उमर खालिद और अनिर्बान की ज़मानत पर फैसला 18 मार्च को

Court reserves order on bail plea of Umar Khalid, Anirban Bhattacharya

नई दिल्ली: जेएनयू में देशविरोधी नारे लगाने में गिरफ्तार उमर खालिद और अनिर्बान की ज़मानत याचिका पर दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट 18 मार्च को सुनायेगी फैसला. निचली अदालत में हुई सुनवाई के दौरान अनिर्बान के वकील ने दलील देते हुए कहा कि

  • इस मामले में देशद्रोह की धारा बनती ही नहीं है. जबकि पुलिस ने देशद्रोह की धारा 124 ए के तहत मामला दर्ज़ किया है.
  • देशद्रोह की धारा 124 ए तब लगती है जब लोगों को भड़काने का इरादा हो और उसकी वजह से हिंसा हो, लेकिन इस मामले में ऐसा कुछ नहीं हुआ.
  • इतनी भीड़ में किसने नारे लगाए ये नहीं पता पता आरोपी के खिलाफ कोई पुख्ता तथ्य नहीं. अगर मान भी लिया जाए तब भी उसके बाद कोई हिंसा नहीं हुई.
  • अगर प्रोग्राम की अनुमति रद्द कर दी गयी तो वहां पर जुटे लोगों की उपस्थिति को गैर कानूनी भीड़ नहीं कहा जा सकता.
  • जेएनयू प्रशासन की तरफ से दो पक्ष एक ने कहा कि अनुमति मांगी ही नहीं एक ने कहा की अनुमति रद्द की गयी.
  • नारे लगाना सही है या नहीं ये एक का धारणा (ओपिनियन) का विषय है न की कानून का.
  • मुझे मेरी जान का खतरा था, मैंने खुद ही पुलिस के सामने सरेंडर किया.

अनिर्बान के वकील के बाद अदालत में उमर खालिद के वकील ने दलील देते हुए कहा कि इस मामले में सह आरोपी कन्हैया को ज़मानत मिल गयी तो इनको क्यों नहीं.

  • अफज़ल की फांसी को लेकर जो पोस्टर था उसमे जुडिशल किलिंग की बात थी उसमे कुछ भी गलत नहीं था, ये इससे पहले एक जज ने भी कहा था.
  • अगर मेरे अलावा 7 और लोग शामिल थे जिनका नाम पुलिस ने लिया वो कहाँ हैं. वो क्यों खुले घूम रहे हैं और मुझे गिरफ्तार किया.
  • जो आरोप मेरे खिलाफ हैं वही कन्हैया के खिलाफ भी हैं.
  • दिल्ली पुलिस के वकील ने उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य को ज़मानत दिए जाने का विरोध किया. दिल्ली पुलिस के वकील ने दलील देते हुए कहा कि
  • 4 लोगों ने कार्यक्रम की अनुमति मांगी थी. जिसमे अस्वथि, कोमल, अनिर्बान और उमर का नाम भी था.
  • 9 फ़रवरी को जेएनयू कैंपस में हुए प्रोग्राम का आयोजक कन्हैया नहीं था.
  • इनकी ईमेल आईडी से वो पोस्टर भी मिले.
  • अनिर्बान ने पोस्टर डिज़ाइन किया और उमर ने उसको मंजूरी दी.
  • जेएनयू स्टाफ जसप्रीत सिंह ने भी मोबाइल से शूट किया था जिसमे ये लोग नारे लगाते दिख रहे हैं.
  • 10 और गवाह भी है जिनमे गार्ड्स, स्टाफ और छात्र हैं. एक छात्र अखिलेश पाठक का बयान जो किसी से जुड़ा नहीं है MPhil कर रहा है. उसने इनके समेत कई लोगों का नाम लिया है.
  • 124 ए यानी देशद्रोह की धारा लगाने के लिए हिंसा होना ज़रूरी नहीं है अगर आरोपी ऐसी गतिविधि में शामिल है जहाँ हिंसा की कोशिश या आशंका भी हो सकती है तब भी ये धारा बनती है. और इस मामले में ये धारा बनती है.
  • उमर खालिद ने वहां पर स्पीकर भी बुक किया था और पूरा आयोजन किया था.
  • ज़ी टीवी और जसप्रीत की फुटेज को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा है, जिसकी रिपोर्ट आनी बाकी है.
  • इन दोनों ने भीड़ की अगुवाई की थी और ये ही मुख्य आयोजक थे.

अदालत में करीब डेढ़ घंटे तक ज़मानत पर बहस चलती रही जिसके बाद कोर्ट ने फैसला 18 मार्च के लिए सुरक्षित रख लिया. अब 18 मार्च को आने वाले आदेश से साफ़ होगा की क्या उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य को जेल से रिहाई मिलेगी या अभी और दिन जेल में भी गुज़ारने होंगे.

India News से जुड़े हर समाचार के लिए हमे फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर फॉलो करें साथ ही हमारा Hindi News App डाउनलोड करें
Web Title: Court reserves order on bail plea of Umar Khalid, Anirban Bhattacharya
Explore Hindi News from politics, Bollywood, sports, education, trending, crime, business, साथ ही साथ और भी दिलचस्प हिंदी समाचार
First Published:

Get the Latest Coupons and Promo codes for 2017