अदालत ने सीबीआई से पूछा, क्यों नहीं हुई मनमोहन सिंह से पूछताछ

By: | Last Updated: Tuesday, 25 November 2014 7:47 AM
Coal-Gate: Court Asks Why Former PM Wasn’t Examined

नई दिल्ली: दिल्ली की एक विशेष अदालत ने आज सीबीआई से पूछा कि कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले के मामले की जांच के दौरान क्या उसने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से पूछताछ की थी जिनके पास उस वक्त कोयला मंत्रालय का प्रभार था? इस मामले में शीर्ष उद्योगपति के एम बिड़ला, पूर्व कोयला सचिव पी सी पारेख समेत कई अन्य लोगों के नाम हैं.

 

विशेष सीबीआई न्यायाधीश भरत पराशर ने सीबीआई से पूछा, “क्या आपको नहीं लगता कि इस मामले में तत्कालीन कोयला मंत्री से पूछताछ जरूरी थी? क्या आपको उनसे पूछताछ की जरूरत महसूस नहीं होती? क्या आपको नहीं लगता कि एक स्पष्ट तस्वीर पेश करने के लिए उनका बयान जरूरी था?”

 

इसपर जवाब देते हुए जांचकर्ता अधिकारी ने अदालत को बताया कि प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के अधिकारियों से जांच के दौरान पूछताछ की गई थी और यह पाया गया था कि तत्कालीन कोयला मंत्री का बयान जरूरी नहीं था.

 

बहरहाल, उन्होंने यह बात स्पष्ट की कि तत्कालीन कोयला मंत्री से पूछताछ की अनुमति नहीं दी गई थी.

 

वर्ष 2005 में जब बिड़ला की कंपनी हिंडाल्को को ओडिशा के तालाबीरा द्वितीय और तृतीय में कोयला ब्लॉक आवंटित किए गए थे, तब कोयला मंत्रालय का प्रभार पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के पास था.

 

जांचकर्ता अधिकारी ने कहा, “पीएमओ के अधिकारियों से पूछताछ की गई थी. पीएमओ के अधिकारियों के बयान की रोशनी में तत्कालीन कोयला मंत्री कोयला मंत्री से पूछताछ नहीं की गई.”

 

उन्होंने यह भी कहा, “तत्कालीन कोयला मंत्री से पूछताछ की अनुमति नहीं दी गई थी. यह पाया गया था कि उनका बयान जरूरी नहीं है.”

 

सुनवाई के दौरान अदालत ने सीबीआई को अदालत के समक्ष केस डायरी जमा करवाने के निर्देश दिए. इसके बाद वरिष्ठ सरकारी वकील वी के शर्मा ने कहा कि एजेंसी को ये दस्तावेज सीलबंद कवर में जमा करवाने की अनुमति दी जाए.

 

न्यायाधीश ने आगे की कार्यवाही के लिए 27 नवंबर का दिन तय करते हुए कहा, “मेरा मानना है कि इस मामले की केस डायरी फाइलें और आपराधिक फाइलें अदालत के समक्ष पेश करवाने के लिए मंगवाई जाएं और वरिष्ठ सरकारी वकील के अनुरोध के अनुसार, इसे सीलबंद कवर में पेश करने दिया जाना चाहिए.”

 

इससे पहले 10 नवंबर को सीबीआई ने अदालत को बताया था कि इस मामले में कुछ निजी पक्षों और जनसेवकों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए ‘प्रथम दृष्टया पर्याप्त सामग्री’ है.

 

उच्चतम न्यायालय द्वारा सीबीआई के लिए नियुक्त किए गए विशेष सरकारी वकील आर एस चीमा ने न्यायाधीश के समक्ष कहा था कि अदालत क्लोजर रिपोर्ट में दिए अपराधों पर संज्ञान ले सकती है क्योंकि प्रथम दृष्टया “आरोपियों की संलिप्तता दर्शाने वाले साक्ष्य हैं.”

 

आरोपियों के अभियोजन पर सीबीआई का यह रूख 12 सितंबर को अदालत द्वारा पूछे गए उस सवाल के बाद आया है, जिसमें एजेंसी से पूछा गया था कि उसे उस मामले को बंद करने की इतनी जल्दी क्या है, जिसमें बिड़ला, पारेख और अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज है۔ गत 21 अक्तूबर को एजेंसी ने केस की एक संशोधित अंतिम क्लोजर रिपोर्ट दायर की थी۔

 

सीबीआई द्वारा बिड़ला, पारेख और अन्य के खिलाफ प्राथमिकी पिछले साल अक्तूबर में दर्ज की गई थी۔ इसने आरोप लगाया था कि पारेख ने “किसी वैध आधार या परिस्थितियों में बदलाव के बिना” कुछ माह के भीतर ही हिंडाल्को को कोयला ब्लॉक आवंटन न करने के अपने फैसले को पलट दिया था और “अनुचित ढंग से फायदा” पहुंचाया۔

 

यह प्राथमिकी वर्ष 2005 में ओडिशा के तालाबीरा द्वितीय और तृतीय के कोयला ब्लॉकों के आवंटन से जुड़ी है۔

 

सीबीआई ने बिड़ला, पारेख और हिंडाल्को के अन्य अधिकारियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था और इसमें सरकारी अधिकारियों के आपराधिक षडयंत्र और आपराधिक कदाचार भी शामिल था۔

 

अपनी प्राथमिकी में एजेंसी ने आरोप लगाया था कि पारेख की अध्यक्षता में हुई स्क्रीनिंग कमेटी की 25वीं बैठक में तालाबीरा द्वितीय एवं तृतीय में खनन के लिए भेजे गए हिंडाल्को और इंडाल इंडस्ट्रीज़ के आवेदन ‘वैध कारणों का हवाला देते हुए’ रद्द कर दिए गए थे۔

India News से जुड़े हर समाचार के लिए हमे फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर फॉलो करें साथ ही हमारा Hindi News App डाउनलोड करें
Web Title: Coal-Gate: Court Asks Why Former PM Wasn’t Examined
Explore Hindi News from politics, Bollywood, sports, education, trending, crime, business, साथ ही साथ और भी दिलचस्प हिंदी समाचार
और जाने: coal gate manmohan singh
First Published:

Get the Latest Coupons and Promo codes for 2017