मध्यप्रदेश: लड़कियों के मुकाबले यहां ज्यादा होता है लड़कों का बाल विवाह

By: | Last Updated: Sunday, 19 April 2015 2:33 PM
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फ़ाइल

इंदौर: रूढ़िवादी सोच और जागरूकता में कमी के कारण मध्यप्रदेश में लड़कियों की तुलना में लड़कों के बाल विवाह का रझान ज्यादा पाया गया है. इससे सतर्क प्रदेश सरकार ने पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिये हैं कि वे लड़कियों के साथ लड़कों के बाल विवाह रोकने के लिये समान प्रयास करें.

 

प्रदेश के महिला सशक्तिकरण विभाग की आयुक्त कल्पना श्रीवास्तव ने सभी जिलाधिकारियों और अन्य आला अफसरों को जारी निर्देशों में वर्ष 2012.13 के वाषिर्क स्वास्थ्य सर्वेक्षण के हवाले से कहा है कि राज्य में लड़कियों के मुकाबले लड़कों के बाल विवाह का प्रतिशत ज्यादा है. ऐसे में ‘लाडो अभियान’ के तहत लड़कों और लड़कियों, दोनों के बाल विवाह रोकने के लिये समान प्रयास किये जाने की जरूरत है.

 

इन निर्देशों में यह भी कहा गया है कि प्रदेश में 21 अप्रैल को अक्षय तृतीया के अवसर पर सामूहिक विवाह के कई आयोजन होने हैं. ऐसे आयोजनों में बाल विवाह की आशंका रहती है. लिहाजा, निगरानी बढ़ाकर बाल विवाह रोकने के लिये सघन अभियान चलाया जाये.

 

वर्ष 2012.13 के वाषिर्क स्वास्थ्य सर्वेक्षण के मुताबिक प्रदेश में 10.6 प्रतिशत लड़कियां ‘बालिका वधू’ बनीं यानी 18 वर्ष से कम उम्र में ही उनके हाथ पीले कर दिये गये, जबकि 21.3 फीसद लड़कों को 21 साल की तय कानूनी उम्र से पहले ही दूल्हा बनाकर उन पर घर.गृहस्थी का बोझ डाल दिया गया. वाषिर्क स्वास्थ्य सर्वेक्षण के ये चौंकाने वाले आंकड़े सूबे में वर्ष 2009 से 2011 के बीच हुई शादियों पर आधारित हैं.

 

इन आंकड़ों के बारे में पूछे जाने पर महिला और बाल विकास विभाग की परियोजना अधिकारी चित्रा यादव ने आज  कहा, ‘लड़कियों की तुलना में लड़कों के बाल विवाह ज्यादा होने का रझान दर्शाता है कि समाज में तमाम आधुनिक बदलावों के बावजूद रूढ़िवादिता बरकरार है और लोगों में बाल विवाह को लेकर जागरूकता का अभाव है.’

 

बाल विवाह रोकने के लिये मुख्यमंत्री से सम्मानित वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘हमने 16 अप्रैल को इंदौर में 19 वर्षीय लड़के का बाल विवाह रूकवाया था. इससे पता चलता है कि बड़े शहरों में भी बाल विवाह की कुप्रथा कायम है और लोगों को इसके खिलाफ जागरूक किये जाने की जरूरत है.’

 

देश में 21 वर्ष से कम उम्र के लड़के और 18 साल से कम आयु की लड़की की शादी बाल विवाह की श्रेणी में आती है, जो कानूनन अपराध है. ‘बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006’ के तहत दोषी को दो वर्ष तक के सश्रम कारावास अथवा एक लाख रुपये तक के जुर्माने या दोनों सजाओं का प्रावधान है.

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