Debate: पीएम मोदी किसान विरोधी हैं या किसान हितैषी?

By: | Last Updated: Sunday, 22 March 2015 12:57 PM

नई दिल्ली: जमीन बिल पर हो रहे भारी विरोध के बीच रेडियो पर मन की बात के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि जमीन बिल पर भ्रम फैलाया जा रहा है. मोदी ने भरोसा दिया कि मुआवजा घटेगा नहीं बल्कि तेरह कामों को जोड़ने से बढेगा.

लोकसभा से बिल पास होने के दौरान सरकार ने जो नौ संशोधन किए प्रधानमंत्री ने उनपर ज्यादा जोर दिया. बड़ा सवाल ये है कि पीएम मोदी किसान विरोधी हैं या किसान हितैषी?

 

मन की बात के जरिये देश के किसानों का भूमि अधिग्रहण बिल पर भरोसा जीतने की प्रधानमंत्री ने कोशिश की. मोदी ने बिल के फायदे गिनाते हुए कहा कि 13 कानूनों में पिछली सरकार ने मुआवजा चार गुना नहीं किया था लेकिन हमने उसे कर दिया है.

 

कांग्रेस कह रही है कि कानून में ये साफ था कि एक साल के भीतर संशोधन लाकर मुआवजा चार गुणा किया जाना अनिवार्य था और ये सरकार की मजबूरी थी.

 

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा, “आज प्रधानमंत्री के ‘मन की बात’ सरासर झूठ से भरी हुई थी. PM के पद की गरिमा रखते हुए, मैं सीधा आरोप लगा रहा हूँ.”

 

जयराम ने कहा कि ऐसा करना सैक्शन 105 (3) के तीन अनिवार्य था. उस समय 13 कानूनों में संशोधन के लिए समय नहीं था इसलिए सैक्शन 105 डाला गया था.

 

मोदी ने किसानों को समझाने की कोशिश की कि नेशनल कॉरिडोर के लिए एक किमी तक जमीन पीपीपी के तहत ली जाएगी जिसपर मालिकाना हक सरकार का होगा.

 

लेकिन कांग्रेस कह रही है कि निजी क्षेत्र को जब जमीन सरकार देगी तो मालिकाना हक भले सरकार का हो लेकिन मुनाफा कौन कमाएगा.

 

इसी तरह मोदी ने सोशल इंपेक्ट एसेसमेंट का सर्वे हटाने की दलील दी कि इससे सालों साल लग जाते लेकिन कांग्रेस की दलील है कि कानून में साफ है कि छह महीने के भीतर सर्वे होना था फिर सालों साल लगने का तो सवाल ही नहीं है.

 

मोदी ने कहा कि ये कानून कॉरपोरेट, अमीरों, धन्ना सेठों के लिए नहीं है लेकिन कांग्रेस सवाल पूछ रही है कि जब किसी भी निजी एंटिटी यानी संस्था को जमीन दी जानी है तो एनजीओ की आड़ में सरकार किसी को भी जमीन दे देगी.

 

हालांकि मोदी ने किसानों को ये भरोसा दिया है कि उपजाऊ जमीन का अधिग्रहण आखिरी विकल्प होगा और किसानों के कोर्ट जाने के रास्ते भी खुले हुए रहेंगे.

 

एक यह भी बताया जाता है कि भूमि अधिग्रहित की गयी तो वो पांच साल में वापस करने वाले कानून को हटा दिया गया है. जी नहीं, मेरे किसान भाइयो-बहनों हमने कहा है कि जब भी Project बनाओगे, तो यह पक्का करो कि कितने सालों में आप इसको पूरा करोगे. और उस सालों में अगर पूरा नहीं करते हैं तो वही होगा जो किसान चाहेगा.

 

मन की बात में पीएम ने प्रमुखता के साथ जिन मुद्दों का जिक्र किया वो वही मुद्दे हैं जिन्हें संशोधन के बाद बिल में जोड़ा गया है. कांग्रेस कह रही है कि पीएम ने किसानों से जो मन की बात की है वो झूठ और भ्रम फैलाने वाला है.

 

लोकसभा में सरकार के लाये गये नौ संशोधनों के साथ बिल पास हो चुका है. लेकिन बहुमत नहीं होने की वजह से राज्यसभा में बिल अभी फंसा हुआ है. 5 अप्रैल को अध्यादेश की मियाद भी खत्म हो रही है. ऐसे में इस बिल का भविष्य अभी क्या है कहा नहीं जा सकता. पीएम की सफाई और कांग्रेस के सवाल के बाद अब लोगों के मन में ये सवाल है कि पीएम मोदी वाकई में किसानों के हितैषी हैं या फिर किसान विरोधी?

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Web Title: Debate: Modi- farmers friend or foes?
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