अदालत सीबीआई निदेशक के खिलाफ आरोपों की सुनवाई संबंधी अपील पर विचार को राजी

By: | Last Updated: Monday, 22 September 2014 9:17 AM

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट सीबीआई निदेशक के आवास पर आगंतुकों की डायरी में दर्ज विवादास्पद प्रविष्ठियों से संबंधित मामले में, व्हिस्लब्लोअर का नाम जाने बिना, जांच एजेंसी के प्रमुख के खिलाफ लगाए गए आरोपों की सुनवाई संबंधी अपील पर विचार करने के लिए आज राजी हो गई. न्यायाधीश एच एल दत्तू की अगुवाई वाली पीठ ने 2 जी मामलों की सुनवाई के लिए नियुक्त विशेष सरकारी अभियोजक (एसपीपी) से सहायता मांगते हुए कहा कि उसके द्वारा पारित किसी भी आदेश का करोड़ों रूपये के घोटालों से संबंधित मामलों पर असर हो सकता है.

पीठ ने गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन की अपील पर भी सुनवाई के लिए सहमति जतायी, जिसने शीर्ष अदालत से अपील की थी कि वह सीलबंद लिफाफे में व्हिस्लब्लोअर के नाम का खुलासा करने संबंधी अपने पूर्व के आदेश को वापस ले.

 

पीठ ने सीबीआई निदेशक के वकील विकास सिंह की इस याचिका को खारिज कर दिया कि एनजीओ द्वारा सीबीआई फाइल नोटिंग और रजिस्टर समेत दस्तावेजों को लीक करने वाले ‘‘भेदिये’’ के नाम का खुलासा करने से इंकार करने के कारण उच्चतम अदालत को मामले की आगे सुनवाई नहीं करनी चाहिए.

 

जब सीबीआई के वकील ने अपील की कि कोई निर्देश जारी करने से पूर्व उनकी बात सुनी जानी चाहिए और कोई आदेश पारित नहीं किया जाना चाहिए तो पीठ ने कहा, ‘‘ नहीं , नहीं. मिस्टर विकास, हमें खेद है.’’

 

सिन्हा ने शीर्ष अदालत के समक्ष कहा कि सीबीआई द्वारा जांचे जा रहे मामलों में से किसी भी मामले में उनकी ओर से कोई हस्तक्षेप नहीं किया गया है. उन्होंने साथ ही अपील की कि इस मामले को एक भी दिन जारी रखा गया तो इससे सार्वजनिक अहित होगा और इससे 2 जी मामलों पर असर पड़ेगा. पीठ ने हालांकि कहा, ‘‘ हमें ऐसा नहीं लगता.’’ सिंह ने यह भी कहा कि एनजीओ को भेदिये के नाम का खुलासा अवश्य करना चाहिए . उन्होंने कहा कि जिस प्रकार का हलफनामा एनजीओ ने दाखिल किया है ,(सिन्हा के खिलाफ आरोपों पर) उसे अनुमति नहीं दी जानी चाहिए क्योंकि ऐसे तो कोई भी शीर्ष अदालत में आधारहीन आरोप लगाने के बाद आराम से बच निकलेगा.

 

शीर्ष अदालत ने निर्देश दिया कि सीबीआई फाइलों और शीर्ष सीबीआई अधिकारी के खिलाफ आरोपों से जुड़े आगंतुक सूची रजिस्टर समेत सभी दस्तावेज एसपीपी आनंद ग्रोवर को सौंपे जाएं, जो सारी सूचना का अध्ययन करेंगे और दस अक्तूबर को अगली सुनवाई पर अदालत की सहायता करेंगे.

 

शीर्ष अदालत में कार्यवाही शुरू होने पर एनजीओ की ओर से पैरवी करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे और प्रशांत भूषण ने व्हीस्लब्लोअर के नाम का खुलासा करने में अपनी ‘‘अक्षमता’’ को लेकर अदालत से बिना शर्त माफी मांगी और अपील की कि वह नाम का खुलासा करने वाले अपने पूर्व के आदेश को वापस ले ले.

 

दवे ने इसके आगे कहा कि यह सीबीआई निदेशक के चरित्र हनन का प्रयास नहीं है लेकिन अदालत को उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को देखना चाहिए जिनकी जांच किए जाने की जरूरत है.

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Web Title: court_prashantbhushan_ranjitsinha
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