CBSE की नई गाइडलाइंस: स्कूलों में लगे CCTV, स्टाफ का हो पुलिस वेरिफिकेशन

CBSE की नई गाइडलाइंस: स्कूलों में लगे CCTV, स्टाफ का हो पुलिस वेरिफिकेशन

सीबीएसई की ओर से निर्धारित उपायों में सुरक्षा ऑडिट, सीसीटीवी कैमरे लगाना, पुलिस वेरिफिकेशन और मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन करना शामिल है.

By: | Updated: 14 Sep 2017 09:58 PM

नई दिल्ली: सीबीएसई ने स्कूल कैंपस में छात्रों की सुरक्षा की जिम्मेदारी स्कूलों पर डालते हुए गुरुवार को संस्थानों में लागू करने के लिए सुरक्षा संबंधी नए गाइडलाइंस जारी किए. इन्हें नहीं लागू करने पर उनकी मान्यता वापस ली जा सकती है. ये गाइडलाइन स्कूल कैंपस में छात्रों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ने के बीच आए हैं. ये गाइडलाइंस गुरुग्राम स्कूल में सात साल के बच्चे की हत्या और दिल्ली के एक स्कूल में पांच साल की बच्ची के साथ रेप जैसी घटनाओं के बाद छात्रों की सुरक्षा को लेकर जारी किए गए.


सीबीएसई की गाइडलाइंस की मुख्य बातें


बोर्ड की ओर से निर्धारित उपायों में सुरक्षा ऑडिट, सीसीटीवी कैमरे लगाना, पुलिस वेरिफिकेशन और मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन करना शामिल है. इसके साथ ही छात्रों की सुरक्षा जरुरतों के समाधान के लिए अभिभावक, शिक्षक, छात्र समिति गठन और अभिभावकों से नियमित फीडबैक लेना भी शामिल है. सीबीएसई के गाइडलाइन में कहा गया है, ‘‘स्कूल कैंपस में छात्रों की सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल स्कूल प्रशासन पर होगी. यह बच्चे का मूलभूत अधिकार है कि वह ऐसे वातावरण में पढ़ाई करे जिसमें वह सुरक्षित महसूस करे और किसी तरह के शारीरिक या भावनात्मक उत्पीड़न से मुक्त हो.’’ इसमें यह भी कहा गया है कि स्कूल बिल्डिंग में किसी बाहरी शख्स की एंट्री नियंत्रित होना चाहिए और आने वाले गेस्ट्स की निगरानी होनी चाहिए.


स्कूल कर्मियों को प्रशिक्षित किया जाना चाहिए


गाइडलाइन में कहा गया , ‘‘बच्चों की किसी तरह के उत्पीड़न से सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए स्कूल कर्मियों को प्रशिक्षित किया जाना चाहिए.’’ इसके साथ ही स्कूल परिसर में बच्चों की सुरक्षा और कुशलता के संबंध में किसी तरह की चूक पर उचित कार्रवाई की जाएगी. इसमें बोर्ड के एफलिएशन नियमों के प्रावधानों के तहत स्कूल की मान्यता वापस लेना शामिल है.


स्कूलों से कहा गया है कि लोगों, कर्मचारियों, अभिभावकों और छात्रों की शिकायतों के समाधान के लिए अलग समितियां गठित की जाएं. इसके साथ ही यौन उत्पीड़न पर एक आतंरिक शिकायत समिति और पोक्सो कानून, 2012 के तहत समितियां हों.

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