सीबीआई ने कहा नहीं लौटा सकते केजरीवाल सरकार को दस्तावेज़

cbi denies to return documents

नई दिल्ली: दिल्ली सचिवालय पर हुई रेड के दौरान ज़ब्त किये गए दस्तावेजों को लौटाने वाले दिल्ली की निचली अदालत के आदेश को सीबीआई ने हाइकोर्ट में चुनौती दी. याचिका में मांग की गई कि निचली अदालत के आदेश को रद्द किया जाए क्योंकि इससे जांच प्रभावित हो सकती है. फिलहाल हाई कोर्ट ने निचली अदालत के आदेश पर कोई रोक नहीं लगाई है.

निचली अदालत के आदेश से कटघरे में खड़ी हुई सीबीआई ने आनन फानन में हाइकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और मांग की कि निचली अदालत के आदेश को रद्द किया जाए और जब तक सुनवाई चल रही है तब तक अदालत के आदेश पर रोक लगाई जाए क्योंकि इससे मामले की जांच प्रभावित हो सकती है. सीबीआई ने याचिका में कहा कि दिल्ली सरकार का इस मामले में कोई अधिकार नहीं बनता, निचली अदालत का फैसला उनको फायदा पहुंचा सकता है. लिहाज़ा निचली अदालत आदेश पर रोक लगाई जाए.

दिल्ली सरकार ने सीबीआई की इस याचिका का विरोध किया और कहा की निचली अदालत के आदेश पर रोक नहीं लगनी चाहिए क्योंकि निचली अदालत ने अपने फैसले में साफ़ लिखा है की सीबीआई ने गैर ज़रूरी दस्तावेज़ भी अपने कब्ज़े में रखे हुए हैं. इससे पहले बुधवार को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने दिल्ली सरकार की अर्ज़ी पर सुनवाई करते हुए आदेश देते हु कहा की सीबीआई ने ये दस्तावेज़ ज़ब्त क्यों किये हैं इस बात का जवाब वो कोर्ट को नहीं दे पा रही है जबकि रेड को 1 महीने का वक़्त हो चुका है.

अदालत ने अपने आदेश में सीबीआई की जांच पर सवाल उठाते हुए कहा-

  • राजेंद्र कुमार सरकारी कर्मचारी हैं और तथ्यों को देखने बाद ऐसा लगता है की सीबीआई ने राजेंद्र कुमार के खिलाफ कार्रवाई जल्दबाज़ी में की है.
  • क्योंकि सीबीआई के मुताबिक़ उनको शिकायत मिली थी जिसके बाद उन्होंने कार्रवाई की, जबकि कहीं से ये अब तक साफ़ नहीं हुआ है की क्या राजेन्द्र कुमार का उन घोटालों से सीधे तौर पर कुछ लेना देना था या नहीं या उनको कथित घोटाले से फायदा पहुंचा है.
  • इस रेड को करने से पहले सीबीआई ने अदालत से सर्च वारंट लिया था पर सर्च वारंट लेने का मतलब ये कतई नहीं है की उसका कहीं से भी दुरूपयोग किया जाए.
  • सीबीआई ने जो दस्तावेज़ ज़ब्त किये हैं उनमे से कई ऐसे हैं जो उनकी जांच के क्षेत्र के बाहर के दिखते हैं ऐसे में उनको सीबीआई अपने पास क्यों रखना चाहती है.

दिल्ली सरकार ने सीबीआई जांच पर सवाल उठाते हुए कहा था की सीबीआई ने रेड राजेंद्र कुमार के दफ्तर पर नहीं बल्कि मुख्यमंत्री कार्यालय पर की थी. और उस दौरान कई ऐसे दस्तावेज़ भी अपने कब्ज़े में ले लिए जिनका जांच से कोई लेना देना नहीं था.

जिसके बाद दिल्ली सरकार ने सीबीआई जांच पर सवाल खड़े करते हुए पटियाला हाउस कोर्ट में अर्ज़ी लगाकर मांग की कि जांच एजेंसी सीबीआई ने दिल्ली सरकार के दस्तावेज़ अपने कब्ज़े में लिए हुए हैं और इसके चलते सरकार के काम काज पर असर पड़ रहा है.

हालांकि निचली अदालत ने अपने आदेश में ये भी साफ़ तौर पर लिखा था की सीबीआई इन सभी दस्तावेजों की फोटोकॉपी अपने पास रख सकती है और इतना ही नहीं ज़रूरत पड़ने पर कभी भी उन दस्तावेजों की मूल प्रति को देख सकती है और कानून की प्रक्रिया का पालन करते हुए वापस भी ज़ब्त कर सकती है. लेकिन दिल्ली हाइकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाकर सीबीआई अब इस पूरे आदेश पर ही रोक लगाने की मांग कर रही.

सीबीआई की अर्ज़ी पर उसको राहत मिलती है ये तो सोमवार की सुनवाई के बाद साफ़ हो सकता है लेकिन सीबीआई के लिए निचली अदालत का ये फैसला एक बड़ा झटका ज़रूर है और इसी वजह से वो किसी भी हालत में उस फैसले को रद्द करवाना चाहती है.

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