अदालत ने इरोम चानू शर्मिला को जेल से रिहा करने का आदेश दिया

By: | Last Updated: Wednesday, 20 August 2014 5:44 AM

इंफालषा: इंफाल की एक अदालत ने नागरिक अधिकार कार्यकर्ता इरोम चानू शर्मिला को रिहा करने का आज आदेश दिया. शर्मिला आत्महत्या का प्रयास करने के आरोप में हिरासत में हैं. वह तकरीबन 14 वर्ष से मणिपुर से सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून वापस लेने की मांग को लेकर उपवास कर रही हैं.

 

शर्मिला को आत्महत्या के प्रयास के आरोपों से मुक्त करते हुए सत्र न्यायाधीश :इंफाल पूर्व: ए गुणेश्वर शर्मा ने कहा, ‘‘याचिकाकर्ता की अगर किसी और मामले में जरूरत नहीं है तो रिहा किया जाए.’’

 

उन्होंने कहा कि अभियोजन पक्ष आमरण अनशन करके आत्महत्या करने की उनकी मंशा को स्थापित करने में विफल रहा है और आईपीसी की धारा 309 के तहत दंडनीय कथित अपराध को स्थापित करने के लिए सबूतों का अभाव है.

 

अदालत ने कहा कि 42 वर्षीय शर्मिला का आंदोलन राजनैतिक मांग के जरिए वैध कानूनी साधन के माध्यम से एक वैध कानून–सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम 1958 को समाप्त करने के लिए है और पूर्व के उनके आचरण से ऐसा लगता है कि वह तब तक अपना अनशन जारी रख सकती हैं जब तक कि सरकार इसे राजनैतिक रूप से मान नहीं लेती है.

 

न्यायाधीश ने कहा कि इन परिस्थितियों में राज्य सरकार उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए उचित कदम उठा सकती है यथा अगर वह अपना अनशन जारी रखने का फैसला करती हैं तो मामले में नाक के जरिए उन्हें तरल पदार्थ दिया जा सकता है.

 

उन्हें यहां पोरोमपट में सरकारी अस्पताल में रखा जा रहा है जहां एक कमरे को जेल में तब्दील कर दिया गया है. उन्हें नाक के जरिए तरल पदार्थ दिया जा रहा है. शर्मिला को रिहा कर दिया जाता है और हर साल फिर से गिरफ्तार कर लिया जाता है क्योंकि कानून सिर्फ 364 दिन के लिए हिरासत में लेने की अनुमति देता है.

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Web Title: Court orders release of Irom Chanu Sharmila
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