आय से ज्यादा संपत्ति केस में जयललिता हाईकोर्ट से बरी, फिर बनेगी तमिलनाडु की सीएम

By: | Last Updated: Monday, 11 May 2015 7:22 AM
Comeback queen Jaya reigns supreme after acquittal

बेंगलूरू: कर्नाटक हाईकोर्ट ने आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक की संपत्ति के मामले में  तमिलनाडु की पूर्व सीएम जे जयललिता को बरी कर दिया है. हाईकोर्ट ने इसके साथ ही जयललिता की करीबी सहयोगी शशिकला नटराजन और उनके रिश्तेदारों जे एलावरासी और जयललिता के अलग हो चुके दत्तक पुत्र वी एन सुधाकरण को भी बरी कर दिया.

अदालत के इस फैसले के बाद जयललिता के एक बार फिर से तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया है. एबीपी न्यूज़ के संवाददाताओं के मुताबिक जयललिता 17 मई को फिर से सीएम पद की शपथ ले सकती हैं.

 

आपको बता दें कि निचली अदालत से चार साल की सजा मिलने के बाद जयललिता को सीएम की कुर्सी छोड़नी पड़ी थी. सजा मिलने के बाद जयललिता के चुनाव लड़ने पर भी रोक लग गई थी लेकिन, हाई कोर्ट के फैसले के बाद जयललिता की राजनीतिक वापसी मुमकिन हो गई है.

 

जयललिता के लिए पहले भी सीएम की कुर्सी छोड़ने वाले तमिलनाडु के मौजूदा सीएम पनीरसेल्वम को फिर से अम्मा भक्ति दिखाने का मौका मिल गया है.

 

फैसला

 

सोमवार को खचाखच भरी अदालत में न्याययमूर्ति सी आर कुमारस्वामी ने जयललिता के साथ ही अन्नाद्रमुक प्रमुख की करीबी सहयोगी शशिकला नटराजन और उनके रिश्तेदारों जे एलावरासी और जयललिता के अलग हो चुके दत्तक पुत्र वी एन सुधाकरण को भी बरी कर दिया.

 

निचली अदालत की ओर से अपनी दोषसिद्धि को चुनौती देने वाली जयललिता और तीन अन्य की ओर से दायर अपील पर न्यायाधीश ने दिन में 11 बजे अपना फैसला सुनाया.

 

फैसले के बाद सेलिब्रेशन

फैसले के बाद चेन्नई में जयललिता के पायस गार्डन निवास के बाहर पार्टी कार्यकर्ता पटाखे छोड़कर और डांस करते हुए विजयी मुद्रा में जश्न मनाने लगे. जयललिता को बरी किये जाने के बाद पूरे तमिलनाडु में पटाखे छोड़कर और नारियल फोड़कर जश्न मनाया जाने लगा.

 

क्या थी सजा

कर्नाटक हाईकोर्ट का यह फैसला विशेष अदालत के न्यायाधीश जॉन माइकल डी कुन्हा के फैसले के खिलाफ की गयी अपील पर आया है. निचली अदालत ने पिछले साल 27 सितंबर को अन्नाद्रमुक सुप्रीमो और तीन अन्य को भ्रष्टाचार का दोषी पाया था और चार साल जेल की सजा सुनायी थी जिसके कारण वह विधायक के तौर पर अयोग्य हो गयीं थीं. न्यायाधीश ने उनपर 100 करोड़ रूपये का जुर्माना और तीनों अन्य दोषियों पर प्रत्येक पर 10 करोड़ रूपये का जुर्माना भी लगाया था.

 

निचली अदालत के फैसले के बाद जयललिता विधायक के तौर पर स्वत: ही अयोग्य हो गयीं थीं और उन्हें मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ा था.

 

फैसले के मायने

 

तमिलनाडु में विधानसभा चुनावों के ठीक एक साल पहले यह फैसला जयललिता और अन्नाद्रमुक के लिए एक बड़ी राहत के तौर पर आया है. 19 साल पुराने मामले में फैसला आने के बाद जयललिता के वकील और अन्नाद्रमुक समर्थकों के समूह खुशी से झूमने लगे.

 

अदालत और इसके बाहर एक किलोमीटर के दायरे में सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किये गए.

 

जयललिता के वरिष्ठ वकील बी कुमार ने अदालत कक्ष के बाहर संवाददाताओं से कहा, ‘‘तत्कालीन द्रमुक सरकार के द्वारा किया गया मामला अब खारिज हो गया है.’’ उच्चतम न्यायालय द्वारा जयललिता और तीन अन्य की ओर से दायर अपील पर सुनवाई तीन महीने में पूरी करने की तारीख के खत्म होने के ठीक एक दिन पहले यह फैसला आया है.

 

न्यायमूर्ति कुमारास्वामी की एकल न्यायाधीश की पीठ ने जब दंड प्रक्रिया संहिता के तहत अपना फैसला सुनाया तब जयललिता (67) अदालत में मौजूद नहीं थीं. आरोपी को केवल निचली अदालत में सुनवाई के वक्त मौजूद रहना होता है.

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