Cash crisis in Gujarat, Madhya Pradesh, Bihar and UP गुजरात, मध्यप्रदेश, बिहार और यूपी में नकदी का संकट, कई जगह लगे ‘नो कैश’ के बोर्ड

गुजरात, मध्यप्रदेश, बिहार और यूपी में नकदी का संकट, कई जगह लगे ‘नो कैश’ के बोर्ड

सिर्फ एटीएम ही नहीं ग्राहक दावा कर रहे हैं कि बैंक की ब्रांच से भी नकद पैसे मिलने में दिक्कत हो रही है. ग्राहकों के मुताबिक किसी के घर में शादी है तो कोई दवा के लिए भटक रहा है.

By: | Updated: 17 Apr 2018 03:36 PM
Cash crisis in Gujarat, Madhya Pradesh, Bihar and UP

नई दिल्लीदेश के चार राज्यों से नकदी का संकट पैदा हो गया है. ये राज्य गुजरात, मध्यप्रदेश, यूपी और बिहार हैं. इसमें बिहार सबसे ज्यादा प्रभावित है. गुजरात के चार से ज्यादा जिलों और मध्यप्रदेश के कुछ जिलों से नकद की कमी की शिकायत सामने आ रही हैं. दो साल पहले नवंबर में नोटबंदी हुई थी और आज डेढ़ साल बाद देश के तीन राज्यों में वैसे ही हालात बन गए हैं.


साजिश के तहत गायब हो रहे हैं दो हजार के नोट- सीएम शिवराज


नकदी की समस्या को लेकर मध्यप्रदेश के शाजापुर में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक बड़ा बयान दिया है. मुख्यमंत्री ने किसानों की एक सभा में कहा है ‘’दो हजार के नोट को साजिश के तहत चलन से गायब किया जा रहा है.’’


यूपी में सीएम योगी ने कल बैठक बुलाई


नकदी का संकट उत्तर प्रदेश में भी है. इसको लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कल बैठक बुलाई है. यूपी के कई जिलों में कैश नहीं मिल रहा है. कहा जा रहा है कि सीएम योगी नकदी संकट को लेकर कल वित्त मंत्री अरुण जेटली को पत्र लिख सकते हैं.



बिहार सबसे ज्यादा प्रभावित


बिहार की राजधानी पटना में भी कैश की किल्लत हो गई है. सिर्फ एटीएम ही नहीं ग्राहक दावा कर रहे हैं कि बैंक की ब्रांच से भी नकद पैसे मिलने में दिक्कत हो रही है. ग्राहकों के मुताबिक किसी के घर में शादी है तो कोई दवा के लिए भटक रहा है.


एसबीआई के बिहार जोन के एजीएम (पीआर) मिथिलेश कुमार ने बताया कि कैश डिपॉजिट का फ्लो कम हुआ है. आरबीआई से रिक्वेजेशन करते हैं. लेकिन कुछ दिनों से फुलफिल नहीं हो पा रहा है.


क्यों हो रही है कैश की दिक्कत?


एसबीआई के मुताबिक, ग्राहक बैंक में नकद कम जमा कर रहे हैं और आरबीआई बैंकों की मांग के मुताबिक नकद जारी नहीं कर रहा है. आपको बता दें कि सूत्रों के मुताबिक एसबीआई के बिहार में 1100 एटीएम हैं. 1100 एटीएम में रोजाना 250 करोड़ रुपये की जरूरत है. लेकिन अभी 125 करोड़ रुपये यानी आधा पैसा ही मिलता है. पटना में सिर्फ सरकारी बैंकों में ही नहीं प्राइवेट बैंकों के एटीम में भी कैश की किल्लत है.


ये नोटबंदी के बाद सबसे बड़ा घोटाला- तेजस्वी यादव


नकदी संकट पर बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और लालू प्रसाद यादव के बेटे तेजस्वी ने मोदी सरकार पर निशाना साधा है. तेजस्वी यादव ने कहा है, ‘’एटीएम मशीन में पैसे नहीं है. नोटबंदी के बाद यह सबसे बड़ा घोटाला है. अगर इस मामले की जांच कराई जाए तो कई बड़े लोग फंस जाएंगे.’’


बता दें कि बैंकों में एटीएम में तीन से पांच ट्रांजेक्शन फ्री हैं. उसके बाद 20 रुपये प्रति निकासी तक चार्ज देना पड़ता है. तो बैंक एटीएम में पैसे नहीं होने पर बैंक ग्राहकों को हर्जाना क्यों नहीं देता?


बिहार के जहानाबाद, कटिहार और गया में क्या हालात हैं?


बिहार के जहानाबाद में दस में से आठ एटीएम या तो बंद हैं या खराब पड़े हैं. बस एचडीएफसी और बंधन बैंक के एटीएम से ही पैसे निकल रहे थे. जब एसबीआई के चीफ मैनेजर राजीव सिन्हा से पूछा आखिर एटीएम भुखमरी की कगार पर क्यों हैं? तो उन्होंने बताया, ‘’जितना डिमांड कर रहे हैं उतना आ नहीं रहा. आरबीआई से भी नहीं आ रहा और जितना जा रहा है उतना वापस नहीं आ रहा. इसलिए एटीएम को भी उतना नहीं दे पा रहे.’’


बिहार के कटिहार के मिरचाईबाड़ी इलाके में इलाहाबाद बैंक के पास स्थानीय निवासी संजय कुमार ने बताया, ‘’जब से एटीएम बना है एक से दो बार ही पैसे निकले हैं और नोटबंदी के बाद आजतक इस एटीएम का शटर नहीं खुला है.’’


बिहार के गया शहर में भी एटीएम ही कैशलेस का शिकार हो गये हैं. लोग पूछ रहे हैं नोटबंदी के डेढ़ साल बाद भी ऐसी दिक्कत क्यों झेलनी पड़ रही है? एक स्थानीय निवासी का कहना है, ‘’नोटबंदी के समय जो परेशानी थी, वही अप्रैल में भी है. पूरे गया शहर में जितने भी एटीएम हैं, किसी में कैश नहीं है. हमारा पैसा हम ही को लेने में परेशानी हो रही है.’’


बिहार के औरंगाबाद में एटीएम ही नहीं बैंक से भी पैसे नहीं मिल रहे. औरंगाबाद में तो पीएनबी के नाराज ग्राहकों ने गोह-गया सड़क पर ही जाम लगा दिया. ग्राहक आरोप लगा रहे हैं कि ब्रांच मैनेजर आम आदमी को नकद पैसे नहीं दे रहे हैं. अमीर व्यापारियों को दे देते हैं.


एसबीआई ने खातों में पैसे कम होने के नाम पर वसूले थे 1771 करोड़ रुपये


आपको बता दें कि  एसबीआई ने खातों में पैसे कम होने के नाम पर ग्राहकों से 1771 करोड़ रुपये वसूले थे, जो बैंक के तिमाही मुनाफे से ज्यादा था. आज उसी एसबीआई से अपने खाते के पैसे निकालने के लिए लोग दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं. तो क्या एसबीआई भी ग्राहकों को हर्जाना देगा?

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