो सकती है. क्योंकि वो भी की लोगों को रोजगार देते हैं.  नौकरियां बढ़ाने के अलावा वित्त मंत्री की चुनौती है घाटे को कम करने की. औऱ फिस्कल डेफिसिट को कम करने में एक्सपोर्ट को बढ़ाने को बड़ा रोल होगा. और एक्सपोर्ट को बढ़ाकर नौकरियां भी बढ़ाई जा सकती हैं. यानी एक्सपोर्ट को प्रोत्साहन देकर एक पंथ दो काज हो सकते हैं. नौकिरयां भी बढ़ेंगी और फिस्कल डेफिसिट भी कम होगा क्योंकि ज्यादा एक्सपोर्ट का मतलब देश में ज्यादा डॉलर आएंगे. इसलिए एक्सपोर्ट को प्रोत्साहन के लिए खास घोषणा हो सकती है बजट में.

 

मनरेगा में कृषि कार्य भी ?

 

कृषि से जुड़े कार्यों को भी मनरेगा में शामिल कर बड़े बदलाव की घोषणा की जा सकती है बजट में. जिससे गांवों में रोजगार और कृषि, दोनों लक्ष्य एक ही स्कीम से हासिल किए जा सकें. वाजपेयी सरकार ने किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड लेकर आई थी, मोदी सरकार किसानों को किसान टीवी चैनल का तोहफा दे सकती है. और इसके लिए बजट में 100 करोड का आवंटन किया जा सकता है.

 

खेत की मिट्टी की सेहत बताने वाले एक सॉयल हेल्थ कार्ड की घोषणा हो सकती है. इसके दो मकसद हैं. किसान को पता चल सकेगा कि उसके खेत में कौनसी खाद डालनी है और सरकार को मदद मिलेगी क्योंकि सही खाद के इस्तेमाल से खाद जाया नहीं जाएगी और सरकार का खाद पर सब्सिडी का खर्च कम होगा.

 

खाद पर दी जाने वाली सब्सिडी आने वाले दिनों में किस तरह चरणबद्ध तरीके से कम की जाएगी उसकी घोषणा भी हो सकती है. यानी जैसे 50-50 पैसे कर के डीजल के दाम बढ़ाए जा रहे हैं, वैसे धीरे-धीरे खाद के दाम भी बढ़ाने की योजना के बारे में वित्त मंत्री बजट में बता सकते हैं. दूध का उत्पादन बढ़ाने के लिए गऊ-पालन को प्रोत्साहन देने वाले कदमों की भी बजट में घोषणा हो सकती है.

 

 

 

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