कोर्ट ने ‘कन्यादान’ करने के लिए दी सजायाफ्ता कैदी को जमानत

By: | Last Updated: Wednesday, 3 June 2015 5:39 PM

मुंबई: बंबई उच्च न्यायालय ने एक सजायाफ्ता कैदी को नासिक में अपनी बेटी की शादी में ‘कन्यादान’ की परंपरा निभाने के लिए चार दिन की अस्थायी जमानत दी है.

 

न्यायमूर्ति एसवी भदांग और न्यायमूर्ति एएस गडकरी ने अपने हालिया आदेश में फैसला सुनाया कि नासिक सेंट्रल जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे अशोक खलसे को 15 हजार रूपये का मुचलका भरने तथा इतने की एक या दो जमानत राशि भरने पर पुलिस के पहरे में घर भेजा जा सकता है.

 

जेल से डाक से भेजी अपनी याचिका में खलसे ने नासिक के मालेगांव कैंप में अपनी बेटी की शादी में शामिल होने के लिए छुट्टी देने का अनुरोध किया था. न्याय मित्र रोहिणी डांडेकर ने कैदी की तरफ से अस्थायी जमानत का आग्रह किया.

 

अतिरिक्त लोक अभियोजक अरफान सैत ने अदालत में नासिक के पंचवटी पुलिस थाने की रिपोर्ट पेश की. रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि खलसे की बेटी की शादी इस सप्ताह नासिक में होनी है.

 

अभियोजक ने कहा कि महाराष्ट्र के छुट्टी एवं पैरोल संबंधी नियमों के प्रावधानों को देखते हुए याचिकाकर्ता सजा सुनाए जाने के छह महीनों के भीतर छुट्टी पाने का हकदार नहीं है.

 

उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय दोषसिद्धि के खिलाफ खलसे की अपील पहले ही खारिज कर चुका है और निचली अदालत द्वारा उसे सुनाई गई उम्रकैद की सजा की पुष्टि कर चुका है.

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Web Title: COURT
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