दीनानाथ बत्रा हैं कौन?

By: | Last Updated: Tuesday, 29 July 2014 4:16 PM
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नई दिल्ली : बगैर किसी वैज्ञानिक सुबूत के अगर आपके बच्चों को तर्कहीन चीजें पढाई जाए तो आप माता पिता होने के नाते कैसा महसूस करेंगे . गुजरात में नई सप्लीमेटरी स्कूली किताबों के इस्तेमाल पर सरकारी आदेश ने हंगामा खडा कर दिया है. क्योकि राज्य भर मे बांटी जा रही करीब 43000 किताबों मे ऐसी-ऐसी बातें हैं जिनका हकीकत से दूर दूर तक नाता नहीं . और इस विवाद के बीचों बीच एक नाम की चर्चा है दीनानाथ बत्रा का. वह शक्स जिसने ये किताबें लिखी हैं जिन्हे बाकायदा गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री का अनुमोदन हासिल है .

 

बत्रा अब ये दावा कर रहे हैं कि पूरे देश मे इस एजेंडे को लागू करने के लिए उन्हे मानव संसाधान मंत्री स्मृति ईरानी से आश्वासन मिला है . हालाकि ईरानी ने संसद मे देश की शिक्षा मे कोई बूनियादी परिवर्तन से इकार किया है .

 

 

दीनानाथ बत्रा हैं कौन?

 

नई सरकार बनते ही देश के शिक्षा जगत में जितनी चर्चा दीनानाथ बत्रा की हो रही है उतनी शायद ही किसी और की हो. दीनानाथ बत्रा की पूरी कहानी से पहले जरा दीनानाथ बत्रा को लेकर हो रही चर्चाएं भी पढ़ लीजिए.

 

शोभा डे लिखती हैं कि स्कूल के एक रिटार्यड प्रधानाचार्य, दीनानाथ बत्रा अचानक राष्ट्रीय और अतंर्राष्ट्रीय अहमियत हासिल कर लेते हैं. अचानक उनकी शैक्षिक सिफारिशें गंभीरता ली जाने लगती हैं और सिर्फ इस एक शख्स का बेकाबू गुस्सा जाने कितने बेहतरीन शोधों की किस्मत तय कर देता है वह भी सिर्फ इसलिए क्योंकि ये उनकी सोच के दायरे के मुताबिक नहीं था.

 

शोभा डे जिसका जिक्र कर रही हैं वह 84 साल की बुजुर्ग शख्सियत हैं दीनानाथ बत्रा . जिनकी सोच, नजरिया और कामकाज का तरीका अरसे से एक के बाद एक बड़ी बहस खड़ी करता रहा है.

 

दीनानाथ बत्रा वही शख्स हैं जिनका जिक्र देश की संसद में होता है और वह भी तब जब यूपीएससी में सीसैट के पेपर पर भड़के गुस्से को संभालने के लिए नई सरकार के मंत्री संसद में बयान दे रहे होते हैं.

 

दीनानाथ बत्रा वही शख्स हैं जिनकी किताबों को स्कूल में पढ़ाने के लिए गुजरात सरकार बाकायदा एडवायजरी यानी सलाह जारी करती है. और दीनानाथ बत्रा की उन गुजराती किताबों में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजराती में जो प्रस्तावना लिखते हैं उसमें दीनानाथ बत्रा को धन्यवाद देना नहीं भूलते.

 

एक अध्यापक देश के भविष्य को आकार देता है. इसका धन्यवाद दिया जाना चाहिए कि गुजरात पाठ्यपुस्तक मंडल लेखक दीनानाथ बत्रा के साहित्य को प्रकाशित कर रहा है. ऐसी उम्मीद की जाती है कि ऐसा प्रेरणादायी साहित्य छात्रों और अध्यापकों को प्रेरित करेगा.

 

आखिर दीनानाथ बत्रा को इतनी अहमियत क्यों मिलने लगी है? इसकी बड़ी वजह है उनकी विचारधारा. दीनानाथ बत्रा को दक्षिणपंथी विचारधारा या यूं कहें कि आरएसएस की विचारधारा से जुड़ा माना जाता है. यही कनेक्शन अब दीनानाथ बत्रा को चर्चा में ले आया है. सबसे ताजा विवाद है गुजरात में उनकी किताबों के लिए स्कूलों में भेजी गई सरकारी सिफारिश है.

 

दीनानाथ बत्रा ने कई किताबें हिंदी में लिखी हैं- जिन्हें लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं मसलन उन्होंने लिखा है कि भगवान राम ने जिस पुष्पक विमान का इस्तेमाल किया था वह दुनिया का पहला हवाई जहाज था.

 

वैदिक गणित ही असली गणित है और इसे स्कूलों में पढ़ाया जाना चाहिए. हमारे ऋषि दरअसल वैज्ञानिक थे जिनकी तकनीकि, चिकित्सा और विज्ञान की नकल पश्चिमी देशों ने की. जिन किताबों की सिफारिश गुजरात के स्कूलों के लिए की गई है उनमें लिखा है कि जन्मदिन पर केक खाना और मोमबत्ती जलाना गलत है.

 

ऐसी बातों पर जब सवाल उठते हैं तो दीनानाथ बत्रा अपनी किताबों के विवाद पर सफाई भी देते हैं. किताब और मोदी के बीच कोई कनेक्शन होने से भी इंकार देते हैं बत्रा लेकिन ये भी कहते हैं कि अगर मेरी किताबों से शिक्षा का भगवाकरण होता हो तो होने दीजिए.

 

इन्हीं किताबों में एक विवाद अखंड भारत को लेकर दीनानाथ बत्रा की सोच पर भी है जिसमें भारत और पाकिस्तान ही नहीं बल्कि म्यांमार तक को अंखंड भारत में शामिल करके पेश किया गया है. इस मामले में वह संघ से भी आगे निकल गए हैं.

 

ऐसी ही बातों को लेकर वामपंथी प्रगतिशील लेखकों को सख्त ऐतराज है. मशहूर इतिहासकार इरफान हबीब की प्रतिक्रिया देखिए. किताब की सामग्री इतनी वाहियात है कि कोई भी प्रतिक्रिया सतही साबित होगी. मुझे नहीं पता कि जब वह भूगोल को फैंटसी में बदल देंगे तो छात्रों को क्या पढा़एंगे.

 

विवादों के बीच दीनानाथ बत्रा को समर्थन भी मिल रहा है. हिंदू संस्कृति को लेकर दीनानाथ बत्रा की सोच को लेफ्ट और कांग्रेसी विचारधारा से जुड़े लेखक साहित्यकार हिंदू कट्टरवादी बताते रहे हैं जबकि दीनानाथ बत्रा वामपंथी विचारधारा वाले लेखकों पर आरोप लगाते रहे हैं कि देश के साहित्य और इतिहास के साथ अन्याय किया जा रहा है. ये जंग ही दीनानाथ बत्रा को बार बार चर्चा में लाती रही है.

 

शोभा डे लिखती हैं कि हो सकता है कई काम (किताबें, लेख) जांच के दायरे में हों. दीनानाथ के तोड़फोड़ दस्ता साल 2008 से ही सक्रिय है जब दिल्ली विश्वविद्यालय ने उनके दबाव के आगे घुटने टेक दिए थे और ए के रामानुजन के इतिहास के कोर्स से रामायण पर लिखे निबंध को हटा लिया था. तब से ही बत्रा के मुंह में खून लग गया था. अगर ऐसा नहीं हुआ होता तो वो साल 2011 में भगत सिंह के जिक्र को लेकर NCRT की टेक्स्ट बुक के पीछे पड़ने की सोचते भी नहीं.

 

दीनानाथ बत्रा खुद को लेखक नहीं मानते बल्कि वह खुद को किताबों का सोशल ऑडीटर कहते हैं. साल 2014 में अपनी इसी भूमिका को साबित करने के लिए उन्होंने वेंडी डोनिगर की किताब द हिंदू – एन आल्टरनेट व्यू का इतना विरोध किया कि आखिर कार प्रकाश पेंग्विन को ये किताब वापस लेनी पड़ी.

 

शिवराज सिंह चौहान भी दीनानाथ बत्रा की बात नहीं टाल पाए. सेक्स एजुकेशन को स्कूली पढ़ाई से हटाने का फैसला मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने दीनानाथ बत्रा के कहने पर ही किया था.

 

दीनानाथ बत्रा की जिंदगी की बात करें तो उनका जन्म मौजूदा पाकिस्तान के डेरा गाजीखान में हुआ था. लाहौर यूनिविर्सिटी में पढ़ाई के बाद उन्होंने टीचर की नौकरी कर ली. कुरुक्षेत्र के श्रीमद भागवत गीता कॉलेज में प्रधानाचार्य भी रहे और रिटायर होते ही शिक्षा के क्षेत्र में एक नई भूमिका उनका इंतजार कर रही थी.

 

दीनानाथ बत्रा बीजेपी और आरएसएस के लोगों के साथ मिलते जुलते नजर आते हैं . मंच साझा करते हैं और अहम मुद्दों पर अपनी बड़ी सलाहें देने से भी नहीं चूकते. संघ की विचारधारा का समर्थक होने की वजह से दीनानाथ को आरएसएस के स्कूल चलाने वाले विद्याभारती का महासचिव बना दिया गया था.

 

दीनानाथ बत्रा की विद्याभारती में क्या भूमिका थी ये इसी बात से साफ हो जाता है कि साल 2001 में कांग्रेस ने विद्याभारती की किताबों में सती प्रथा और बाल विवाह जैसी बातों के जिक्र पर एक प्रस्ताव पास किया था. इस आरोप के खिलाफ दीनानाथ बत्रा ने सोनिया गांधी को एक कानूनी नोटिस भेज दिया था. उस वक्त वह विद्याभारती के महासचिव थे और तत्कालीन मानव संसाधन मंत्री मुरली मनोहर जोशी के सलाहकार भी.

 

इन दिनों दीनानाथ बत्रा शिक्षा बचाओ आंदोलन समिति के जरिए शिक्षा में बदलाव की लड़ाई लड़ रहे हैं. दीनानाथ बत्रा की शिक्षा बचाओ आंदोलन समिति की देश भर में 26 शाखाएं हैं. फिलहाल उनके एजेंडे में शामिल है नई मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी को सीबीएसई के पाठ्यक्रम में बदलाव के लिए कोठारी समिति की सिफारिशें मानने के लिए मनाना.

 

हालांकि बत्रा ने अब तक स्मृति ईरानी से मुलाकात नहीं की है. खुद उनकी मानें तो वह तभी जाएंगे जब स्मृति ईरानी बुलाएंगी.

 

चर्चा इस बात की है कि क्या नई सरकार में दीनानाथ बत्रा स्कूली पढ़ाई से लेकर उच्च शिक्षा को लेकर होने वाले फैसले पर दीनानाथ बत्रा की छाप दिखेगी. ये सवाल इसलिए क्योंकि गुजरात में उनकी किताबों को सरकारी स्कूलों तक पहुंचाने की सिफारिश तो हो ही चुकी है.

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