बड़ा खुलासा: क्या है यादव सिंह का कपिल देव से कनेक्शन?

By: | Last Updated: Thursday, 11 February 2016 7:27 PM
connection between yadav singh and kapil dev

नई दिल्ली: यूपी के सबसे अमीर विभाग के पूर्व चीफ इंजीनियर यादव सिंह की गिरफ्तारी के बाद एबीपी न्यूज अब तक का सबसे बड़ा खुलासा किया है. सबसे बड़ा खुलासा इसलिए क्योंकि यादव सिंह के साथ जुड़ा टीम इंडिया के पूर्व कप्तान कपिल देव का नाम. यादव सिंह पर करोड़ों की घूस लेकर ठेके बांटने का आरोप है. और खुलासा ये है कि कपिल देव ने यादव सिंह ग्रुप की 32 करोड़ की कंपनी को कौड़ियों के दाम खरीदा. एबीपी न्यूज के पास इस जांच से जुड़े तमाम दस्तावेज मौजूद हैं.

आज से करीब 32 साल पहले कपिल देव की कप्तानी में भारतीय क्रिकेट के इतिहास में सबसे सुनहरा अध्याय जोड़ा गया था. कपिल देव देश का गौरव हैं लेकिन यादव सिंह की गिरफ्तारी के बाद हुए ताजा खुलासे ने हर किसी को हैरान कर दिया है. यादव सिंह के साथ सिर्फ कपिल देव का नहीं बल्कि उनकी पत्नी रोमी देव का नाम भी जुड़ा है.

यादव सिंह पर लगे आरोपों की जांच में सामने आया है कि भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान कपिल देव और उनकी पत्नी रोमी देव को यादव सिंह की सहयोगी कंपनी ने 32 करोड रुपये से ज्यादा कीमत वाली कंपनी 6 करोड रुपए से भी कम कीमत में बेच दी. एबीपी न्यूज के पास मौजूद दस्तावेज दे रहे है कपिल देव के साथ हुई डील की पूरी गवाही.

इस डील को समझने के लिए आपको यादव सिंह के साम्राज्य को समझना होगा. मामले की जांच में आयकर विभाग को पता चला है कि यादव सिंह की काली कमाई का पैसा तीन ग्रुप में लगा हुआ था. पहला ग्रुप है यादव सिंह ग्रुप जिसके मालिक खुद यादव सिंह और उनकी पत्नी कुसुमलता हैं.

दूसरा ग्रुप है मैकॉन्स ग्रुप जिसके मालिक राजेंद्र मिनोचा, राजेश मिनोचा और उनकी पत्नी नम्रता मिनोचा हैं. तीसरा ग्रुप है मीनू क्रिएशंस जिसके मालिक अनिल पेशावरी और मीनाक्षी पेशावरी हैं.

अब हम आपको समझाते हैं कि यादव सिंह इन ग्रुपों से कैसे जुड़े हुए हैं? एबीपी न्यूज के पास मौजूद दस्तावेज के मुताबिक आयकर विभाग ने जब यादव सिंह की रेकी करवाई तो सामने आया है कि यादव सिंह की पत्नी कुसुमलता के मीनू क्रिएशंस और मिनोचा परिवार के साथ व्यवासायिक रिश्ते हैं. और इस ग्रुप को कुसुमलता की मदद से पिछले 6 सालों में नोएडा प्राधिकरण में बड़े पैमाने पर प्लॉट मिले. दस्तावेज कहता है कि ग्रुप को ये प्लॉट इसलिए मिले क्योंकि कुसुमलता के पति यादव सिंह पिछले सात सालों से नोएडा प्राधिकरण में चीफ इंजीनियर की कुर्सी पर बैठे हुए थे.

दस्तावेजों के मुताबिक यादव सिंह ग्रुप ने या तो कंपनियों के नाम या फिर बेनामी नाम यानि जिसके तार यादव सिंह ग्रुप से सीधे ना जुड़े हों उनके जरिए बड़े पैमाने पर संपत्तियां बनाईं. यही नहीं इन संपत्तियों को खरीदने के लिए बोगस कंपनियों के जरिए भी पैसा आया. और तो और यादव सिंह ग्रुप अपने कर्मचारियों को नगद पैसे दे रहा था जिसका कोई लेखा-जोखा नहीं था.

इस पूरे मामले में कपिल देव का नाम कैसे जुड़ा वो समझिए?

कहानी शुरू होती है साल 2008 से जब यादव सिंह के करीबी राजेश मिनोचा और पत्नी नम्रता मिनोचा ने बिजनेसबे कॉरपोरेट पार्क्स प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी खरीदी. इसके बाद इस कंपनी ने नोएडा के सेक्टर 65 में चार करोड साढे चार लाख का एक प्लॉट खरीदा.

चार साल बाद साल 2012 में मिनोचा दंपत्ति ने अपनी कंपनी के शेयर सुपर मैनेजमेंट एड पोर्ट फोलियो और सिस्मका बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम कर दिए गए .

आय़कर विभाग के सामने दिए गए बयान में खुद राजेश मिनोचा ने स्वीकार किया है उसके परिवार के पास कुल दस कंपनियां है और जिन दो कंपनियों के नाम शेयर ट्रांसफर किए गए ये दोनों कंपनियां भी मिनोचा परिवार की ही हैं. कहानी में अगला पेंच ये है कि एक साल बाद यानि 2013 में ये पूरे शेयर वापस राजेश औऱ नम्रता मिनोचा के पास आ गए. और इसके बाद कंपनी में कपिल देव की एंट्री हुई.

लेकिन इस बार मिनोचा दंपति ने ये शेयर चार लोगों के नाम पर ट्रांसफर कर दिए. पहला नाम कपिल देव जिन्हें 1,55,500 शेयर दिए गए. दूसरा नाम कपिल देव की पत्नी रोमीदेव जिन्हें 51,500 शेयर दिए गए. इसके अलावा दीपराज सिंह सेठी को 1,03500 शेयर और देवेन्द्रजीत सिंह सेठी के नाम- 103500 शेयर दिए गए.

दस्तावेजों के मुताबिक कंपनी के सबसे ज्यादा शेयर कपिल देव के पास गए जबकि सबसे कम शेयर उनकी पत्नी रोमी देव के पास गए लेकिन दोनों के शेयर मिला कर कंपनी के आधे शेयर कपिलदेव परिवार के पास थे औऱ आधे सेठी फैमिली के पास दोनों परिवारों ने इसके लिए कुल पांच करोड 79 लाख 60 हजार रुपये की पेमेंट भी की .

आयकर विभाग को जांच के दौरान खुद राजेश मिनोचा ने कहा कि उसके परिवार की कुल दस कंपनियों में से 3 कंपनियां ही काम कर रही हैं जिनमें से एक निर्माण कंपनी और बाकी दो कंपनियां फंड मैनेजमेंट का काम देखती हैं. आय़कर विभाग ने इस मामले में कपिल देव समेत कंपनी के चार शेयरधारकों के खिलाफ जांच के आदेश दिए है.
इस पूरे मामले में चौंकाने वाली बात ये है कि कपिल देव और उनकी पत्नी ने जो शेयर खरीदे उसके लिए वास्तविक कीमत से आधे से भी कम कीमत चुकाई गई. सवाल ये है कि 32 करोड़ की कंपनी 6 करोड़ से भी कम कीमत में यादव सिंह के सहयोगी मिनोचा ने क्यों बेची और कपिल देव ने वो कंपनी इतने सस्ते में कैसे खरीदी? क्या यादव सिंह ग्रुप और कपिल देव के बीच कोई डील हुई थी?

क्या कपिल देव ने यादव सिंह ग्रुप को कोई फायदा पहुंचाया था? या इस डील के पीछे कोई और राज छिपा है. ये सारे सवाल इसलिए क्योंकि 32 करोड़, 47 लाख, 48 हजार की कंपनी का सौदा सिर्फ 5 करोड़ 79 लाख 60 हजार में हुआ. करोड़ों की कंपनी का सौदा औने पौने भाव में कैसे हुआ वो भी जान लीजिए?

यादव सिंह के खिलाफ जांच के दौरान आय़कर विभाग ने पाया कि 31 अगस्त 2013 को मिनोचा की बिजनेसबे कॉरपोरेट कंपनी के जो शेयर कपिल देव समेत चार लोगों को बेचे गए उनकी कीमत 140 रुपये प्रति शेयर के हिसाब से ली गई थी.

140 रुपए प्रति शेयर के हिसाब से कपिल देव ने अपने और अपनी पत्नी रोमी देव के शेयर के लिए मिनोचा दंपति को दो करोड़ 89 लाख चुकाए. जबकि जबकि उस शेयर की वास्तविक कीमत 438 रुपए 70 पैसे थी. अगर कपिल देव कंपनी को 480 रुपए प्रति शेयर के हिसाब से कीमत चुकाते तो उन्हें करीब 16 करोड़ रुपए चुकाने होते. यानि कपिल देव को करीब 13 करोड़ का सीधा फायदा.

ये है वो गड़बड़झाला जिसकी जांच आयकर विभाग कर रहा है. आय़कर विभाग ने अपनी जांच में कहा कि कंपनी की कुल कीमत 32 करोड रुपये से ज्यादा थी औऱ इस हिसाब से एक शेयर की कीमत 140 रुपये की जगह 438 रुपये 70 पैसे थी यानि हर शेयर में 298 रुपये 70 पैसे कम लिए गए.

आय़कर विभाग को शक है कि इस लेनदेन के पीछे कही दो नबंर के पैसे का खेल तो नहीं है. सवाल उठता है कि आखिर कोई शख्स किसी को कम दामो में शेयर क्यों बेचेगा जब तक कि उसे किसी ना किसी रुप में कोई फायदा या मुनाफा ना मिल रहा हो.

आयकर विभाग ने कपिल देव समेत चारों शेयरधारकों के खिलाफ आय़कर विभाग एक्ट की धारा 148 के तहत नोटिस जारी करने को कहा है और साथ ही ये भी कहा है कि इस सेक्शन में अन्य स्त्रोत से आई आय़ की भी जांच की जाए.

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अन्य सोर्सों से अर्जित आय के तहत किसी शख्स को दिया गया गिफ्ट भी आता है लेकिन सवाल यह उठता है कि यादव सिंह ग्रुप कपिल देव औऱ उऩकी पत्नी को किस बात का गिफ्ट दे रहा है और यदि ये गिफ्ट है तो क्या ये गिफ्ट सेठी परिवार को भी दिया गया कानून के मुताबिक गिफ्ट केवल परिवार औऱ खून के रिश्तों के जरिए ही लिया दिया जा सकता है.

इस पूरे मामले में मिनोचा से जब आयकर विभाग ने पूछताछ की तो उसने बताया कि उसने कपिल देव को जो कंपनी बेची है वो प्रीमियम वैल्यू पर बेची थी. हालांकि आयकर विभाग ने मिनोचा की इस बात पर भरोसा नहीं किया है.

कपिल देव का पक्ष
एबीपी न्यूज ने इस मामले में कपिल देव का पक्ष जानने के लिए उन्हें ईमेल भेजा. कपिल देव को भेजे ईमेल में एबीपी न्यूज इस खुलासे से जुड़े तीन सवाल पूछे थे.

पहला सवाल- 32 करोड़ की कंपनी 6 करोड़ से कम में क्यों खरीदी गई?

दूसरा सवाल- क्या आपने यादव सिंह ग्रुप को कोई फायदा पहुंचाया था?

तीसरा सवाल- आयकर विभाग को आपने क्या जवाब दिया?

इसके जवाब में कपिल देव की तरफ से बॉबी सिंह नाम के शख्स ने मुंबई में कपिल देव से बात करने का समय दिया था. मुंबई में कपिल देव ने कैमरे पर तो बात नहीं की लेकिन ऑफ द रिकॉर्ड कहा कि मैं यादव सिंह को नहीं जानता. यादव सिंह से ना मैंने कंपनी खरीदी और ना यादव सिंहको बेची. पैसे देने के अलावा कंपनी के ऊपर बैंक की देनदारी भी मैंने चुकाई. मैं कंपनी से इस्तीफा दे चुका हूं. और अपने और अपनी पत्नी के हिस्से के शेयर भी बेच चुका हूं. ये कंपनी मैंने बैंक से कर्ज लेकर खरीदी थी.

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