अखलाक का हत्यारा कौन है?

By: | Last Updated: Friday, 2 October 2015 4:03 PM
Dadri Mob Killing

नई दिल्ली: ग्रेटर नोएडा के दादरी में लाउडस्पीकर से एनाउंसमेंट के बाद जिस तरह अखलाक की हत्या हुई उससे गंभीर संवाल खड़े हो रहे हैं. सोमवार की रात को अचानक गोमांस की अफवाह फैलाई गई और अखलाक की जान ले ली गई. आपको बताते हैं कि सोमवार की रात क्या हुआ था और आरोपी के परिवार क्या कह रहे हैं?

 

आरोपी नंबर चार हरिओम और पांच श्रीओम की मां लीला देवी अपने बेटों को बेकसूर बता रही हैं और दावा है कि गफलत में पुलिस ने दोनों का नाम आरोपियों की लिस्ट में डाला है.

 

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आरोपी नंबर दो विवेक और आरोपी नंबर तीन सचिन के पिता ओम का भी दावा है कि दोनों अखलाक की हत्या के वक्त घर में ही थे.

 

आरोपी नंबर एक रुपेंद्र की मां का भी दावा है कि 28 सितंबर की रात उनका  बेटा घर में ही था. गौरव-सौरव के पिता धीरज का भी यही दावा है.

 

दस में से इन सात नामजद आरोपियों के परिवार बेगुनाही का दावा कर रह हैं. इतने हो चुके हैं पुलिस दस में से छह आरोपियों को ही गिरफ्तार कर पाई है. पुलिस में दर्ज एफआईआर में अखलाक की पत्नी इकरामन ने उस रात की कहानी बताई है.

28 सितंबर की रात करीब साढ़े दस बजे गांव के 14-15 लोग हाथों में लाठी, डंडा, भाला और तमंचा लेकर घर की तरफ गाली-गलौज करते हुए आए और दरवाजे को धक्का मारकर घुस गए और मेरे पति अखलाक और बेटे दानिश को जान से मारने की नीयत से मारने लगे थे. मैंने रोकने की कोशिश की तो मुझे गालियां देते हुए मारकर धकेल दिया. मेरे पति और मेरा बेटा बिल्कुल मरने की हालत में हो गये.

 

इकरामन ने एफआईआर में दस आरोपियों के नाम बताए हैं जबकि 4-5 अज्ञात आरोपी हैं. जबकि गांव के बुजुर्ग का दावा है कि सोशल मीडिया पर ऐसी तस्वीर डालकर अफवाह फैलाई गई और तब इस मामले ने सांप्रदायिक रंग ले लिया.

 

एबीपी न्यूज के पास भी वह तस्वीर है लेकिन हम वह तस्वीर नहीं दिखा रहे क्योंकि तस्वीर की सच्चाई पर शक है. तस्वीर में जो पुलिसवाला दिख रहा है वो सफेद वर्दी में है जो कि यूपी पुलिस की नहीं है.

 

चार दिन बाद भी पुलिस अब तक उन दो युवकों का पता नहीं लगा पाई है जिन्होंने गांव के पुजारी से लाउडस्पीकर से अफवाह फैलाने का दबाव दबाव बनाया था.

 

अखलाक के गांव में ऐसा एक भी परिवार नहीं था जिसके साथ उनका आपसी भाईचारा न हो. बकरीद के दिन भी वो गांव वालों के साथ मिलकर खाना-पानी किया था. काफी तरक्कीपसंद थे अखलाक. गांव के जिस हिस्से में रहते थे वहां सिर्फ दो मुस्लिम परिवार थे. कभी कोई ये बात उन्हें कह दे तो इसे पसंद नहीं करते थे.

 

जैसा नाम था अखलाक वैसा ही उनका मिजाज भी था यानी हर किसी के साथ मिलजुल कर रहना. 50 साल के अखलाक का गांव में किसी के साथ कोई बैर नहीं था. अखलाक के बचपन के दोस्त हैं गुलाम मोहम्मद. गुलाम बताते हैं कि जब कभी वो अखलाक से अपने समाज के लोगों के बीच रहने के लिए कहते वो साफ मना कर देते.

 

अखलाक लोहार का काम करते थे. सीमित आमदनी थी. बहुत कम पढ़े लिखे थे लेकिन प्रगतिशील सोच रखते थे. उनकी जिंदगी का एक ही मकसद था अपने बच्चों ज्यादा से ज्यादा तालीम दिलाना.

 

अखलाक के छोटे भाई हैं जान मोहम्मद. जान बताते हैं कि अपने बच्चों की पढ़ाई को लेकिन वो हमेशा गंभीर रहे. एक बेटे को पढ़ाने के बाद भारतीय वायुसेना में भेजा. दूसरा बेटा दानिश सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रहा था. लेकिन दानिश इस समय जीवन और मौत के बीच संघर्ष कर रहा है. एक बेटी की शादी कर चुके थे और सबसे छोटी बेटी की शादी करने की सोच रहे थे.

 

अख़लाक़ पांचों वक्त के नमाज़ी थे. सच बोलने पर बहुत ज़ोर देते थे. अख़लाक़ की मां अपने चार बेटों के बावजूद अख़लाक़ के साथ ही रहना पसंद करती थीं. अख़लाक़ के बड़े भाई जमील अहमद इस बात को कभी नहीं भूल पाएंगे कि अख़लाक़ शनिवार से ही उन्हें फोन कर रहे थे कि भैया आ जाइये साथ खाना खाने का मन कर रहा है. सोमवार शाम भी अख़लाक़ ने उन्हें कई फोन किये कि आ जाइये साथ खाने का मन है. लेकिन वो दिन नहीं आया और अब कभी नहीं आएगा.

दादरी कांड: अखलाक का हत्यारा कौन है? 

 

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Web Title: Dadri Mob Killing
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