चीन ने पाकिस्तान को पक्का और पुराना दोस्त बताया

By: | Last Updated: Tuesday, 27 January 2015 2:06 AM
china calls pakistan an all weather friend

क्लॉकवाइज- अमेरिका राष्ट्रपित ओबामा, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

बीजिंग: गणतंत्र दिवस पर जहां एक तरफ राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बधाई संदेश में कहा गया कि चीन, भारत के साथ आपसी संबंध मजबूत करने की इच्छा रखता है वहीं दूसरी तरफ ओबामा की भारत यात्रा के पर चीन ने पाकिस्तान को पक्का और पुराना दोस्त (ऑल वेदर फ्रेंड) कहा है.

 

इधर ओबामा तीन दिवसीय भारत दौरे पर हैं तो उधर पाकिस्तानी सेना प्रमुख राहिल शरीफ दो दिवसीय चीन दौरे पर हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा के भारत दौर पर चीन की सरकारी मीडिया ने जमकर टिप्पणी की.

 

‘नई दिल्ली को बीजिंग की जरूरत’

 

भारत-चीन संबंधों में बढ़ती गर्माहट देखते हुए चीन ने सोमवार को कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की भारत यात्रा का द्विपक्षीय संबंधों पर मामूली असर पड़ेगा. चीन ने जोर देकर कहा कि नई दिल्ली को एक ‘अहम’’साझेदार के तौर पर बीजिंग की जरूरत है.

 

ओबामा की भारत यात्रा पर अपनी दूसरी टिप्पणी में ‘शिन्हुआ’ न्यूज़ एजेंसी ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति गणतंत्र दिवस परेड में शिकरत करने वाले सबसे अधिक हाई-प्रोफाइल मेहमानों में से एक हैं लेकिन इस बार ‘उनकी मौजूदगी से चीन-भारत के मजबूत संबंधों पर असर पड़ने की कोई आशंका नहीं है.’

 

कड़े शब्दों में की गई टिप्प्णी में चीन की सरकारी न्यूज़ एजेंसी ने कहा, ‘‘ओबामा की मौजूदा भारत यात्रा अमेरिका-भारत संबंधों को आगे बढ़ाने में मददगार साबित हो सकती हे, लेकिन इससे यह जमीनी हकीकत शायद ही बदलेगी कि भारत को भी एक अहम सहयोग साझेदार की जरूरत है.’’

 

‘भारत-चीन को जाल में नहीं फंसना चाहिए’

 

चीन के सरकारी अख़बार ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने आज कहा कि अमेरिका की ‘एशिया की धुरी’ रणनीति मुख्यत: चीन के उभार को थामने के लिए तैयार की गई है और उसका समर्थन कर भारत और चीन को प्रतिस्पर्धा के जाल में नहीं फंसना चाहिए. अख़बार की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा मुख्य अतिथि के रूप में दिल्ली में गणतंत्र दिवस परेड में शामिल हुए हैं.

 

चीन के सरकारी अख़बार ने अपनी टिप्पणी में कहा, ‘‘पश्चिमी मीडिया की अनेक रिपोर्टों में इशारा किया गया है कि ऐतिहासिक जटिलताओं से अलग अमेरिका, भारत को साझेदार के रूप में, यहां तक कि सहयोगी के रूप में वाशिंगटन की ‘एशिया की धुरी’ रणनीति की हिमायत करने के लिए लुभाने के मकसद से ज्यादा प्रयास कर रहा है, जो मुख्यत: चीन के उभार को थामने के लिए तैयार की गई है.’’

 

 

 

टिप्पणी में कहा गया है कि भारत की ‘प्रमुख शक्ति बनने की आकांक्षा’ है और उसे अमेरिकी निवेश, प्रौद्योगिकी और राजनीतिक समर्थन की जरूरत है ताकि उसकी ‘लुक ईस्ट’ विदेश नीति ‘चीन के बढ़ते प्रभाव को प्रति-संतुलित’ करने में बेहतर ढंग से काम करेगी.

 

चीनी अख़बार ने कहा कि ‘‘पश्चिम ने एक निश्चित तरीके का चिंतन पैदा किया और उसे बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया जा रहा है जो निहित स्वार्थ से चीनी ड्रैगन और भारतीय हाथी को स्वाभाविक विरोधी मानता है.’’

 

टिप्पणी में कहा गया है, ‘‘पश्चिम के मजबूत प्रचार अभियान के तहत यह सिद्धांत भारतीय और चीनी दोनों जनमत में उपरी तौर पर एक वास्तविक घटना बन गई है, हालांकि यह चीन से ज्यादा भारत में लोकप्रिय है.’’

 

चीन-भारत के रिश्ते जीने-मरने का रूप नहीं ले सकते

 

दैनिक ने आगाह किया कि पश्चिम ‘भारत को अपने बड़े पड़ोसी की तरफ से पेश खतरों के लिए पूरी तरह तैयार होने के लिए उकसा रहा है और जाल बिछाने की कोशिश की जा रही है.’ टिप्पणी में हिदायत की गई है कि चीन और भारत विशिष्ट मुद्दों पर बहस रोकें और यह दिमाग में रखें कि उनके रिश्ते जीने-मरने का रूप नहीं ले सकते.

 

लेख में कहा गया है कि भारत और चीन के बीच के साझा हित उनके बीच के विवादों से बहुत बड़े हैं. टिप्पणी में कहा गया है, ‘‘चूंकि दोनों उभरती ताकतें हैं, जिनमें अंतरराष्ट्रीय समुदाय में अहम ताकतें बनने की विशाल क्षमता है, चीन और भारत को होड़ की बजाय सहयोग में ज्यादा संभावनाएं देखनी चाहिए. यह सहमति द्विपक्षीय रिश्तों के लिए बुनियादी है.’’ टिप्पणी में कहा गया है, ‘‘चीन और भारत ‘हम जीते, तुम हारे’ (जीरो-सम गेम) नहीं चाहते, लेकिन पश्चिमी प्रभाव में भारत उधर फिसल रहा है.’’

 

सरकारी दैनिक ने कहा कि हालांकि कुछ विशेष मुद्दों पर दोनों पक्षों में अब भी असहमति है, चीन और भारत दोनों को संपर्क के सबसे बुनियादी और अहम मुद्दे पर सहमत होना चाहिए और सुनिचित करना चाहिए कि वृहद परिप्रेक्ष्य बना रहे.

 

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