कॉलेजियम व्यवस्था को भंग नहीं किया जाए: चीफ जस्टिस

By: | Last Updated: Tuesday, 12 August 2014 6:05 AM
collegium system should be continued says Chief Justice RM Lodha

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस न्यायमूर्ति आर.एम.लोढ़ा ने न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए कॉलेजियम प्रणाली को महत्वहीन बताने के अभियान पर नाराजगी जताते हुए कहा कि इससे राज्य के एक महत्वपूर्ण अंग को क्षति पहुंचेगी.

 

एक याचिका पर सुनवाई के दौरान न्यामूर्ति कुरियन जोसफ और न्यायमूर्ति रोहिंटन फली नरिमन की सदस्यता वाली पीठ के प्रमुख के रूप में चीफ जस्टिस लोढ़ा ने कहा, “यह न्यायपालिका के खिलाफ प्रचार अभियान है…इससे न्यायपालिका की गरिमा कम होगी और राज्य के एक महत्वपूर्ण हिस्से को क्षति पहुंचेगी.”

 

उन्होंने कहा, “हम ढेर सारी समस्याओं का सामना कर रहे हैं. कोई भी प्रणाली पूर्ण नहीं है. कोई भी पूर्ण नहीं है. समाज भी पूर्ण नहीं है. सभी समाज से ही आते हैं.” आलोचकों को चेताते हुए उन्होंने कहा, “लोगों का न्यायपालिका में भरोसा मत उठाइए.”

 

कॉलेजियम प्रणाली को बदलने के लिए और दूसरा न्यायपालिका में सुधार के लिए सरकार ने सोमवार को लोकसभा में दो बिल पेश किया. कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग बिल 2014 और संविधान में एक सौ इक्कीसवां संशोधन विधेयक पेश किया.

 

चीफ जस्टिस लोढ़ा ने चारो ओर हो रही इस चर्चा पर कि कॉलेजियम प्रणाली ने ठीक से काम नहीं किया पर नाखुशी जाहिर की है. न्यायमूर्ति लोढ़ा ने कॉलेजियम का बचाव करते हुए कहा कि वह उन प्रथम न्यायाधीशों में शामिल हैं, जिनकी नियुक्ति कॉलेजियम व्यवस्था के तहत हुई.

 

मौजूदा समय में सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के सभी न्यायाधीशों की नियुक्ति भी कॉलेजियम व्यवस्था के तहत ही हुई है. उन्होंने कहा कि अगर कॉलेजियम व्यवस्था विफल हुई है, तो सभी न्यायाधीश और पूरी व्यवस्था विफल हुई है.

 

उन्होंने कहा, “भगवान के लिए एक अदृश्य तथ्य पर याचिका मत दायर कीजिए.” यह पूरा मामला इस धारणा पर आधारित है कि कर्नाटक हाई कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति के. एल. मंजुनाथ को कॉलेजियम ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में सिफारिश की थी.

 

मीडिया में आई एक गलत ख़बर की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि इससे मीडिया की विश्वसनीयता की झलक मिलती है. मीडिया की ख़बरों में कहा गया है कि न्यायमूर्ति मंजुनाथ पर अपनी सिफारिश को लेकर शीर्ष अदालत फंस गया है.

 

उधर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश ए.के. गांगुली ने सोमवार को कहा कि यह प्रणाली दोषपूर्ण है. न्यायमूर्ति गांगुली ने कहा, “कॉलेजियम के जरिए न्यायाधीशों की नियुक्ति की मौजूदा प्रणाली ठीक से काम नहीं कर रही है. इसने कई विवादों को जन्म दिया है और हमेशा सर्वश्रेष्ठ उम्मीदवारों का चयन नहीं होता.”

 

न्यायमूर्ति गांगुली की टिप्पणी हालांकि सोमवार को ऐसे समय में आई है, जब देश के चीफ जस्टिस आर.एम. लोढ़ा ने न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए कॉलेजियम प्रणाली का बचाव किया है.

 

गांगुली ने यह भी कहा कि न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए आयोग का गठन भी संविधान के द्वारा निर्धारित होना चाहिए, न कि संसदीय कानून के द्वारा. गांगुली ने कहा, “न्यायिक नियुक्ति आयोग में प्रतिष्ठित लोगों को रखा जाना चाहिए जो बिल्कुल निडर हों, जिनकी ईमानदारी जगजाहिर हो, और जिन्होंने सार्वजनिक जीवन में या सार्वजनिक पद पर रहते हुए ईमानदारी के साथ कभी समझौता न किया हो.”

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Web Title: collegium system should be continued says Chief Justice RM Lodha
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