13 महिलाओं की मौत की सरकार है जिम्मेदार?

By: | Last Updated: Monday, 17 November 2014 1:43 PM
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नई दिल्ली : छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में जिस दवा कंपनी की दवा को जानलेवा माना जा रहा है आरोप है कि उस कंपनी पर सरकार की खूब कृपा रही है. बीजेपी सांसद ने खुद माना है कि दवा कंपनी का आरोपी बीजेपी का सदस्य है. इतना ही नहीं जिस दवा कंपनी की दवा से मौत हुई है उस कंपनी को दो साल पहले ब्लैकलिस्ट में डाल दिया गया था. उसके बाद सरकार ने उसे सम्मानित किया. क्या 13 महिलाओं की मौत की सरकार है जिम्मेदार?

 

बिलासपुर के नसबंदी ऑपरेशन में 13 महिलाओं की मौत का जिम्मेदार भले महावर फार्मा को माना जा रहा है. लेकिन इस भयानक त्रासदी की जिम्मेदार कहीं न नहीं छत्तीसगढ़ सरकार भी है. महिलाओं की मौत के लिए जिस फार्मा कंपनी मेसर्स महावर फार्मा प्राइवेट लिमिटेड की दवा को जिम्‍मेदार बताया जा रहा है, सरकार उसे दो साल पहले ही ब्‍लैकलिस्‍ट कर चुकी थी. इसके बावजूद इस कंपनी से सरकारी अस्‍पतालों के लिए दवा खरीदी गई.

 

एबीपी न्यूज को पता चला है कि 21 मार्च, 2012 को विधानसभा में स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री अमर अग्रवाल ने मेसर्स महावर फार्मा प्राइवेट लिमिटेड को डुप्लिकेट दवा बेचने का दोषी ठहराया था. इस मामले में कंपनी के खिलाफ मामला भी दर्ज किया गया था. पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, बाद में समय-समय पर सरकार ने दवा कंपनी के सात दवाओं की बिक्री पर पाबंदी लगा दी. हैरान करने वाली बात ये है कि जिस सरकार ने 2012 में महावर फार्मा की दवा को ब्लैकलिस्ट कर दिया था उसी सरकार के कंट्रोलर ऑफ फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन ने इस साल मई में उसे good manufacturing practice certificate देकर सम्मानित किया.

 

इस दवा कंपनी के 2011 में 13 सैंपल अमानक पाये गए थे तब इस कंपनी के लाइसेंस आठ बार रद्द किया गया था मगर कुछ दिनों के लिए ही बाद मे सरकार ने कंपनी को 2013 और 2014 में गुड मेनीफेचार प्रैक्टिस के लिए सम्मानित भी किया था. बीजेपी के नेताओं की कंपनी पर हमेशा कृपा रही है.  इस कंपनी के मालिक बीजेपी से जुड़े हैं. 

 

सवाल उठता है कि जिस दवा की खरीद पर प्रतिबंध लगा दिया गया था फिर उस दवा को बनाने वाली कंपनी को सम्मानित कैसे किया गया. दवा जब प्रतिबंधित थी फिर उसे सरकार का स्वास्थ्य विभाग किसकी इजाजत से खरीदने का फैसला लिया.

 

हालांकि, अब खुद अमर अग्रवाल का कहना है कि फार्मा कंपनी से दवाएं सरकार ने नहीं खरीदी. दवा खरीदने का फैसला स्‍थानीय स्‍तर पर यानी बिलासपुर के चीफ मेडिकल अफसर ने लिया. कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि रायपुर के बीजेपी सांसद रमेश बैस इस कंपनी के मालिक राजेश महावर के करीबी हैं और उनका चुनाव प्रचार का जिम्मा भी महावर ही संभालता था पर रमेश बैस इस आरोप से इंकार करते हैं. हालांकि बैस मानते हैं कि महावर पार्टी का सदस्य जरूर है. 

 

आरोप है कि महावर फार्मा की जिस दवा के चलते महिलाओं की मौत हुई. उसमें जिंक फॉस्फाइड मिला था जिसका इस्तेमाल चूहों को मारने के लिए होता है. इस मामले में पुलिस ने दवा कंपनी के मालिक रमेश महावर और उसके बेटे को गिरफ्तार कर लिया है पर दोनों पर मामूली धाराएं लगाई गई हैं. पुलिस का दावा है की जांच रिपोर्ट आने के बाद अपराध की धाराएं बढ़ायी जा सकती हैं. 

 

रायपुर के रिहायसी इलाके मे चल रही इस दवा कंपनी का परिसर दिल्ली से आया जांच दल खंगाल रहा है, बताया जा रहा है कि जब पुलिस फैक्ट्री पर छापा मारने आयी थी तो अंदर से बहुत सारे केमिकल को जला दिया गया था. फिलहाल इंतजार कोलकाता की सेन्ट्रल लैब से आने वाली रिपोर्ट का है जहां सिप्रोसीन दवा के सैंपल भेजे गए थे. हालांकि सरकार ने दवा कंपनी को इनाम देने वाले डिप्टी ड्रग कंट्रोलर हेमंत श्रीवास्तव को निलंबित कर इतिश्री कर दी है मगर सरकार में बैठे स्वास्थ्य मंत्री की कोई जिम्मेदारी और जबावदेही नहीं मानी है.

 

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