केंद्र सरकार ने की सोशल नेटवर्किंग साइटों पर बंदिशें लगाने का हक देने की मांग

By: | Last Updated: Thursday, 26 February 2015 3:01 AM

नई दिल्ली: केंद्र ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि साइबर जगत में किसी विनियामक तंत्र के अभाव के कारण उच्चतर स्तर की बंदिशों की जरूरत है ताकि सोशल नेटवर्किंग साइटों पर नियंत्रण एवं संतुलन स्थापित किया जा सके.

 

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायमूर्ति जे चेलमेश्वर और न्यायमूर्ति रोहिंटन फली नरीमन की पीठ को बताया, ‘‘अखबार, टेलीविजन या सिनेमा जैसे दूसरे मीडिया में संस्थाएं काम कर रही हैं. यहां एक संस्थागत रूख है और टीवी एवं फिल्मों के लिए प्री-सेंसरशिप जैसे नियंत्रण के उपाय हैं. लेकिन इंटरनेट में व्यक्तिगत तौर पर सारी चीजें होती हैं और कोई नियंत्रण-संतुलन या लाइसेंस नहीं है .’’

 

मेहता ने कहा कि इंटरनेट का नियमन तो संभव नहीं है लेकिन विधायिका को इंटरनेट माध्यम, जिसमें व्यक्ति ही ‘‘बॉस’’ है, पर संस्थागत नियंत्रण के अभाव में नियम बनाने की आजादी दी जानी चाहिए.

 

उन्होंने कहा, ‘‘इस माध्यम की पहुंच एवं इसके प्रभाव को देखते हुए विधायिका को नियम बनाने की आजादी दी जानी चाहिए. इंटरनेट पर एक व्यक्ति ही निर्देशक, निर्माता एवं प्रसारक होता है और एक शख्स बस एक बटन क्लिक करके चंद सेकंड में लाखों लोगों तक आक्रामक सामग्री का प्रसार कर सकता है.’’

 

सूचना प्रौद्योगिकी कानून के कई प्रावधानों की संवैधानिक मान्यता को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की तरफ से ये बातें कही गई.

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Web Title: center_demands_socialwebsite_restructions
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