सर्विस चार्ज की वसूली रेस्त्रां मालिकों पर पड़ सकता है महंगा

सर्विस चार्ज की वसूली रेस्त्रां मालिकों पर पड़ सकता है महंगा

अब अगर सर्विस चार्ज को टैक्स असेसमेंट में शामिल किया जाता है तो इसका सीधा-सीधा मतलब ये हुआ है कि सर्विस चार्ज से हुई कमाई रेस्त्रां मालिक के कर योग्य आमदनी में जुड़ जाएगी और उसे अतिरिक्त कर (आयकर या फिर निगम कर) चुकाना होगा.

By: | Updated: 12 Sep 2017 10:58 PM
नई दिल्ली: अगर उपभोक्ता मामलात मंत्रालय की बात वित्त मंत्रालय मान लें तो सर्विस चार्ज वसूलने वाले रेस्त्रां मालिकों पर टैक्स का बोझ बढ जाएगा. दूसरी ओर उपभोक्ता मंत्रालय ने एक बार फिर रेस्त्रां मालिकों से कहा है कि सर्विस चार्ज देने या नहीं देने का फैसला ग्राहकों पर छोड़ दें.

उपभोक्ता मामलों के केंद्रीय मंत्रालय ने एक ट्वीट कर बताया है, 'मामले की गंभीरता को देखते हुए उपभोक्‍ता मामले विभाग ने सर्विस चार्ज को टैक्स असेसमेंट में शामिल करने पर विचार करने के लिए CBDT को लिखा है.’ सीबीडीटी यानी केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड आयकर और निगम कर के मामले में नीति तय बनाने वाली सबसे बड़ी संस्था है और ये वित्त मंत्रालय के तहत काम करती है.

अब अगर सर्विस चार्ज को टैक्स असेसमेंट में शामिल किया जाता है तो इसका सीधा-सीधा मतलब ये हुआ है कि सर्विस चार्ज से हुई कमाई रेस्त्रां मालिक के कर योग्य आमदनी में जुड़ जाएगी और उसे अतिरिक्त कर (आयकर या फिर निगम कर) चुकाना होगा. दूसरे शब्दों में कहें तो सर्विस चार्ज की वजह से रेस्त्रां मालिक की कर देनदारी बढ़ जाएगी.

सर्विस चार्ज कोई कर नहीं
आम तोर पर लोग सर्विस चार्ज को जीएसटी (पहले सर्विस टैक्स) का एक हिस्सा मानते हैं. उन्हे लगता है कि ये भी एक तरह का कर है जिससे हुई कमाई सरकारी खजाने में जाता है. लेकिन सच्चाई ये है किसी भी होटल या रेस्त्रां में टिप के बदले सर्विस चार्ज का प्रावधान किया जाता है और इससे हुई कमाई रेस्त्रां मालिक के गल्ले में जाती है. कुल बिल का दस फीसदी तक बतौर सर्विस चार्ज वसूला जाता है. रेस्त्रां मालिक दावा करते हैं कि टिप से सिर्फ किसी एक खास वेटर को फायदा होता है जबकि सर्विस चार्ज से जुटायी गयी रकम रेस्त्रां में काम करने वाले सभी के बीच बराबर से बांट दी जाती है. हालांकि सरकार ने इस दलील को नहीं माना और उसके बाद ही अप्रैल में सर्विस चार्ज जबरदस्ती ना लिए जाने को लेकर दिशानिर्देश जारी कर दिए.

रेस्त्रां मालिकों से फिर से अपील
बहरहाल, उपभोक्ता मामलों के मंत्री ने अपने एक औऱ ट्वीट में कहा, 'होटल/रेस्‍तरां से कहा गया है कि वे बिल में सर्विस चार्ज का कॉलम या तो खाली छोड़ दें या फिर यह उल्‍लेख करें कि सर्विस चार्ज स्‍वैच्छिक है.' उन्होंने ये बताया कि उपभोक्ताओं से सर्विस चार्ज जबरदस्ती वसूल किए जाने की शिकायतें नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन से मिल रही हैं. साथ ही अखबार-टीवी चैनल वगैरह पर प्रकाशित भी किया जाने लगा है. वैसे उन्होंने होटल और रेस्त्रां मालिकों से आगाह किया कि वो बिल में सर्विस चार्ज का कॉलम या तो खाली छोड़ दें या फिर उल्लेख करें कि ये स्वैच्छिक है.

बिल पर दें ध्यान
फिलहाल, यदि आप किसी बड़े रेस्त्रां या होटल में खाना खाने जाते हैं तो बिल पर विशेष ध्यान दें. याद रखें कि यदि रेस्त्रां बगैर एसी (लेकिन जहां शराब नहीं परोसा जाता) का है तो वहां पर जीएसटी की दर 12 फीसदी होगी. ये केंद्र और राज्यों के बीच बराबर में बांटा जाता है, इसीलिए आपके बिल में लिखा होगा सीजीएसटी (सेंट्रल गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स) – 6 फीसदी और एसजीएसटी (स्टेट गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स) – 6 फीसदी. यदि रेस्त्रां एसी वाला है या फिर जहां शराब परोसा जाता है तो वहां जीएसटी की दर 18 फीसदी होगी और आपके बिल में लिखा होगा सीजीएसटी – 9 फीसदी और एसजीएसटी – 9 फीसदी. शराब के ऊपर पहले की तरह वैट लगेगा. इसके अलावा आप पर कोई और टैक्स नहीं लगेगा.

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Web Title: सर्विस चार्ज की वसूली रेस्त्रां मालिकों पर पड़ सकता है महंगा
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