पूर्णिया में चक्रवाती तूफान से 54 लोगों की मौत, आज गृहमंत्री का दौरा

By: | Last Updated: Friday, 24 April 2015 1:41 AM
Cyclonic storm kills 54 in Bihar, Purnia worst hit

पूर्णिया: बिहार के उत्तर एवं उत्तर पूर्वी 12 जिलों में 21 और 22 अप्रैल की रात में आए चक्रवाती तूफान (काल बैसाखी) एवं ओलावृष्टि अपने पीछे तबाही के निशान छोड़ गया है.

 

इस प्राकृतिक आपदा की चपेट में आकर अभी तक 54 लोगों की मौत हुई है जिसमें सबसे अधिकारी 37 लोगों की पूर्णिया जिले में मौत हुई है. बिहार में अचानक आई इस आपदा का जायादा लेने के लिए गृहमंत्री राजनाथ सिंह आज बिहार के पूर्णिया का दौरा करेंगे.

 

चक्रवाती तूफान एवं ओलावृष्टि में जिले में एक लाख छह हजार हेक्टयर में लगी मक्का फसल का नुकसान हुआ है तथा शश्वत फसल (आम एवं लीची) को पहुंची क्षति तथा मकानों की बर्बादी का आंकलन किया जा रहा है. जिला प्रशासन की ओर मृत लोगों के निकट आश्रितों को राज्य सरकार की घोषणा के अनुसार चार-चार लाख रूपये अनुग्रह अनुदान का भुगतान कर दिया गया है तथा राहत और बचाव कार्य जारी है.

 

पूर्णिया जिले का डगरुआ प्रखंड इस चक्रवाती तूफान और ओलावृष्टि से सर्वाधिक प्रभावित हुआ है जहां इससे जिले में सबसे अधिक 21 लोगों को मौत हो गयी है. डगरुआ प्रखंड के अध्कैसी पंचायत में ही सात लोगों की मौत घर के गिरने से मलवे में दब कर हो गयी.

 

सबसे विदारक दृश्य तो इस पंचायत के हरखेली गांव का है जहां मोहम्मद अशफाक का इकलौता पुत्र शहनवाज उर्फ शहनू (12) एवं एक पुत्री आयशा खातून उर्फ अशनू (8) को इस तूफान ने सदा के लिए मां बाप से छीन लिया. घटना के दो दिनों बाद भी भी हरखेली गांव में सन्नाटा पसारा है.

 

अशफाक की पत्नी सईदा खातून को अभी भी विश्वास नहीं होता कि उनके बेटे-बेटियों की मौत हो चुकी है. वे रह-रह कर अल्लाह रहम कर. अशनू-शहनू को लौटा दे गुहार लगाती दिखीं. पूर्णिया शहर के शांतिनगर मुहल्ला निवासी अजित कुमार मिश्र जो कि ईंटानगर में नौकरी करते हैं के परिवार के लिए मंगलवार की रात्रि भारी अमंगल साबित हुई और चक्रवाती तूफान के कारण बगल में बन रहे एक मकान की दीवार के मलबे के नीचे दबकर उनके तीन वर्ष पुत्र हर्ष की मौत हो गयी.

 

21 एवं 22 अप्रैल यानि मंगलवार और बुधवार की रात में जब यह चक्रवाती तूफान आया तो पूर्णिया शहर के शांतिनगर मुहल्ला निवासी अजित कुमार मिश्र के परिवार के सदस्य भोजन करने के बाद सोने जा रहा थे. अचानक आंधी और वष्रा ने क्षण में ही उग्र रुप धारण कर लिया. अफरातफरी मच गयी. पड़ोस में भी शोर-शराबा हो रहा था.

 

आकाशीय बिजली के कड़कने से भयभीत मिश्र का परिवार एक ही कमरे में बन्द हो गये. मिश्र की पत्नी, दो जुडवां बेटे, एक बेटी और उनकी मां एक-दूसरे को पकड़े हुए तूफान के गुजरने का इंतजार कर रहे थे. तभी तेज हवा के कारण उनके घर की छत उड़ गयी और उनके घर से सटे निर्माणाधीन एक पक्के के मकान की पांच ईंच की दीवार भारी बारिश के कारण ढहकर मिश्र के घर पर जा गिरा जिससे हर्ष की जान चली गयी. उसे बचाने में हर्ष की नानी और बहन भी बुरी तरह घायल हो गयीं जिनका इलाज पूर्णिया सदर अस्पताल में चल रहा है.

 

मिश्र के परिजनों का कहना है कि काफी मन्नते मांगने पर ईश्वर ने अजित को जुड़वा पुत्र दिया था लेकिन उसी ईश्वर ने उनके एक बच्चे को छीन भी लिया. अजित मिश्र की पत्नी अस्पताल के बरामदे पर बेसुध पड़ी हैं.

 

हर्ष का जन्म मंगलवार को ही हुआ था पर गत 21 अप्रैल मंगलवार का दिन उसके उसके लिए अंतिम दिन साबित हुआ. डगरुआ प्रखंड की बभनी गांव निवासी महिला कृषक प्रेमकला ने रुहांसे गले से बताया कि कुछ भी तो नहीं बचा है. गांव वाला घर तूफान में उजड़ गया. लगभग पांच एकड़ जमीन में लगी गेहूं एवं मकई की फसलें बर्बाद हो गयीं.

 

तूफान वाली रात के पहले ही आठ बीघा खेते में लगे गेहूं की फसल को कटवा कर लाया था. उम्मीद थी कि साल भर का भोजन इससे चल जायगा और कर्ज का भी कुछ भुगतान हो जायेगा. लेकिन सारा गेहूं तूफान में उड़ गया. एक दाना भी नहीं बचा.

 

दो बीघे जमीन में लगी मक्के की फसल तूफान के थपेड़े से भूमि से सट गयी हैं. अब ग्रामीण बैंक से लिया गया 40 हजार रुपये कर्ज का कहां से भुगतान कर पाएंगे. अश्रूपूर्ण आखें लिए आकाश की ओर देखते हुए बुजुर्ग महिला किसान प्रेमकला की जुबान से बार-बार यह निकल आती थी कि ‘इससे तो अच्छी थी मौत.’

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Web Title: Cyclonic storm kills 54 in Bihar, Purnia worst hit
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