बजट सत्र: स्किल डेवलपमेंट, सबको मकान, किसानों से नाइंसाफी नहीं होगी- राष्ट्रपति

By: | Last Updated: Monday, 23 February 2015 7:56 AM

नई दिल्ली: आज से शुरू हुए संसद के बजट सत्र के हंगामेदार रहने की आशंकाओं के बीच राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने सभी सांसदों से अनुरोध किया कि वे सहयोग और आपसी सद्भावना के साथ अपने उत्तरादायित्वों का निर्वहन करें लेकिन ऐसा कोई संकेत नहीं दिया कि विवादास्पद भूमि अधिग्रहण अध्यादेश में सरकार की कोई बदलाव करने की मंशा है.

 

राष्ट्रपति ने हालांकि कहा कि सरकार भूमि अधिग्रहण से प्रभावित किसानों और उनके परिवारों के हितों की सुरक्षा को सर्वाधिक महत्व देती है. राष्ट्रपति ने संसद के दोनों सदनों के संयुक्त सत्र को सांबोधित करते हुए कहा, ‘मेरी सरकार सुचारू विधायी कार्य संचालित करने और संसद में ऐसे प्रगतिशील कानूनों को बनाने के लिए निरंतर प्रत्यनशील रहेगी जो लोगों की इच्छा और आकांक्षाओं को दर्शाते हैं.’ राष्ट्रपति ने सरकार की आगामी वर्ष की योजनाओं को अपने अभिभाषण के जरिये पेश करते हुए कहा कि हमारी संसद लोकतंत्र का परम पावन स्थल है और भारत के लोगों, विशेषकर दूर दराज में रहने वाले अत्यंत निर्धन लोगों ने अपनी आशाओं और आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए इस संस्था में अटूट विश्वास दिखाया है.

 

उन्होंने कहा, ‘मैं संसद के सभी सदस्यों से अनुरोध करता हूं कि वे सहयोग और आपसी सद्भावना के साथ अपने उत्तरदायित्वों का निर्वहन करें. प्रत्येक नागरिक की देश प्रेम की शक्ति से हम सबको एकजुट होकर एक सशक्त और आधुनिक भारत के निर्माण के लिए कार्य करना चाहिए. एक भारत, श्रेष्ठ भारत.’

 

राष्ट्रपति ने अपने 20 पृष्ठ के अभिभाषण में कहा, ‘मेरी सरकार के सतत प्रयासों तथा नीतिगत पहलों के परिणामस्वरूप हमारी अर्थव्यवस्था पुन: उच्च विकास पर है. हाल के अनुमानों के अनुसार, हमारी जीडीपी 7.4 प्रतिशत की दर से वृद्धि कर रही है जिसने भारत को विश्व में तीव्रतम गति से वृद्धि करने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था बना दिया है.’

 

उन्होंने आगे कहा, ‘सरकार द्वारा कई निर्णायक कदम उठाने के परिणाम स्वरूप मुद्रास्फीति विशेषकर खाद्य मुद्रास्फीति में रिकार्ड कमी आई है.. पूंजी बाजार उंचाई के स्तर पर है तथा हमारे विदेशी मुद्रा भंडार में भी पर्याप्त वृद्धि हुई है.’ अपने अभिभाषण में मुखर्जी ने आतंकवाद और वामपंथी उग्रवाद को देश की आतंरिक सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बताया और कहा, ‘मेरी सरकार इन चुनौतियों से निपटने के लिए प्रभावित लोगों एवं प्रभावित राज्यों की सरकारों के समन्वित सहयोग के साथ पूर्णत: प्रतिबद्ध है.’

 

जम्मू कश्मीर के विस्थापितों के बारे में उन्होंने कहा कि यह विषय सरकार के एजेंडा में महत्वपूर्ण स्थान रखता है और उसने राज्य में विस्थापितों के लिए अनुकूल माहौल बनाने का प्रयास किया है. उन्होंने कहा, ‘इसमें 60 हजार से अधिक कश्मीरी पंडित परिवारों के पुनर्वास को सुगम बनाना शामिल है और सरकार ने इस संबंध में कारगर कदम उठाये हैं जिनमें अन्य कार्यो के साथ साथ सरकारी नौकरियों, आर्थिक अवसर और सुरक्षा उपलब्ध कराना शामिल है.’

 

पड़ोसी देशों के साथ रिश्तों का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने कहा, ‘यह मानते हुए कि हमारा भविष्य हमारे पड़ोस से जुड़ा हुआ है, मेरी सरकार ने पड़ोसियों के साथ हमारे संबंधों में नई जान फूंकी है और यह दक्षिण एशिया में और अधिक सहाकारिता और मेलमिलाप को बढ़ावा दे रही है.’ राष्ट्रपति ने साथ ही कहा, ‘हम अपने हितों को स्पष्ट रूप से व्यक्त करते हैं और अपनी सीमाओं की रक्षा और जनता की सुरक्षा करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं.’

 

अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक समुदाय का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा, ‘‘ समाज के अत्यंत संवेदनशील एवं वंचित वर्गो के सर्वाधिक गरीब तबके को साथ लेते हुए सबका समेकित विकास मेरी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है.’’ उन्होंने कहा कि सरकार ने अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक समुदाय के छात्रों के लिए चलायी जा रही छात्रवृत्ति योजनाओं को सरल बनाने पर विशेष जोर दिया है ताकि लाभार्थियों को समय से भुगतान मिल सके .

 

उन्होंने कहा, ‘‘ अल्पसंख्यकों में परंपरागत कला, शिल्प के क्षेत्र में कौशल एवं प्रशिक्षण को उन्नत बनाने के लिए एक नई योजना ‘अपग्रेडिंग द स्किल एंड ट्रेनिंग इन ट्रेडिशनल आर्ट.क्राफ्ट्स फार डेवेलपमेंट (उस्ताद)’ आरंभ की जा रही है.’’ अपने अभिभाषण में भाजपा के आदर्श पुरूष डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को उद्धृत करते हुए राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘ भारत की सबसे बड़ी शक्ति इसकी समृद्ध आध्यात्मिक एवं सांस्कृति विरासत है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘ मेरी सरकार की मूल नीति है.. सबका साथ, सबका विकास. नौ महीने के कार्यकाल में मेरी सरकार ने हमारे देश की पूर्ण क्षमता और 125 करोड़ की बेशकीमती जनशक्ति का सदुपयोग करने की एक व्यापक कार्यनीति तैयार की है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘ इनमें कई क्षेत्रों में कार्रवाई तेज करने के उपाए किये गए हैं जैसे स्वच्छता से लेकर स्मार्ट शहर बनाना, गरीबी उन्मूलन से लेकर सम्पत्ति सृजन करना, कौशल विकास से लेकर अंतरिक्ष पर विजय प्राप्त करना, आबादी का फायदा लेने से लेकर राजनयिक पहल करना, व्यवसाय को आसान बनाने से लेकर नीतिगत ढांचा तैयार करना, लोगों को सशक्त बनाने से लेकर उत्तम बुनियादी सुविधाएं प्रदान करना, वित्तीय असमानता को दूर करने से लेकर देश को विनिर्माण का केंद्र बनाना, मुद्रास्फीति को रोकने से लेकर अर्थव्यवस्था को उन्नत करना, नये विचारों को बढ़ावा देने से लेकर समावेशी विकास सुनिश्चित करना, सहकारी संघवाद को बढ़ावा देने से लेकर राज्यों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना पैदा करना . एक अच्छी शुरूआत हो चुकी है. उज्जवल भविष्य हमारी राह देख रहा है.’’

 

प्रधानमंत्री के महत्वाकांक्षी स्वच्छता अभियान का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘ मेरी सरकार के लिए स्वच्छता आस्था का विषय है . स्वच्छता का प्रत्येक व्यक्ति विशेषकर गरीबों के समग्र जीवन स्तर और स्वास्थ्य पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा .’’ उन्होंने कहा कि अक्तूबर 2019 तक खुले में शौच की प्रथा से मुक्त भारत का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए स्वच्छ भारत मिशन शुरू किया गया है. सरकार ने ‘स्वच्छ विद्यालय कार्यक्रम’ शुरू किया है और यह 15 अगस्त 2015 से पहले हर स्कूल में एक शौचालय बनाने के लिए प्रतिबद्ध है.’’ राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘ मेरी सरकार यह आह्वान करती है कि प्रत्येक व्यक्ति इस मिशन में सक्रिय रूप से भाग ले. मैं सभी माननीय संसद सदस्यों से यह अपील करता हूं कि वे संसद सदस्य स्थानीय विकास योजना निधि का कम से कम 50 प्रतिशत स्वच्छ भारत मिशन पर खर्च करें.’’ साथ ही उन्होंने गरिमापूर्ण जीवन के लिए आवास को एक मूलभूत आवश्यकता बताते हुए कहा कि उनकी सरकार देश की स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे होने पर ‘मिशन हाउसिंग फार आल’ के तहत 2022 तक सभी परिवारों विशेष रूप से अत्यधिक गरीब परिवारों की आवास की उम्मीदों को पूरा करने के लिए अडिग हैं.

 

किसानों को खाद्य सुरक्षा का प्रहरी बताते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि ‘अन्नदाता सुखी भव’ हमारी स5यता के मूलभूत सिद्धांतों में से एक है.

 

उन्होंने कहा कि उत्पादकता और खेत की उपज में खाद की महत्वपूर्ण भूमिका को ध्यान में रखते हुए सरकार ने मृदा स्वास्थ्य कार्ड स्कीम योजना प्रारंभ की है. इसके अलावा प्रत्येक गांव की सिंचाई आवश्यकता को प्रभावी ढंग से निरंतर पूरा करने के लिए प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना शुरू की जा रही है.

 

उन्होंने बताया कि 72 अधिसूचित फूड पार्को में संचालित यूनिटों को कम दरों पर कर्ज देने के लिए 2000 करोड़ रूपये का विशेष फंड बनाया गया है.

 

असंतुलित लिंग अनुपात पर बढ़ती चिंताओं के बीच राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘ सन 1961 से ही शिशु लिंग अनुपात में निरंतर कमी होना अत्यंक चिंता का विषय है. इस चलन को बदलना होगा. बेटियों के जीवन, सुरक्षा एवं शिक्षा को सुनिश्चित करने के लिए मेरी सरकार ने ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान की शुरूआत की है जो लोगों की सोच में बदलाव लाने के लिए है ताकि वे बेटियों के जन्म पर भी हषिर्त हों.’’ उन्होंने कहा, ‘‘ बेटियों की शिक्षा को प्रभावी बनाने के लिए सुकन्या समृद्धि खाता नामक एक लघु बचत योजना अधिसूचित की गई है.’’ मुखर्जी ने कहा कि सरकार ने महिलाओं की गरिमा की रक्षा और उन्हें सशक्त बनाने के लिए भी अनेक कदम उठाये हैं. हिंसा पीड़ित महिलाओं को पूर्ण सहायता देने के लिए समन्वित सेवाओं का प्रावधान करने के उद्देश्य से प्रत्येक राज्य में ‘वन स्टाप क्राइसिस सेंटर’ की स्थापना की जा रही है जिसमें चिकित्सा, पुलिस सहायता, अस्थायी आश्रय तथा कानूनी एवं मनोवैज्ञानिक परामर्श शामिल हैं.

 

खेलों को बढ़ावा देने के संदर्भ में सरकार की नीतियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इसके लिए राष्ट्रीय खेल विकास निधि और लक्ष्य ओलंपिक पोडियम के माध्यम से 8 से 12 वर्ष की उम्र के बच्चों में खेल प्रतिभा को प्रोत्साहित करने के लिए ‘राष्ट्रीय खेल प्रतिभा खोज योजना’ तैयार की गई है.

 

कानूनी सुधार को सरकार की प्राथमिकताओं में से एक बताते हुए मुखर्जी ने कहा कि सरकार पुराने और अव्यवहारिक कानूनों को निरस्त करने को वचनबद्ध है. इसके लिए गठित समिति ने विभिन्न श्रेणियों के तहत 1741 केंद्रीय अधिनियमों को निरस्त करने की पहचान कर ली है.

 

‘अधिकतम सुशासन, न्यूनतम सरकार’ को सरकार का दिशानिर्देशक सिद्धांत बताते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि दूर दराज के क्षेत्रों में निर्धनतम व्यक्ति तक सुशासन ले जाने के उद्देश्य से प्रौद्योगिकी के जरिए सरकार में निर्णय लेने के स्तरों को कम करने तथा प्रक्रियाओं के सरलीकरण पर ध्यान दिया जा रहा है. कालेधन के बारे में उन्होंने कहा, ‘‘ सरकार घरेलू एवं अंतराष्ट्रीय दोनों ही स्तरों पर कालेधन के सृजन को रोकने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने हेतु प्रतिबद्ध है. इन उपायों को मजबूत विधायी प्रशासनिक ढांचे, प्रणालियों एवं प्रक्रियाओं को कार्यान्वित करने के लिए लागू किया गया है जिसमें क्षमता निर्माण, प्रौद्योगिकी के माध्यम से सूचना के एकीकरण तथा मुकदमों का तुरंत निपटान शामिल है.’’ आर्थिक सुधारों का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार वित्तीय क्षेत्र में विधायी सुधार आयोग की सिफारिशों के कार्यान्वयन में तेजी लायेगी. उन्होंने कहा कि इसके अलावा सरकार ने कर प्रणाली में व्यापक कार्य कुशलता साम्य लाने के लिए प्रयासों को तेज किया है. इसके लिए माल एवं सेवा कर लागू करने के लिए एक संविधान संशोधन विधेयक लाया गया है जो अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था को सरल बनायेगा.

 

सरकार को शक्ति के विकेंद्रीकरण के प्रति कृतसंकल्प बताते हुए मुखर्जी ने कहा कि इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए योजना आयोग के स्थान पर नीति आयोग बनाया गया है. इसका उद्देश्य सहकारी संघवाद की भावना को बढ़ावा देना है ताकि गरीबों को सशक्त बनाने पर बल देते हुए विकास के लिए सर्व मान्य कार्यक्रम तैयार करने के उद्देश्य से केंद्र तथा राज्य सरकारें एक प्लेटफार्म पर आएं.

 

उन्होंने बताया कि राजमार्ग क्षेत्र में सुधार करने के लिए नये नीतिगत प्रयासों के तहत देश के पूर्वोत्तर राज्यों और सीमावर्ती क्षेत्रों में आधारभूत संरचना के निर्माण के लिए ‘राष्ट्रीय राजमार्ग अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड की स्थापना की गई है.

 

राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार ने तटीय क्षेत्रों और तटीय क्षेत्रवासी समुदाय के विकास को बढावा देने के लिए सागर माला परियोजना तैयार की है और मेक इन इंडिया पहल के तहत जहाज को डिजाइन करने की क्षमता, जहाज निर्माण और जहाज मरम्मत करने के कार्य को सुदृढ़ किया जायेगा. उन्होंने कहा कि सरकार ने स्वच्छ उर्जा पर अत्यधिक जोर देते हुए अगले सात वषरे में विद्युत उत्पादन में नवीकरणीय उर्जा का हिस्सा छह प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा है.

 

कोयला ब्लाक आवंटनों में अनियमितताओं को समाप्त करने के बारे में मुखर्जी ने कहा कि सरकार प्राकृतिक संसाधनों के आवंटन की अभीष्टमत उपयोगिता और पारदर्शिता के लिए प्रतिबद्ध है.

 

उन्होंने कहा कि सरकार विधिवत परामर्श प्रक्रिया के साथ नदियों को परस्पर जोड़ने की परियोजना के कार्यान्वयन के लिए पूर्णत: प्रतिबद्ध है और नमामि गंगे एकीकृत गंगा संरक्षण मिशन को 2000 करोड़ रूपये से अधिक के बजटीय आवंटन के साथ प्रारंभ किया गया है.

 

राष्ट्रपति ने बताया कि अनुसंधान एवं विकास के लिए और अधिक संसाधनों का उपयोग करने, विश्व स्तरीय अनुसंधान केंद्रों का निर्माण करने, युवा प्रतिभा को विकसित करने और विश्व के सबसे बड़े आप्टिकल ‘30 मीटर टेलीस्कोप’ सहित अंतरराष्ट्रीय सहभागिता को बढ़ावा देने के कदम उठाये जा रहे हैं. शिक्षा को सरकार की प्राथमिकताओं में सर्वोच्च बताते हुए उन्होंने कहा कि बुनियादी स्तर पर शिक्षा के परिणामों में सुधार हेतु ‘पढे भारत, बढे भारत’ योजना शुरू की गई है. इसके अलावा शिक्षकों की क्षमता को बढ़ाने एवं उनके सशक्तिकरण हेतु ‘पंडित मदन मोहन मालवीय शिक्षण एवं शिक्षक प्रशिक्षण राष्ट्रीय मिशन की शुरूआत की गई है. साथ ही छात्रों में वैज्ञानिक सोच को विकासित करने के लिए ‘राष्ट्रीय आविष्कार अभियान भी शुरू किया गया है.

 

कौशल विकास को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार हुनर को बढावा देने के लिए ‘राष्ट्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता नीति पर विचार कर रही है.

 

उन्होंने कहा कि सरकार के प्रयासों से विश्व में भारत की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर और परंपराओं की मान्यता में वृद्धि हुई है और 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया जाना इसका सबूत है.

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Web Title: Budget_session_President_Pranab_Mukherjee
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