बिहार चुनाव स्पेशल: बाहुबलियों को गले लगाने में कोई पीछे नहीं

By: | Last Updated: Sunday, 27 September 2015 10:06 AM
criminals candidate in bihar

नई दिल्ली: बिहार में बाहुबली होने का मतलब है चुनाव में जीत की ज्यादा गारंटी. यही वजह है कि बाहुबलियों को गले लगाने  से किसी को परहेज नहीं . आपराधिक रिकॉर्ड की बात छोड़ भी दें तो तमाम बड़ी पार्टियों ने आधे दर्जन से ज्यादा बाहुबली या उनके रिश्तेदारों को टिकट दिया है. जिस बीजेपी में बाहुबली को टिकट देने के सवाल पर बवाल मचा हुआ है उस बीजेपी ने भी बाहुबलियों पर खूब दांव लगाए है.

 

अरवल के विधायक चितरंजन सिंह को जब 2010 में टिकट मिला था तब भी खूब चर्चा हुई थी. इस बार भी बीजेपी ने अरवल से चितरंजन सिंह को टिकट दिया है. चितरंजन सिंह एक जमाने में पांडव सेना के प्रमुख हुआ करते थे.

 

शाहपुर सीट से विशेश्वर ओझा को बीजेपी ने टिकट दिया है. एक जमाने में ओझा पर 25 हजार का इनाम रखा गया था. अभी तक इनके भाई की पत्नी शाहपुर से विधायक हुआ करती थी. इस बार खुद मैदान में उतरे हैं. ढाका से पवन जायसवाल भी बाहुबल के धनी हैं. पिछली बार निर्दलीय जीते थे. इस बार बीजेपी ने उतारा है. छातापुर से नीरज कुमार बबलू भी इलाके के दबंग हैं. पिछली बार जेडीयू से उतरे थे इस बार बीजेपी ने अपनाया है.  हिसुआ से अनिल सिंह, गोपालगंज के सुभाष सिंह, काराकट से राजेश्वर राज जैसे उम्मीदवार भी बाहुबल के धनी माने जाते हैं.

 

बीजेपी ने बाहुबलियों के अलावा उनकी पत्नी पर भी दांव लगाया है. नवादा जिले के बाहुबली अखिलेश सिंह को आज के बहुत लोग भूल गये होंगे. 90 के दशक में अखिलेश सिंह यहां आतंक का दूसरा नाम हुआ करता था. अखिलेश सिंह की पत्नी अरुणा देवी को बीजेपी ने वारसलीगंज से टिकट दिया है. सीवान में शहाबुद्दीन को टक्कर देने वाले रामाकांत पाठक की पत्नी आशा पाठक को जीरादेई से टिकट मिला है.

 

बीजेपी के अलावा उसकी सहयोगी एलजेपी ने तो जमकर बाहुबलियों पर दांव लगाया है. बाहुबली नेता और पूर्व सांसद सूरजभान सिंह के भाई कन्हैया सिंह को एलजेपी ने मोकामा से टिकट दिया है. मोकामा से सूरजभान निर्दलीय जीत चुके हैं. कन्हैया सिंह को टिकट देने के विरोध में सूरजभान के दाहिना हाथ कहे जाने वाले ललन सिंह ने उनका साथ छोड़ दिया है. सूरजभान के ही एक और रिश्तेदार रमेश सिंह को विभूतिपुर से टिकट दिया गया है. रमेश सिंह पिछली बार भी लड़े थे.

 

एलजेपी ने कुचायकोट सीट से काली पांडे को उतारा है. बिहार में काली पांडे को तमाम बाहुबलियों का गुरु माना जाता है. आज जितने बाहुबली मार्केट में नजर आते हैं उनके उदय से पहले काली पांडे ही उत्तर बिहार के सबसे बड़े बाहुबली माने जाते थे.

 

राजू तिवारी को पासवान की पार्टी ने गोविंदगंज से फिर टिकट दिया है. इसी सीट से अंडरवर्ल्ड सरगना राजन तिवारी विधायक का चुनाव जीते थे. राजन अदालत से दोषी ठहराये जाने के बाद चुनाव नहीं लड़ सकते. लिहाजा उनके भाई को फिर से चुनाव में टिकट मिला है. तरारी से सुनील पांडे की पत्नी गीता पांडे को एलजेपी का टिकट मिल सकता है. अभी एलान नहीं हुआ है.

 

बीजेपी की एक और सहयोगी हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा ने शिवहर से बाहुबली आनंद मोहन की पत्नी लवली आनंद को टिकट दिया है. लवली आनंद पहले वैशाली से सांसद रह चुकी हैं. कलेक्टर हत्याकांड में आनंद मोहन जेल की सजा काट रहे हैं.

 

जेडीयू ने भी बाहुबलियों पर जमकर दांव लगाया है. लालगंज सीट से मुन्ना शुक्ला को टिकट दिया गया है. मुन्ना शुक्ला पहले विधायक रह चुके हैं. लेकिन पिछली बार उनकी पत्नी चुनाव जीती थीं. तब मुन्ना शुक्ला मंत्री और डीएम की हत्या के केस में दोषी थे. मुन्ना शुक्ला को बाहुबल की ताकत विरासत में मिली है. दो बड़े भाई छोटन और भुटकन शुक्ला का अंडरवर्ल्ड पर कभी राज हुआ करता था. दोनों की हत्या के बाद मुन्ना शुक्ला को उनका साम्राज्य मिला.

 

एकमा से मनोरंजन सिंह पर नीतीश ने फिर दांव लगाया है. आतंक की दुनिया में मनोरंजन का असर बिहार के साथ झारखंड में भी रहा है. मनोरंजन सिंह लगातार चुनाव जीत रहे हैं. वारसलीगंज से जेडीयू ने प्रदीप महतो को फिर से टिकट दिया है. जेडीयू के टिकट पर मटिहानी से बोगो सिंह फिर चुनाव लड़े रहे हैं. ददन यादव डुमरांव से लड़ रहे हैं. नीतीश ने अपराध की दुनिया के बेताज बादशाह कहे जाने वाले अवधेश मंडल की पत्नी बीमा भारती को रूपौली से उतारा है. बीमा भारती के पति अवधेश के नाम पर लगातार जीतती रही है. नीतीश ने उन्हें अपनी सरकार में मंत्री भी बना रखा है. लेकिन इस बार पति-पत्नी का रिश्ता खराब हो चुका है.

 

दरौंदा सीट से जेडीयू ने बाहुबली अजय सिंह की पत्नी कविता सिंह को टिकट दिया है. खगड़िया से रणवीर यादव की पत्नी पूनम यादव फिर चुनाव मैदान में हैं.

लालू की पार्टी ने अपने बाहुबलियों पर फिर से दांव लगाया है. नवादा से राजबल्लभ यादव, बेलागंज से सुरेंद्र यादव, साहेबगंज से रामविचार राय, दरभंगा ग्रामीण से ललित यादव मैदान में हैं. पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह के बेटे को छपरा से और भाई केदार सिंह को बनियापुर से टिकट दिया है. भागलपुर के सांसद बुलो मंडल की पत्नी वर्षा रानी बिहपुर से आरजेडी उम्मीदवार हैं. कांग्रेस ने भी कई बाहुबलियों को अपना उम्मीदवार बनाया है.

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