जिंदगी ना मिलेगी दोबारा: ये कहानी आपको झकझोर देगी

By: | Last Updated: Thursday, 4 June 2015 4:26 PM
Dads-post-on-Delhi-boys-death-highlights-Wall-Street-stress

नई दिल्ली: जिंदगी बार-बार नहीं मिलती. लेकिन कई बार जिंदगी कुछ इशारे करती है जिसे हम शायद समझ नहीं पाते. आज हम आपको एक ऐसी ही कहानी बता रहे हैं.

 

जिंदगी ना मिलेगी दोबारा: ‘ये कहानी आपको झकझोर देगी’ 

 

ये कहानी 22 साल के सर्वश्रेष्ठ गुप्ता की है. दिल्ली का रहने वाला सर्वश्रेष्ठ अमेरिका में कामयाबी की ऊंचाईयों को छूने गया था. लेकिन सर्वश्रेष्ठ अब इस दुनिया में नही है आखिर क्या हुआ सर्वश्रेष्ठ के साथ. पिता को लगता है कि काम के दबाव ने उनका 22 साल का बेटा उनसे छीन लिया. क्या है सर्वश्रेष्ठ की मौत का सच?

 

Goldman Sachs के दफ्तर में जिंदगी घड़ी की सुईयों से भी तेज भागती है. इसी रफ्तार का हिस्सा हुआ करता था दिल्ली का रहने वाला 22 साल का सर्वश्रेष्ठ गुप्ता. जो Goldman Sachs के telecommunications, media and technology group में काम कर रहा था.

एक के बाद एक बजते फोन और फोन कॉल्स का जवाब देते-देते थक जाता था सर्वश्रेष्ठ . कई बार ये सिलसिला 20 घंटों तक जारी रहता था. सर्वश्रेष्ठ करीब एक साल से Goldman Sachs के सैन फ्रैनसिस्को ऑफिस में काम कर रहा था लेकिन अब उसे अपने काम से थकान होने लगी थी. पिता को कई बार वो ये बात बता चुका था लेकिन सबकुछ 16 अप्रैल को खत्म हो गया जब सर्वश्रेष्ठ के अपार्टमेंट के पार्किंग लॉट में उसकी लाश मिली.

 

सर्वश्रेष्ठ की मौत के एक महीने बाद पिता सुनील गुप्ता ने चिट्ठी लिखी जिसके बाद सर्वश्रेष्ठ की मौत दुनिया भर में सुर्खियां बन गई और मौत की वजहों पर डिबेट शुरू हो गई.

 

16 अप्रैल को जिस दिन सर्वश्रेष्ठ की मौत हुई उसने रात दो बजकर 40 मिनट पर दिल्ली में अपने पिता को फोन किया था ये दोनों के बीच आखिरी बातचीत थी पिता ने इस बातचीत का जिक्र करते हुए चिट्ठी में लिखा है कि उसने फोन किया और कहा बस बहुत हो गया. मैं दो दिन से सोया नहीं हूं और सुबह मेरी क्लाइंट के साथ मीटिंग है. मुझे प्रेजेंटेशन भी कंपलीट करना है मेरा बॉस मुझसे नाराज है और मैं पूरे ऑफिस में अकेले काम कर रहा हूं. पिता ने लिखा मुझे गुस्सा आ गया मैंने कहा कि 15 दिन की छुट्टी लो और घर आ जाओ. उसने कहा वो नहीं मानेंगे. पिता ने कहा कंपनी से कहो इसे वो तुम्हारा इस्तीफा समझें.

 

दोनों की बातचीत इस बात पर खत्म हुई कि सर्वश्रेष्ठ अगले एक घंटे और काम करेगा ऑफिस से आधा किलोमीटर दूर अपने अपार्टमेंट जाएगा और सुबह ऑफिस आएगा लेकिन सर्वश्रेष्ठ के लिए 16 अप्रैल की रात के बाद सुबह कभी हुई ही नहीं. फोन कॉल के चार घंटे बाद सुबह 6 बजकर 40 मिनट पर पार्किंग के पास उसकी लाश मिली.

 

 

सर्वश्रेष्ठ की बातों में उसकी परेशानी और झल्लाहट साफ झलक रही थी. सैन फ्रैनसिस्को के जांच अधिकारी अब तक इस बात की तहकीकात कर रहे हैं कि सर्वश्रेष्ठ की मौत कैसे हुई. आशंका जताई जा रही है कि सर्वश्रेष्ठ की मौत काम के बढ़ते दबाव की वजह से हुई.

 

न्यू यॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक सर्वश्रेष्ठ अपनी जॉब में अच्छा परफॉर्म कर रहा था उसकी मेहनत और उसके हुनर की वजह से उसके ऊपर काम का बोझ बढ़ चुका था.

सर्वश्रेष्ठ के पिता ने भी अपनी चिट्ठी कुछ ऐसी बाते लिखी हैं जो इसी तरफ इशारा करती हैं दरअसल मौत से एक महीने पहले सर्वश्रेष्ठ ने अपने पिता को बिना बताए नौकरी से इस्तीफा दे दिया था.

 

जब ये बात पिता को पता चली उन्होंने पूछा कि तुम क्या करना चाहते हो सर्वश्रेष्ठ ने पिता से कहा कि मैं कुछ नया करना चाहता हूं. घऱ का बना खाना खाना चाहता हूं, घूमना चाहता हूं जिम जाना चाहता हूं और आखिर में अपने स्कूल को बढ़ाना चाहता हूं.

 

बहुत ज्यादा ख्वाहिशें नहीं थीं सर्वश्रेष्ठ को जिंदगी से बस वो सब करना चाहता था जो आम जिंदगी में कोई भी करता है लेकिन पहले सर्वश्रेष्ठ को अंदाजा ही नहीं हुआ कि वो किस तरफ बढ़ रहा है. पिता ने चिट्ठी में लिखा है कि जब वो वीकेंड पर भी काम करता था तो मैं उससे कहता था कि तुम अपनी सेहत खराब कर लोगे तो वो कहता कि पापा मैं अभी जवान हूं और इंनवेस्टमेंट बैकिंग मुश्किल काम है. लेकिन कुछ महीनों बाद जनवरी से उसकी शिकायतें बढ़ने लगीं. वो कहने लगा ये नौकरी मेरे लिए नहीं है बहुत ज्यादा काम और बहुत कम वक्त. मैं घर वापस आना चाहता हूं.

 

सर्वश्रेष्ठ जैसा नाम वैसा काम. दिल्ली के डीपीएस आरकेपुरम का ब्रिलियंट स्टूडेंट था सर्वश्रेष्ठ. वो हमेशा से आगे रहना चाहता था और इसके लिए कभी कड़ी मेहनत करने से नहीं डरा.

 

सर्वश्रेष्ठ की मौत पहली घटना नहीं है कुछ और कहानियां भी हैं जो सर्वश्रेष्ठ की कहानी से मेल खाती हैं. ये कहानी हर मां-बाप के लिए है क्योंकि अगर आपके बच्चे अपने शरीर की सीमा नहीं समझ पा रहे तो काम और शरीर के बीच की लकीर खींचने में मां-बाप को मदद करनी होगी.

 

वक्त ही तो नहीं होता. अमेरिका में ऐसे ना जाने कितने हैं जिनके पास वक्त नहीं है. अमेरिका के इनवेस्टमेंट बैकिंग और कंसल्टेंसी ये दो फील्ड ऐसे हैं जहां सबसे ज्यादा काम का बोझ होता है. ऐसी तस्वीरें आम होती हैं जब दफ्तर में काम कर रहे लोग अपनी मेज पर लाकर खाना खाते हैं. मशहूर लेखक चेतन भगत ने 8 साल तक Goldman Sachs में financial analyst के तौर पर काम किया वो हांगकांग ऑफिस में थे लेकिन चेतन भगत ने एक लकीर खींच रखी थी कि इससे ज्यादा स्ट्रेस वो नहीं लेंगे.

 

लाखों की संख्या में भारतीय युवा अमेरिका पढ़ने जाते हैं और नौकरी करने जाते हैं. आंखों में सपने की तरह अमेरिका बसा होता है लाखों चले गए हैं और उतने ही आज भी देश में अमेरिका जाने की तैयारी में जुटे हैं. आंकड़े बताते हैं कि एक लाख से ज्यादा छात्र अमेरिका की यूनिवर्सिटी में पढ़ने जाते हैं.

सर्वश्रेष्ठ के पिता ने भी उससे कहा था कि वो छुट्टी लेकर घर आ जाए लेकिन सर्वश्रेष्ठ ने पिता से कहा था कि छुट्टी नहीं मिलेगी. मनोचिकित्सक इस डर को भी काम के बोझ से जोड़कर देखते हैं.

 

ये कैसा काम है जिसमें सोने का टाइम ही नहीं मिलता? वित्तीय बाजार में एनालिस्ट या इनवेस्टमेंट बैंकर का काम करने वालों को अगर 20-20 घंटे काम करना पड़ता है तो आखिर क्यों? क्योंकि दुनिया गोल है.

 

वित्तीय बाजारों में सौदे किसी एक शहर के स्टॉक् एक्सचेंज तक ही सीमित नहीं होते. दुनिया भर में खरीद-फरोख्त चलती रहती है. टोक्यों में खरीदा, लंदन में बेचा. न्यू यॉर्क में खरीदा, मुंबई में बेचा. वगैरह-वगैरह. ऐसे ही चलता रहता है. और हर शहर के बाजार के खुलने और बंद होने का अलग टाइम होता है.

 

सोचिए सर्वश्रेष्ठ गुप्ता की तरह कोई सैन फ्रैनसिस्को में काम करता है. तो उसको सिर्फ अमेरिका के न्यू यॉर्क के स्टॉक एक्सचेंज से मतलब नहीं. न्यू यॉर्क का बाजार तो सैन फ्रैनसिस्को के टाइम के हिसाब से सुबह 7.30 बजे खुलता है. तो समझिए न्यू यॉर्क में सौदा कर सुबह 7.30 बजे काम शुरू किया. सैन फ्रैनसिस्को में दोपहर के 2 बजे तो न्यू यॉर्क का मार्केट बंद. तीन घंटे की नींद ली और शाम 5 बजे टोक्यो के क्लायंट को फोन आ गया क्योंकि टोक्यो स्टॉक एक्सचेंज खुल गया. डेढ घंटे बाद शाम 6.30 बजे शांघाई खुला तो वहां की डील शुरू. सवा दो घंटे बाद यानी जब सैन फ्रैनसिस्को में रात के 8.45 बजे तो मुंबई में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में कारोबार शुरू. सैन फ्रैनसिस्को में जब रात के तीन बजेंगे तब तक मुंबई का बाजार खुला रहता है. लेकिन उसके बाद भी चैन कहां. मुंबई बंद होने से पहले ही रात के एक बजे लंदन का मार्केट खुल जाता है. और सुबह 9.30 तक लंदन खुला रहता है. लेकिन उससे पहले फिर सुबह 7.30 बजे न्यू यॉर्क खुल जाएगा. फिर वही दुनिया का चक्कर शुरु. आदमी सोए तो सोए कब?

India News से जुड़े हर समाचार के लिए हमे फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर फॉलो करें साथ ही हमारा Hindi News App डाउनलोड करें
Web Title: Dads-post-on-Delhi-boys-death-highlights-Wall-Street-stress
Explore Hindi News from politics, Bollywood, sports, education, trending, crime, business, साथ ही साथ और भी दिलचस्प हिंदी समाचार
और जाने: Goldman Sachs Wall Street stress
First Published:

Get the Latest Coupons and Promo codes for 2017