पाकिस्तान में कैद 54 भारतीय सैनिकों का मसला अंतर्राष्ट्रीय कोर्ट में नहीं उठा सकते: केंद्र

By: | Last Updated: Tuesday, 1 September 2015 11:23 AM
Cannot move International Court of Justice against Pakistan on 54 prisoners

नई दिल्ली: पाकिस्तान की जेल में बंद 54 भारतीय सैनिकों का मसला अंतर्राष्ट्रीय कोर्ट (International Court of Justice) में उठाना मुमकिन नहीं है. केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को ये बताया है.

 

भारत के ये सैनिक 1965 और 1971 की लड़ाई के बाद से पाकिस्तान की जेलों में बंद हैं. हालांकि, पाकिस्तान इन सैनिकों के अपने यहां होने से लगातार इनकार करता रहा है.

 

केंद्र सरकार की तरफ से आज सॉलिसिटर जनरल रंजीत कुमार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि भारत और पाकिस्तान के कॉमनवेल्थ देश होने चलते इस मसले को अंतर्राष्ट्रीय कोर्ट में नहीं उठाया जा सकता. इसकी वजह है 1974 में ICJ के चार्टर को स्वीकार करते समय भारत और पकिस्तान की तरफ से रखी गई शर्त.

 

दोनों देशों की तरफ से कहा गया था कि किसी कॉमनवेल्थ देश के साथ उनके विवाद को उनकी मंज़ूरी के बिना ICJ नहीं सुन सकता. यही वजह है कि पकिस्तान की मंज़ूरी के बिना भारत द्विपक्षीय मामले को अंतर्राष्ट्रीय कोर्ट मं  नहीं उठा सकता. न ही भारत की मंज़ूरी के बिना पाकिस्तान ऐसा कर सकता है.

 

सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी गई कि भारत पहले पाकिस्तान की इस तरह की कोशिश का विरोध कर चुका है. 10 अगस्त 1999 को भारतीय सेना ने पाकिस्तानी नेवी के विमान ‘अटलांटिक’ को मार गिराया था. पाकिस्तान ने ये मसला ICJ में उठाने की कोशिश की. तब भारत ने इसकी मंज़ूरी नहीं दी थी और मामला शुरू नहीं हो पाया था.

 

सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि पाकिस्तान लगातार भारतीय सैनिकों के अपने यहां होने से इनकार करता रहा है. ऐसे में ये तय है कि पाकिस्तान इस मसले को ICJ में उठाने की मंज़ूरी नहीं देगा. हालांकि, सरकार ने साफ़ किया कि वो इन सभी सैनिकों को जीवित मानती है.

 

2012 से इन सैनिकों के परिवार को बकाया वेतन और पेंशन का लाभ दिया जा रहा है. इस मामले में अगली सुनवाई 8 सितंबर को होगी.

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Web Title: Cannot move International Court of Justice against Pakistan on 54 prisoners
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