सुमित्रा महाजन का बड़ा बयान, आरक्षण के लिए मेरे जैसे नेता जिम्मेदार

By: | Last Updated: Sunday, 24 January 2016 3:50 PM
Caste-based reservations: We’ve done nothing, says Sumitra Mahajan

नई दिल्ली: आरक्षण का जिन्न एक बार फिर बाहर निकल गया है. इस बार लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने मौजूदा आरक्षण व्यवस्था के लिए नेताओं को जिम्मेदार ठहराया है. सुमित्रा महाजन के इस बयान पर नया बवाल खड़ा हो गया है.

अहमदाबाद में स्मार्ट सिटीज को लेकर हुए कार्यक्रम में बोलते हुए सुमित्रा महाजन ने कहा, “जिनके लिये आरक्षण दिया गया था उनका उत्थान अब तक नहीं हुआ है. यह चिंता की बात है. इसके लिए शायद मेरे जैसे नेता ही जिम्मेदार हैं.”

क्या नेताओं ने आरक्षण देकर कोई जुर्म किया है. ये सवाल खड़ा किया है लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने. कल अहमदाबाद में एक कार्यक्रम के दौरान लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने देश में जातिगत आरक्षण की व्यवस्था के लिए नेताओं को जिम्मेदार ठहराया . उन्होंने कहा कि डॉ भीमराव आंबेडकर ने सिर्फ 10 साल के लिए आरक्षण व्यवस्था लागू करने की सलाह दी थी, लेकिन नेता अपने फायदे के लिए इसे आगे बढ़ाते गए.

महाजन ने कहा, “अंबेडकर जी ने कहा था, आरक्षण 10 साल के लिए दिया जाना चाहिए. इसके बाद इसकी समीक्षा होनी चाहिए. पिछड़े लोगों को इस स्तर पर लाना चाहिए. हमने ऐसा कुछ नहीं किया. हमने कभी इस बात पर ध्यान नहीं दिया और ना ही इसकी समीक्षा की.”

आरक्षण पर लोकसभा स्पीकर के इस बयान से सियासी हलकों में नया भूचाल खड़ा हो गया है. कांग्रेस से लेकर आरजेडी तक ने आरक्षण की मौजूदा व्यवस्था में किसी भी तरह के बदलाव को लेकर सरकार को ही चेतावनी दे दी है.

सुमित्रा महाजन का आरक्षण पर बयान मोदी सरकार के लिए नई मुसीबत बन सकता है. पिछले साल बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सितंबर में राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के सर संघचालक मोहन भागवत ने भी आरक्षण की समीक्षा की बात कही थी. आरएसएस के मुखपत्र ऑर्गनाइजर में मोहन भागवत ने कहा था, “आरक्षण को हमेशा राजनीतिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया गया है. लोग अपनी सुविधा के मुताबिक अपने समुदाय या वर्ग का ग्रुप बनाते हैं और आरक्षण की मांग करने लगते हैं. लोकतंत्र में कई नेता उनका समर्थन भी करते हैं. एक गैर राजनीतिक समिति का गठन होना चाहिए जो समीक्षा करे कि किसे आरक्षण की ज़रूरत है और कब तक?”

तब केंद्र सरकार भागवत के बयान को लेकर बैकफुट आ गई थी और सरकार ने तब ही कह दिया था कि वो आरक्षण में किसी भी तरह की समीक्षा नहीं करने जा रही है.

आरक्षण का आधार क्या है?

भारतीय संविधान में सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण का प्रावधान किया गया है. इसी को ध्यान में रखते हुए संविधान निर्माता भीमराव आंबेडकर ने संविधान में अनुसूचित जाति के लिए 15 फीसदी और अनुसूचित जनजाति के लिए 7.5 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था की थी. बाद में 90 के दशक में मंडल कमीशन की सिफारिशों के आधार पर अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी के लिए 27 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था की गई थी. यानी मौजूदा समय में साढ़े 49 फीसदी आरक्षण लागू है.

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि देश में 50 फीसदी से ज्यादा आरक्षण की व्यवस्था नहीं हो सकती है, लेकिन विशेष परिस्थिति में कुछ राज्यों में आरक्षण की कुल सीमा 50 फीसदी से ज्यादा है. तमिलनाडु में 69 फीसदी तक आरक्षण है. उत्तर पूर्वी राज्यों में भी आरक्षण की सीमा 50 फीसदी से ज्यादा है.

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Web Title: Caste-based reservations: We’ve done nothing, says Sumitra Mahajan
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