केरजरीवाल, बेदी या माकन अब जनता करेगी फैसला

By: | Last Updated: Friday, 6 February 2015 5:40 PM

नई दिल्ली: एक साल बाद एक बार फिर दिल्ली की जनता अपने सीएम को चुनने को तैयार है. सात फरवरी को होने वाले मतदान के लिए सारी तैयारियां पूरी कर ली गयी हैं. कयास लगाए जा रहे हैं कि बीजेपी और आम आदमी पार्टी के बीच इस रोमांचक मुकाबले को जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जनमत संग्रह बताया जा रहा है, वहीं बीजेपी नेतृत्व ने इससे इनकार किया है.

 

दिल्ली विधानसभा की कुल 70 सीटों पर होने जा रहे चुनाव में 1.33 करोड़ से अधिक मतदाता कुल 673 उम्मीदवारों के राजनीतिक भविष्य का फैसला करेंगे.

 

मतदान 12,177 मतदान केंद्रों पर होगा. इनमें से 714 की पहचान ‘‘संवेदनशील’’ मतदान केंद्रों के रूप में की गई है जबकि 191 ‘‘अति संवेदनशील’’ हैं.

 

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सुबह आठ बजे से शाम छह बजे के बीच मतदान के दौरान किसी अप्रिय घटना को टालने तथा मतदाताओं को लुभाने के लिए शराब और धनबल के दुरूपयोग की खातिर सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए हैं.

 

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संवेदनशील मतदान केंद्रों की संख्या में वृद्धि होने के साथ ही सुरक्षाकर्मियों की संख्या में भी इजाफा किया गया है.

 

राष्ट्रीय राजधानी पर नियंत्रण को लेकर आम आदमी पार्टी पूरी तरह से मोदी की छवि पर निर्भर बीजेपी को कड़ी टक्कर दे रही है.

 

दिल्ली में पिछले 16 वर्ष से सत्ता से दूर बीजेपी ने टीम अन्ना की पूर्व सदस्य किरण बेदी को पार्टी में लाकर और उन्हें मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दांव खेला है. बताया जाता है कि इससे पार्टी के कुछ नेता और पदाधिकारी तथा कार्यकर्ता नाखुश हैं. बीजेपी के विरोधी इस बात पर जोर दे रहे हैं कि चुनाव के नतीजे मोदी सरकार के प्रदर्शन पर जनमतसंग्रह होंगे.

 

वित्त मंत्री अरूण जेटली ने इस विचार को खारिज करते हुए कहा कि बीजेपी और आप के बीच मुकाबले का मतलब सुशासन और अराजकता में से किसी एक विकल्प को चुनना है. इस बीच दिल्ली के ऐतिहासिक जामा मस्जिद के इमाम बुखारी ने एक बयान जारी कर मुस्लिमों को आप के पक्ष में मतदान करने को कहा. लेकिन पार्टी ने इस पेशकश को खारिज कर दिया.

 

बीजेपी की रणनीति का जवाब अरविन्द केजरीवाल नीत आप ने दिया है और पार्टी ने पिछले लोकसभा चुनाव से उठी मोदी लहर को रोकने के लिए धुआंधार प्रचार अभियान चलाया.

 

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और केंद्रीय मंत्री एम वेंकैया नायडू ने इस बात को खारिज किया है कि दिल्ली का चुनाव मोदी सरकार के कामकाज पर जनमत संग्रह होगा. आलोचकों ने इस बयान को प्रधानमंत्री को किसी तरह की आलोचना से बचाने के प्रयास के रूप में देखा है दिसंबर 2013 तक दिल्ली पर 15 साल शासन कर चुकी कांग्रेस को सर्वेक्षणों में आप और बीजेपी से काफी पीछे दिखाया गया है. कुछ सर्वेक्षणों में आप को पूर्ण बहुमत मिलने की संभावना जतायी गयी है. कुछ सर्वेक्षणों में बीजेपी की जीत की भविष्वाणी की गई है .

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Web Title: delhi election
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