कोयला घोटाला मामला: अदालत ने सुनवाई के लिए 15 जुलाई की तारीख तय की

By: | Last Updated: Wednesday, 8 April 2015 7:33 AM
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नई दिल्ली: कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला और अन्य के खिलाफ जारी सम्मन पर उच्चतम न्यायालय की ओर से एक अप्रैल को लगी रोक के मद्देनजर एक विशेष अदालत ने इस मामले की सुनवाई के लिए आज 15 जुलाई की तारीख तय की.

 

सिंह और अन्य के खिलाफ 11 मार्च को आरोपी के तौर पर आज के लिए समन जारी करने वाले सीबीआई के विशेष न्यायाधीश भरत पराशर ने कहा कि उनके आदेश के अनुपालन पर उच्चतम न्यायालय ने रोक लगा दी है.

 

उन्होंने कहा, ‘‘ उच्चतम न्यायालय के दिनांक एक अप्रैल 2015 के आदेश के तहत दिनांक 16 दिसंबर 2014 और 11 मार्च 2015 को दिए गए आदेशों के अनुपालन पर रोक लगा दी गई है. इस अनुरूप मामले पर अब 15 जुलाई को सुनवाई होगी.’’

 

विशेष अदालत ने मामले में दायर सीबीआई की बंदी रिपोर्ट को पिछले साल 16 दिसंबर को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था और उसे मामले की और जांच करने एवं मनमोहन सिंह एवं प्रधानमंत्री कार्यालय के अन्य अधिकारियों से पूछताछ करने का निर्देश दिया था.

 

इसके बाद सीबीआई ने अदालत में अपनी अनुपूरक अंतिम रिपोर्ट दायर की थी. सिंह, बिड़ला, पूर्व कोयला सचिव पी सी पारख, हिंडाल्को इंडस्ट्रीज लिमिटेड और दो शीर्ष अधिकारियों शुभेंदु अमिताभ और डी भट्टाचार्य को 11 मार्च को समन जारी किया गया था.

 

आमदनी बढ़ा चढ़ाकर दिखाने, खाता में हेरफर, फर्जी सावधि जमा के साथ ही विभिन्न आयकर कानूनों का उल्लंघन करने के सिलसिले में राजू और अन्य पर आईपीसी की संबंधित धाराओं के तहत गलत रिटर्न भरने, फर्जीवाड़ा, आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और विश्वासघात का मामला दर्ज किया गया था.

 

फरवरी 2009 में सीबीआई ने जांच का जिम्मा संभाला और तीन आरोप पत्र :7 अप्रैल 2009, 24 नवंबर 2009 और 7 जनवरी 2010: दाखिल किया जिसे बाद में एक साथ मिला दिया गया.

 

पहले दो आरोपपत्रों में नौ अन्य लोगों के साथ मिलकर राजू द्वारा खाता में हेराफेरी करने का मामला है. जबकि, तीसरा आरोपपत्र विभिन्न आयकर कानूनों के ‘‘उल्लंघन’’ से संबंधित है.

 

सीबीआई ने पहले और तीसरे आरोपपत्र में राजू और अन्य को बढ़ा चढ़ा कर बतायी गयी आमदनी के जरिए भरोसा तोड़ने, धोखाधड़ी करने का आरोपी ठहराया. दूसरा आरोपपत्र आईटी कानूनों का उल्लंघन कर कथित तौर पर जाली रिटर्न से संबंधित है.

 

मुकदमे के दौरान, सीबीआई ने आरोप लगाया कि घोटाले की वजह से निवेशकों को 14,000 करोड़ रूपये का नुकसान हुआ जबकि बचाव पक्ष ने आरोपों के जवाब में कहा कि जालसाजी के लिए आरोपी जिम्मेदार नहीं हैं और केंद्रीय एजेंसी की ओर से मामले से संबंधित दाखिल सभी दस्तावेज मनगढंत हैं और कानून के मुताबिक नहीं है.

 

प्रवर्तन निदेशालय ने भी धन शोधन रोकथाम कानून के तहत उनके खिलाफ एक आरोप पत्र दाखिल किया था.

 

पिछले साल जनवरी में आयकर अदायगी मामले में आर्थिक अपराध के लिए एक विशेष अदालत ने रामलिंगा राजू की पत्नी नंदिनी राजू और बेटों तेजा राजू और रामा राजू समेत पूर्व सत्यम प्रमुख के 21 रिश्तेदारों को दोषी ठहराया था.

 

पिछले साल आठ दिसंबर को कंपनी कानूनों के विभिन्न प्रावधानों के उल्लंघन के सिलसिले में गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय :एसएफआईओ: की ओर से दर्ज करायी गयी शिकायतों के मामले में आर्थिक अपराध से संबंधित एक विशेष अदालत ने रामलिंगा राजू, रामा राजू, वदलामणि श्रीनिवास और पूर्व निदेशक राम म्यानामपति को छह महीने जेल की सजा सुनायी और जुर्माना लगाया.

 

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