इन पांच शर्तों के साथ भारत आना चाहता था दाऊद?

इन पांच शर्तों के साथ भारत आना चाहता था दाऊद?

1993 में मुंबई में ब्लास्ट हुआ था. ब्लास्ट से पहले भले दाऊद मुंबई से भागकर पाकिस्तान चला गया हो, लेकिन वो ब्लास्ट केस में मोस्ट वांटेड है. दाऊद ने भारत लौटने के लिए कुछ शर्तें रखी थी.

By: | Updated: 28 Sep 2017 07:44 PM

नई दिल्ली: क्या भारत का मोस्ट वांटेड क्रिमिनल अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम भारत आना चाहता था ? पूर्व पुलिस अफसर और दाऊद से बात करने वाले नीरज कुमार का दावा है कि भारत लौटने के लिए दाऊद ने शर्तें रखने का भी चांस लिया था लेकिन बात बनी नहीं. नीरज कुमार के मुताबिक दाऊद ने भारत आने के लिए पांच शर्ते रखी थी. दाऊद ने शर्तें इसलिए रखी थीं क्योंकि वह  जेल जाने से भी डरता है और लॉक अप की थर्ड डिग्री से भी कांपता है.


दाऊद को लेकर बढ़ी सरगर्मी 


हाल ही में ब्रिटेन में दाऊद की संपत्ति जब्त हुई. मुंबई में भाई इकबाल कासकर की गिरफ्तारी हुई और दाऊद की बहन हसीना पारकर पर फिल्म रिलीज हुई. फिर ये खबर उड़ी कि दाऊद इब्राहिम की बीबी महजबीं पिता सलीम शेख से मिलने 2016 में चुपचाप मुंबई आई थी और चुपचाप लौट गई. इतना सब होने के बाद देश में मोस्ट वांटेड आतंकवादी दाऊद इब्राहिम को लेकर सरगर्मी बढ़ गई है.


पिछले दिनों महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के राज ठाकरे ने इसमें ये कहकर राजनीति जोड़ दी कि दाऊद भारत लौटने की कोशिश कर रहा है और वो सरकार से डील कर रहा है. उन्होंने कहा था कि मोदी सरकार चुनावी फायदे के लिए दाऊद की वापसी का श्रेय लेने में जुटी है.


एबीपी न्यूज पर पूर्व आईपीएस अफसर नीरज कुमार ने किए कई खुलासे


पूर्व आईपीएस अफसर नीरज कुमार ने दाऊद के बारे में बड़ा खुलासा किया है. दाऊद पर Dial D for Don किताब लिख चुके और सरेंडर के सिलसिले में दाऊद से बात कर चुके नीरज कुमार ने एबीपी न्यूज को बताया है कि दाऊद इब्राहिम भारत आना चाहता था और इसके लिए उसने कुछ शर्तें रखी थी. दाऊद ये तो जानता था कि उसकी शर्तें पूरी नहीं होंगी, लेकिन शर्ते रखने का चांस दाऊद ने लिया था.


1993 में मुंबई में ब्लास्ट हुआ था. ब्लास्ट से पहले भले दाऊद मुंबई से भागकर पाकिस्तान चला गया हो, लेकिन वो ब्लास्ट केस में मोस्ट वांटेड है. दाऊद ने भारत लौटने के लिए कुछ शर्तें रखी थी.


पहली शर्त


भारत लौटने के बाद उसे लॉकअप में न रखा जाए


दूसरी शर्त


उसे जेल में न रखा जाए क्योंकि जेल में उसके कई दुश्मन हैं


तीसरी शर्त


हाउस अरेस्ट में रखा जाए.


चौथी शर्त


दाऊद खुद को मुंबई ब्लास्ट केस का आरोपी नहीं मानता. हालांकि वो इस बात के लिए तैयार है कि उस पर केवल ब्लास्ट का केस चले.


पांचवीं शर्त


गुनाह कबूल कराने के लिए कोई दवाब न डाला जाए.



क्या मोदी सरकार से एक भी शर्त मनवा पाएगा डॉन? 


दाऊद इब्राहिम का रहस्य बरकरार है. भारत सरकार मानती है कि दाऊद को पाकिस्तान ने पनाह दे रखी है, लेकिन पाकिस्तान ने कभी इसे सच नहीं माना. दाऊद ये जानता है कि भारत में अब सरकार नरेंद्र मोदी की है, जिन्होंने आतंक को मिटाने की कसम खा रखी है. दाऊद अगर भारत आना चाहता भी है तो क्या मोदी जैसी सरकार से एक भी शर्त मनवा पाएगा? ये तो शायद दाऊद भी नहीं रहा होगा.


सवाल ये है कि दाऊद का क्या होगा? वो पाकिस्तान में अपनी मौत मरेगा या भारत के हाथों पकड़े जाने पर मारा जाएगा.

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