प्रधानमंत्री के मन में संसद के प्रति बहुत कम सम्मान है, सवालों का सामना करने का साहस नहीं: कांग्रेस

By: | Last Updated: Thursday, 4 December 2014 2:05 AM

नई दिल्ली: संसद के दोनों सदनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गैर मौजूदगी के लिए उन पर निशाना साधते हुए कांग्रेस ने सदन में प्रवेश से पहले उनके मत्था टेकने को ‘ड्रामा’ करार दिया और उनपर संस्था के प्रति बेहद कम सम्मान दिखाने तथा सवालों का सामना करने का साहस नहीं होने का आरोप लगाया.

 

पार्टी प्रवक्ता राजीव गौड़ा ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘संसद नाम की संस्था के प्रति उनका मामूली सम्मान तब दिखता है जब आपको पता चलता है कि प्रधानमंत्री संसद भवन में हैं लेकिन संसद के सत्र चलने दौरान वह सदन की कार्यवाही में हिस्सा नहीं लेने का विकल्प चुनते हैं.’’

 

उन्होंने कहा, ‘‘हम प्रधानमंत्री से अनुरोध करते हैं कि वह बहादुर बनें और संसद के दोनों सदनों में अपने साथी सदस्यों का सामना करने का साहस दिखाएं. हम प्रधानमंत्री से अनुरोध करते हैं कि वह परंपराओं का सम्मान करना सीखें जो दशकों से हमारे लोकतंत्र में मजबूत हुई है.’’ राजग सरकार पर उसके ‘यू टर्न’ के लिए अपना हमला जारी रखते हुए गौड़ा ने दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद के एक ट्वीट का उल्लेख किया.

 

प्रसाद जब भाजपा के मुख्य प्रवक्ता हुआ करते थे तब उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर यह कहते हुए निशाना साधा था कि उन्होंने संसद के सत्र के दौरान विदेश जाकर वषरें से चली आ रही परंपरा का उल्लंघन किया है.  गौड़ा ने इस बात पर भी सवाल खड़े किए कि संसद का जब यहां सत्र चल रहा है है तब मोदी ज्यादातर विदेश दौरे पर क्यों रह रहे हैं.

 

गौड़ा ने कहा, ‘‘इस परंपरा के बारे में सोचें, यह परंपरा सिर्फ हमारी परंपरा नहीं है जिसका प्रधानमंत्री ने उल्लंघन किया है. अनेक अन्य परंपराएं भी हैं. एक और परंपरा है कि प्रधानमंत्री अपने मंत्रियों का सदन में परिचय कराते हैं. मैं राज्यसभा का सदस्य हूं. इस बार अरूण जेटली जो सदन के नेता हैं उन्होंने राज्यसभा में सदस्यों का परिचय कराया.’’

 

उन्होंने कहा, ‘‘जब आप दशकों के बाद बनी इस तरह की परंपरा का उल्लंघन देखते हैं तो हम सब के लिए यह साफ हो जाता है कि इस साल अगस्त में संसद भवन में प्रवेश से पहले उनका मत्था टेकना और कुछ नहीं बल्कि ड्रामों की सीरिज में एक और कड़ी थी.’’

 

उन्होंने आरोप लगाया कि विगत तीन महीनों में प्रधानमंत्री ने भारतीय संसद की तुलना में दूसरे मुल्कों की संसद में अधिक भाषण दिया है. गौड़ा ने आश्चर्य जताते हुए कहा, ‘‘ऐसा इसलिए क्या कि विदेशी संसद में कोई पूरक प्रश्न पूछने वाला नहीं होता.’’

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Web Title: congress said pm dont have faith in parliament
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