JNU ROW: हाईकोर्ट ने पुलिस प्रमुख बी एस बस्सी के खिलाफ दायर याचिका खारिज की

By: | Last Updated: Monday, 29 February 2016 2:39 PM
Delhi hc relief delhi police commissioner bs bassi

नई दिल्ली: जेएनयू देशद्रोह मामले की जांच को कथित तौर पर ‘प्रभावित’ करने के लिए पुलिस प्रमुख बी एस बस्सी के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने वाली एक याचिका को आज दिल्ली हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया. अदालत ने कहा कि यह याचिका ‘‘प्रचार’’ के लिए है और अदालतों पर ऐसी याचिकाओं का बोझ नहीं डाला जा सकता.

मुख्य न्यायाधीश जी रोहिणी और न्यायाधीश जयंत नाथ ने सुनवाई शुरू होने के तत्काल बाद कहा, ‘‘आपने यह याचिका क्यों दायर की? हम इस बात पर हैरान हैं कि यह जनहित में नहीं बल्कि प्रचार हित में है.’’ पीठ ने याचिकाकर्ता से यह भी पूछा कि वह किस आधार पर ये आरोप लगा रहा है? याचिकाकर्ता सतीश पांडे की ओर से पेश हुए वकील ने अखबार में छपीं खबरों का हवाला दिया और कहा कि याचिका बस्सी की ओर से दिए गए बयान पर आधारित है, जो मीडिया में व्यापक तौर पर प्रकाशित हुआ था.

इसपर पीठ ने कहा, ‘‘हम अखबार की खबरों के अनुरूप नहीं चलेंगे. यदि आपके पास इन अखबारों की खबरों के अलावा कुछ और सामग्री है तो आप हमें बता सकते हैं.’’ इस संक्षिप्त सुनवाई के दौरान वकील ने कहा कि याचिका प्रचार के लिए नहीं है. इसके बाद उन्होंने एक बार फिर अखबार की खबरों का हवाला दिया.

इसपर पीठ ने कहा, ‘‘हम इस तरह की याचिकाओं का बोझ इस अदालत पर नहीं डाल सकते. अखबार की खबरों के अलावा हमें कोई अन्य सामग्री नहीं मिली है. रिट याचिका खारिज की जाती है.’’ पीठ ने यह भी कहा कि मामला सुप्रीम कोर्ट की जानकारी में है और जांच अभी अधूरी है.

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि बस्सी का बयान- ‘पुलिस जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार की जमानत याचिका का विरोध नहीं करेगी’- दरअसल इस मामले में निष्पक्ष एवं स्पष्ट जांच के साथ-साथ अदालती कार्रवाई को भी प्रभावित कर सकता है.

याचिका में दावा किया गया कि पुलिस ‘‘कुछ ऐसे राजनीतिक दलों के हाथों में खेल रही है, जिनके अंतर्गत दिल्ली पुलिस काम कर रही है.’’ याचिका में कहा गया कि बस्सी को निर्देश दिए जाने चाहिएं कि वह 16 फरवरी और 17 फरवरी को दिए अपने बयानों पर अपने विचार स्पष्ट करें.

अपनी याचिका में पांडे ने दावा किया था कि पुलिस आयुक्त जैसे उच्च स्तर के अधिकारी की ओर से ‘बेवजह दबाव’ बनाए जाने की स्थिति में ऐसे किसी मामले में कोई जांच अधिकारी मामले की जांच निष्पक्ष ढंग से नहीं कर सकता.

याचिकाकर्ता ने अदालत से अनुरोध किया था कि वह बस्सी को जांच प्रभावित न करने का निर्देश दे.

पांडे ने दावा किया था, ‘‘आरोपियों के खिलाफ देशद्रोह और आपराधिक साजिश के आरोप कोई अकेले व्यक्ति द्वारा अंजाम दिया गया अपराध नहीं है बल्कि एक सार्वजनिक अपराध है और देश का हर नागरिक प्रभावित है.’’ बस्सी के अलावा, याचिकाकर्ता ने कन्हैया, केंद्र और दिल्ली सरकार को प्रतिवादी बनाया था.

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