CBI techie hosted Tatkal 'cheat' software on a US server।सीबीआई के प्रोग्रामर ने तत्काल टिकट ‘फर्जीवाड़ा’ के लिए अमेरिकी सर्वर का इस्तेमाल किया था

सीबीआई के प्रोग्रामर ने तत्काल टिकट ‘फर्जीवाड़ा’ के लिए अमेरिकी सर्वर का इस्तेमाल किया था

सीबीआई सूत्रों ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि एजेंसी में असिस्टेंट प्रोग्रामर के रूप में काम करने वाले अजय गर्ग और उसके साथी अनिल गुप्ता ने अपने अवैध सॉफ्टवेयर के लिए अमेरिका के सर्वर का सहारा लिया था

By: | Updated: 31 Dec 2017 07:21 PM
CBI techie hosted Tatkal ‘cheat’ software on a US server

नई दिल्ली: सीबीआई ने इंटरपोल के जरिए अमेरिका और रूस को चिट्ठी लिखी है. चिट्ठी में उन सर्वरों के बारे में सूचना मांगी गई है जिनके जरिए गिरफ्तार किए गए सॉफ्टवेयर प्रोग्रामर ने रेलवे की तत्काल टिकट बुकिंग प्रणाली में सेंध लगाने के लिए अपने अवैध सॉफ्टवेयर का संचालन किया था.


सीबीआई सूत्रों ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि एजेंसी में असिस्टेंट प्रोग्रामर के रूप में काम करने वाले अजय गर्ग और उसके साथी अनिल गुप्ता ने अपने अवैध सॉफ्टवेयर के लिए अमेरिका के सर्वर का सहारा लिया था, जबकि पकड़ में आने से बचने के लिए ई-मेल रूसी सर्वर पर तैयार किए गए थे.


सूत्रों ने कहा कि इन लोगों की तरफ से बनाया गया सॉफ्टवेयर एक सर्वर पर होस्ट होता था और एंड यूजर्स इस तक गर्ग और गुप्ता द्वारा उपलब्ध कराए गए यूजर नेम और पासवर्ड के जरिए पहुंच सकते थे. दोनों अपने सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल के लिए ट्रैवल एजेंटों से 1,000-1,200 रुपये वसूलते थे.


सूत्रों ने बताया कि आरोपियों की तरफ से बनाया गया सॉफ्टवेयर 'निओ' अमेरिका स्थित एक सर्वर के जरिए संचालित होता था. उन्होंने कहा कि ऐसा उनके सर्वरों पर ट्रैफिक की स्पीड बढ़ाने और पकड़ में आने और एजेंसियों की जांच से बचने के लिए किया गया. इसके साथ ही सूत्रों ने बताया कि एजेंसी ने अमेरिका और रूस स्थित इन बैक-एंड सर्वरों के बारे में ब्यौरा मांगने के लिए इंटरपोल से संपर्क किया है.


इंजीनियर गर्ग चयन प्रक्रिया के जरिए 2012 में सीबीआई में नियुक्त हुआ था और वह असिस्टेंट प्रोग्रामर के रूप में काम कर रहा था. उसने 2007 से 2011 के बीच आईआरसीटीसी में भी काम किया था जो रेलवे की टिकट प्रणाली से जुड़ी है.


सूत्रों ने बताया कि सीबीआई जांच में अब तक संकेत मिला है कि गर्ग को आईआरसीटीसी में काम करने के दौरान इसके टिकटिंग सॉफ्टवेयर में खामियों का पता चला. जिसका फायदा उसने अपने सॉफ्टवेयर के लिए उठाया. उन्होंने बताया कि पूछताछ में पता चला कि इन लोगों का नेटवर्क देशभर में फैला है. एजेंसी ने अब तक 10 ट्रैवल एजेंटों की पहचान की है जो नेटवर्क का हिस्सा थे जिनसे पूछताछ में एजेंसी और एजेंटों तक पहुंच सकी जिन्होंने उनकी अवैध सेवाएं लीं.


बता दें कि सीबीआई ने अवैध तरीके से चलने वाले तत्काल रैकेट के खिलाफ देश में 14 जगहों पर छापेमारी की है. इनमें दिल्ली, मुंबई और उत्तर प्रदेश के कई शहर शामिल हैं. अब तक की छापेमारी में 89 लाख रुपये नकद, दो सोने के बिस्कुट, 61 लाख रुपये की ज्वैलरी, 15 लैपटॉप, 15 हार्ड डिस्क, 52 मोबाइल फोन, 24 सिम, 6 वाईफाई राउटर, चार इंटरनेट डोंगल और 19 पेन ड्राइव समेत बहुत सारा सामान बरामद हुआ है.

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