16 साल में दाऊद की संपत्ति की चौथी नीलामी- क्या कोई खरीदार आएगा?

By: | Last Updated: Wednesday, 25 November 2015 3:34 PM
dawood property auction

मुंबई: 14 साल बाद फिर एक बार मुंबई में अंडरवर्लड डॉन दाऊद इब्राहिम की संपत्ति नीलाम होने जा रही है, लेकिन अगर आपने बोली लगा कर ये संपत्ति खरीद भी ली तो इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि उसका कब्जा आपको मिल पायेगा. इससे पहली हुई नीलामियों में सिर्फ 2 लोगों ने ही दाऊद की संपत्ति पर बोली लगाई थी और दोनों ही 14 साल से संपत्ति का कब्जा हासिल करने के लिये चक्कर काट रहे हैं.

 

दक्षिण मुंबई की पाकमोडिया स्ट्रीट में में दाऊद इब्राहिम के घर के पास है एक होटल है डेल्ही जायका. पहले ये होटल रौनक अफरोज के नाम से जाना जाता था. सरकार के मुताबिक ये संपत्ति दाऊद इब्राहिम के मालिकाना हक की है, लेकिन चूंकि दाऊद अपने खिलाफ दर्ज तमाम आपराधिक मामलों में जांच एजेंसियों के सामने पेश नहीं हुआ इसलिये ये संपत्ति जब्त कर ली गई है. आने वाले 9 दिसंबर को इनकम टैक्स विभाग इस होटल की नीलामी करेगा.

 

होटल डेल्ही जायका का क्षेत्रफल 45 वर्ग मीटर का है. इस होटल की नीलामी के लिये इनकम टैक्स विभाग ने रिजर्व प्राईस तय किया है. होटल का रिजर्व प्राईस रखा गया है 1 करोड 18 लाख रूपये. बोली लगाने की चाहत रखने वाले लोगों को 30 लाख रूपये का बयाना जमा कराना होगा जो कि रिजर्व प्राईस का 25 फीसदी है. नीलामी आयोजित करने की जिम्मेदारी Ashwin & company auctioneers नाम की एक निजी कंपनी को सौंपी गई है.

 

जो लोग नीलामी में बोली लगाना चाहते हैं उन्हें 3 दिसंबर को संपत्ति के निरीक्षण के लिये लाया जायेगा. नीलामी में हिस्सा लेने के लिये आखिरी तारीख 8 दिसंबर है. ये जानना दिलचस्प होगा कि 9 दिसंबर को होनेवाली नीलामी में डॉन दाऊद इब्राहिम की संपत्ति के लिये बोली लगाने के लिये क्या कोई आता है.

 

बीते 16 सालों में दाऊद की संपत्ति की ये चौथी बार नीलामी हो रही है. साल 2000 में सबसे पहली बार नीलामी कोलाबा इलाके के होटल डिप्लोमैट में हुई थी…लेकिन तब किसी की हिम्मत नहीं हुई कि वो डॉन की संपत्ति पर बोली लगाये. उसके अगले साल 28 मार्च 2001 को दूसरी बार फिरसे नीलामी की गई जिसमें दिल्ली के शिवसैनिक अजय श्रीवास्तव ने नागपाडा इलाके की जयराजभाई लेन में 2 दुकाने खरीदीं.

 

उसी साल 20 सितंबर को फिरसे तीसरी नीलामी हुई. उस नीलामी में दिल्ली के ही एक व्यापारी पीयूष जैन ने दाऊद की ताडदेव इलाके की एक संपत्ति खरीदी. इन दोनों ही लोगों ने संपत्ति के पैसे तो चुका दिये लेकिन आज तक संपत्ति का कब्जा हासिल नहीं कर सके हैं.

 

दिल्ली के शिवसैनिक अजय श्रीवास्तव पेशे से वकील हैं. 1999 में श्रीवास्तव पहली बार तब चर्चा में आये थे जब उन्होंने पाकिस्तान के साथ क्रिकेट मैच खेले जाने के विरोध में फिरोजशाह कोटला मैदान की पिच खोद डाली थी. अजय श्रीवास्तव ने संपत्ति तो खरीद ली, लेकिन उसके बाद उनका सामना हुआ दाऊद इब्राहिम की बहन हसीना पारकर से.

 

हसीना पारकर ने संपत्ति का कब्जा देने से इंकार कर दिया. अजय श्रीवास्तव ने कब्जा हासिल करने के लिये मुंबई के स्मॉल कॉसेस कोर्ट में अर्जी दायर की. 10 साल तक चले मुकदमे के बाद साल 2010 में फैसला उनके पक्ष में ही आया लेकिन इसके बावजूद हसीना कब्जा छोडने को तैयार नहीं हुई.

 

भले ही कोर्ट की चारदीवारी में अजय श्रीवास्तव दाऊद के खिलाफ मुकदमा जीत गये हों, लेकिन दाऊद गिरोह के लिये ये उसकी नाक का सवाल था. हसीना पारकर ने स्मॉल कॉसेस कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील कर दी. हसीना पारकर की पिछले साल हार्ट अटैक से मौत हो गई, लेकिन अब उसके बच्चे मुकदमा आगे चला रहे हैं. कुल मिलाकर बीते 15 सालों से अजय श्रीवास्तव कब्जा हासिल करने के लिये दिल्ली से मुंबई का चक्कर काट रहे हैं.

 

इस बीच उत्तर प्रदेश से पुलिस ने छोटा शकील गिरोह के कुछ शूटरों को गिरफ्तार किया जिनसे पूछताछ में पता चला कि उन्हें अजय श्रीवास्तव को अपना निशाना बनाना था. अजय श्रीवास्तव का कसूर था कि उसने दाऊद की संपत्ति पर बोली लगाने की हिम्मत की.

 

इसके बाद दिल्ली पुलिस ने अजय श्रीवास्तव को सुरक्षा मुहैया करा दी. श्रीवास्तव का कहना है कि उन्होंने अंडरवर्लड के खौफ के खिलाफ संदेश देने के लिये दाऊद की संपत्ति खरीदी थी. उन्होंने मुंबई पुलिस को भी पेशकश की वे उनकी खरीदी हुई संपत्तियों का कब्जा ले ले और उस जगह अपनी चौकी बना दें, लेकिन मुंबई पुलिस ने दिलचस्पी नहीं दिखाई.

 

दाऊद की संपत्ति को नीलामी में खरीदने वाले शख्स पीयूष जैन भी आज तक उसका कब्जा हासिल नहीं कर सकें हैं. संपत्ति खरीदने के बाद पीयूष दिल्ली से अपना ठिकाना बदल कर एक दूसरे शहर में रहने के लिये चले गये हैं और अब अपना चेहरा तक कैमरे के सामने नहीं लाना चाहते. संपत्ति पर कब्जा हासिल करने किलेय पीयूष जैन ने कोई कोर्ट केस तो नहीं किया लेकिन बार बार प्रधानमंत्री को खत लिखकर गुहार लगाते रहते हैं कि सरकार संपत्ति पर कब्जा हासिल करने में उनकी मदद करे.

 

अलग अलग केंद्रीय जांच एजेंसियों ने दाऊद इब्राहिम की करीब 12 संपत्तियों को जब्त कर रखा है और आज की तारीख में बाजार में उनकी कीमत 100 करोड के करीब आंकी जा रही है. सूत्रों के मुताबिक दाऊद के पास कई बेनामी संपत्तियां भी हैं जिनकी कोई आधिकारिक जानकारी इन जांच एजंसियों के पास नहीं है. ऐसी संपत्तियों की देखभाल का काम पहले दाऊद की बहन हसीना पारकर करती थी और अब उसका छोटा भाई इकबाल कासकर करता है.

 

14 साल बाद फिर एक बार दाऊद की संपत्ति की नीलामी तो हो रही है. हो सकता है कि फिर एक बार कोई न कोई हौसला जुटाकर बोली लगाने के लिये नीलामी में पहुंच जाये…लेकिन उसके आगे उस संपत्ति पर कब्जा हासिल करने के लिये उसे खुद ही दाऊद के रिश्तेदारों से कानूनी लडाई लडनी होगी. बीते हए मामले यही बताते हैं कि पुलिस और सरकार इसमें कोई मदद नहीं करेगी.

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