जानें: बैंगलुरू में कैसे-कैसे सीएम केजरीवाल का होगा इलाज!

By: | Last Updated: Wednesday, 4 March 2015 5:41 PM

नई दिल्ली: दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल 10 दिन की सिक लीव पर हैं और अपना इलाज कराने के लिए बैंगलुरू जा रहे हैं. ना तो डायबिटीज पर डॉक्टर काबू कर पा रहे हैं और ना ही उनकी खांसी रुक रही है इसलिए केजरीवाल ने अपने माता-पिता के साथ बैंगलुरू जाने का फैसला किया है जहां नैचुरोपैथी से उनका इलाज किया जाएगा.

 

10 दिन तक अरविंद केजरीवाल के शरीर पर ठंडी मिट्टी का लेप लगाया जाएगा, कई लोगों के साथ लाफिंग योगा में ठहाके लगाएंगे, सिर में तेल मालिश की जाएगी.

 

ये सब कुछ अरविंद केजरीवाल के उस इलाज का हिस्सा है जो बैंगलुकू के Jindal Naturecure Institute में उन्हें दिया जाएगा.

 

46 साल के अरविंद केजरीवाल हर काम कर रहे थे, लेकिन उनकी डायबिटीज बिल्कुल कंट्रोल नहीं हो रही है. फास्टिंग यानी खाना खाने से पहले केजरीवाल की शुगर 180 से 190 के बीच थी, जबकि खाना खाने के बाद शुगर 300 तक हो जा रही थी.

 

खराब तबीयत की वजह से केजरीवाल पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में भी हिस्सा नहीं ले रहे हैं. आम आदमी पार्टी के अंदर घमासान मचा है लेकिन बीमारी की गंभीरता देखते हुए केजरीवाल ने अपने माता-पिता के साथ बैंगलुरू जाने का फैसला किया है. 5 मार्च से 15 मार्च तक केजरीवाल बैंगलुरू में इलाज करवाएंगे.

 

केजरीवाल की डायबिटीज पर काबू पाने के लिए डॉक्टरों ने इंसुलिन के डोज भी बढ़ा दिए थे लेकिन ये भी कारगर नहीं हुआ है. केजरीवाल के फैमिली डॉक्टर विपिन मित्तल के मुताबिक दिल्ली चुनाव के दौरान केजरीवाल की सेहत सबसे ज्यादा बिगड़ी क्योंकि वो ना तो टाइम पर खाते थे ना तो टाइम पर सोते थे. कई बात तो रात में 3 घंटे से भी कम सोते थे और शाम को 4 बजे लंच करते थे.

 

केजरीवाल भारी बहुमत के साथ दिल्ली के सीएम बने लेकिन 14 फरवरी को जब शपथ लेने रामलीला मैदान पहुंचे थे क्रोसिन खाकर आए थे.

केजरीवाल लगातार बीमार रहे पहले बुखार फिर डायरिया और अब लगातार बढ़ती डायबिटीज. खांसी तो खैर जाने का नाम ही नहीं लेती इसलिए अब वो नैचुरोपैथी से इलाज करवाने जा रहे हैं .नेचुरोपैथी का मतलब होता है बिना दवा के प्राकृतिक तरीकों से इलाज करना. केजरीवाल इससे पहले भी बैंगलुरू के Jindal Naturecure Institute में अपना इलाज करवा चुके हैं. दरअसल साल 2012 में जब अन्ना अनशन के बाद बीमार पड़ गए थे तो उन्हें केजरीवाल इलाज के लिए बैंगलुरू लेकर आए थे

 

अरविंद केजरीवाल की डायबिटीज पर जल्द काबू करना जरूरी है क्योंकि बढ़ी हुई डायबिटीज का बुरा असर किडनी और दिल पर पड़ता है.

 

बैंगलुरू के Jindal Naturecure Institute में मरीजों का इलाज दवा के इस्तेमाल से नहीं बल्कि बीमारी से बचाने के लिए जड़ी बूटियां, एक्यूपंक्चर, योग और प्राणायाम जैसे तरीके अपनाए जाते हैं. बैंगलुरू के जिंदल नगर में 100 एकड़ में बने इंस्टिट्यूट में एडमिट होने के साथ ही एक डॉक्टर आपके लिए नियुक्त कर दिया जाता है.

 

11 दिनों तक Jindal Naturecure में इलाज करवाने वाले अजीत बालकृष्णन अपने ब्लॉग में लिखा है कि सुबह 5 बजे लता मंगेशकर के भजन के साथ दिन की शुरुआत होती है.

 

जगने के साथ ही 2-3 गिलास पानी पिलाया जाता है. सबसे पहले पेड़ पौधों के बीच झील किनारे एक घंटे टहलना होता है. फिर जलनेति जैसी क्रियाएं होती हैं. सुबह 7 बजे आधे घंटे तक लाफ्टर योगा का सेशन होता है. इसके बाद मरीजों के शरीर पर ठंडी मिट्टी का लेप लगाया जाता है केजरीवाल को नैचुरोपैथी पर कितना भरोसा है इसकी एक बानगी सुंदर नगरी के अनशन के वक्त भी मिली थी डायबिटीज के मरीज केजरीवाल दिन तक अनशन पर थे लोग हैरान थे कि केजरीवाल भूखे कैसे रह सकते हैं उस वक्त भी केजरीवाल पेट पर मिट्टी का लेप लगाकर संतुलन बनाते थे.

 

रोज सुबह एक घंटा धूप में गुजारते थे, हल्का प्राणायाम और आसन करते थे और थोड़ा-थोड़ा करके दिन भर में दस लीटर पानी पी जाते थे.

 

जिंदल Naturecure में मिट्टी के लेप के साथ-साथ तेल और पाउडर की मसाज से भी इलाज किया जाता है. नीम हल्दी और एलोवेरा का पेस्ट पूरे शरीर पर लगाकर आधे घंटे तक धूप में बिठा दिया जाता है. सुबह 9 बजे योगा का वक्त होता है. खाने-पीने से लेकर पूरी लाइफ स्टाइल को इलाज में शामिल किया जाता है.

 

दिन में दो बार खाना दिया जाता है पहली बार सुबह 11.30 बजे कुछ खाने को मिलता है. लंच के बाद कुछ देर सोने के लिए वक्त दिया जाता है और दोपहर 2 बजे से दोबारा इलाज शुरू हो जाता है दोपहर बाद का इलाज बीमारी के हिसाब से सबके लिए अलग अलग होता है.

 

अलग अलग मरीज और बीमारी के हिसाब से खाना तय होता है केजरीवाल को खाने के लिए क्या मिलेगा ये तो नहीं पता लेकिन जो लोग वहां इलाज के लिए गए उनमें से कुछ को कई दिनों तक सिर्फ एक कप सूप, पपीते और तरबूज की एक-एक स्लाइस, और एक ग्लास सोया मिल्क दिया गया. रात का खाना शाम 5.30 बजे से 6 बजे के आसपास मिल जाता है.

 

नेचुरोपैथी का बुनियादी विचार ये है शरीर मिट्टी, आकाश, पानी, आग और हवा इन पांच चीजों से मिलकर बना है. स्वस्थ्य शरीर में ये पांचों संतुलन में रहते हैं और इनका संतुलन बिगड़ने पर आदमी बीमार पड़ता है. नेचुरौपैथी के जरिए इनका संतुलन प्राकृतिक तरीकों से बनाया जाता है.

 

जिंदल नेचरक्योर इंस्टिट्यूट डॉ. सीताराम जिंदल ने शुरू किया था. सीताराम जिंदल, जिंदल एल्यूमिनियम लिमिटेड कंपनी के मालिक हैं.

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Web Title: Delhi CM on sick leave
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