रेल बजट में होगा बुलेट ट्रेन चलाने का एलान, बुलेट ट्रेन लाइन में विदेशी निवेश!

By: | Last Updated: Monday, 7 July 2014 11:38 AM
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नई दिल्ली : रेल बजट में बुलेट ट्रेन चलाने का एलान हो सकता है. मुंबई-अहमदाबाद रूट पर सबसे पहले बुलेट ट्रेन संभव है.

 

मोदी सरकार मंगलवार को अपना पहला रेल बजट पेश करेगी. ABP न्यूज को सूत्रों के हवाले से मिली खबर के मुताबिक रेल बजट में बुलेट ट्रेन का एलान किया जा सकता है .

 

बताया जा रहा है कि पहली बुलेट ट्रेन मुंबई और अहमदाबाद के बीच चलेगी . इस रूट पर भारत और जापान के एक्सपर्ट साझा तौर पर स्टडी कर रहे हैं जो अगले दस महीने में पूरी होगी. माना जा रहा है कि स्टडी खत्म होते ही बुलेट ट्रेन का काम शुरू हो जाएगा .

 

हालांकि मुंबई-अहमदाबाद रूट पर बुलेट ट्रेन चलाने की स्टडी जापान के साथ अभी जारी है और रिपोर्ट 2015 में आएगी, लेकिन खबरे ये आईं कि मनमोहन सरकार के हाथ-पांव इसलिए फूल गए थे क्योंकि खर्चे का अनुमान लगा 70,000 करोड़. जबकि 2014-15 के अंतरिम बजट में पिछली सरकार ने इस साल का कुल योजना खर्च ही 64 हजार करोड़ रखा था. तो जहां रेलवे पूरे देश में योजनाओं के लिए 64 हजार करोड़ रुपये खर्च करने की सोच रही हो, वहा 70 हजार करोड़ मुंबई और अहमदाबाद के बीच के 543 किलोमीटर के रास्ते पर बुलेट ट्रेन चलाने पर कैसे खर्च किए जा सकते हैं?

 

यही है मोदी सरकार की सबसे बड़ी चुनौती. बुलेट ट्रेन के लिए पैसा कहां से आएगा?

 

बुलेट ट्रेन लाइन में विदेशी निवेश!

 

बुलेट ट्रेन के लिए पैसे के लिए इस लाइन पर विदेशी निवेश को इजाजत देने की भी बड़ी घोषणा हो सकती है. लेकिन सवाल ये कि 70 हजार करोड़ रुपये क्यों चाहिएं मुंबई से अहमदाबाद तक बुलेट ट्रेन चलाने में. ऐसा नहीं कि ट्रेन इतनी महंगी है. ऐसा इसलिए कि इस ट्रेन को चलाने के लिए नई पटरी बिछानी होगी. हमारी मौजूदा पटरियों पर ट्रेन 300 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार पर नहीं चल सकती. नई लाइन बिछेगी, फिर नए स्टेशन बनेंगे, इंजन इंपोर्ट करने होंगे शायद जापान से, फिर खास डिब्बे लेने होंगे. औऱ पूरी रास्ते की दोनों तरफ से फेंसिंग करनी होगी. क्योंकि बुलेट ट्रेन के रास्ते में कोई रेलवे क्रॉसिंग नहीं हो सकती. कोई जानवर भी ट्रेन से टकरा गया तो बड़ा हादसा हो सकता है. यानी कई जगह ट्रैक को जमीन के ऊपर भी चलना होगा, जैसे मेट्रो चलती है. तो सबसे बड़ा खर्च तो ज़मीन का आएगा. इस पूरे 543 किलोमीटर के रास्ते पर नया ट्रैक और स्टेशन बनाने के लिए जमीन चाहिए होगी. इसीलिए 70 हजार करोड़ के अनुमान की खबरें आईं. क्योंकि जमीन तो महाराष्ट्र औऱ गुजरात की है, इसके लिए अलग कंपनी बनाई जाएगी, एक अलग रेल निगम जिसमें महाराष्ट्र औऱ गुजरात राज्य सरकारें रेलवे के साथ पार्टनर होंगी.

 

पिछली सरकार की स्टडी में ये भी निकला था कि खर्च का सिर्फ 19 फीसदी ही कमाई से वसूला जा सकता है. अब सोचिए 70 हजार करोड़ रुपये अगर एक लाइन पर खर्चा हो गया तो उसकी टिकट कितनी रखनी होगी? हवाई जहाज से ज्यादा तो रख नहीं सकते. तो फिर कमाई कैसे होगी? क्या इसके रास्ते में आने वाले स्टेशनों के आसपास नए शहर बसाए जाएंगे? उद्योग लगाए जाएंगे?

 

दिल्ली से आगरा के बीच सेमी बुलेट ट्रेन का सफल ट्रायल पहले ही पूरा हो चुका है. नवंबर से देश में पहली सेमी बुलेट ट्रेन दौड़ सकती है.

 

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