जानें- दुनिया से कितनी पीछे है हमारी मेट्रो

By: | Last Updated: Thursday, 4 June 2015 4:59 AM
Delhi metro

नई दिल्ली: जयपुर मेट्रो भारत की सबसे आधुनिक मेट्रो सेवा बन गई है और छह शहरों में मौजूद मेट्रो ने कैसे हमारी जिंदगी बदली है. लेकिन एक सच ये भी है कि हम दुनिया भर के मेट्रो नेटवर्क के मुकाबले बेहद पीछे हैं. कितना पीछे हैं ये देखिए.

 

साल 1984 में जब कोलकाता में देश की पहली मेट्रो सेवा शुरू हुई तो इसे कोलकाता ने अपनी पहचान से जोड़ लिया था. देश की एकता के लिए तैयार किए गए इस गीत (मिले सुर मेरा तुम्हारा) में कोलकाता का परिचय इसी मेट्रो ट्रेन के जरिए दिया जाता था. ये भारत के लिए नया प्रयोग था लेकिन इसने भारत को दुनिया के उस मेट्रो क्लब में शामिल कर दिया था जिसकी शुरुआत लंदन मेट्रो से हुई थी. कोलकाता इस क्लब का 70 वां सदस्य बना था 

 

लेकिन 3 जून को जयपुर में मेट्रो की शुरुआत हुई तो मेट्रो क्लब में शामिल होने वाले शहरों में उसका नाम 161 वें नंबर पर लिखा गया. यानी भारत इस दौड़ में पहले भी पिछड़ा था और अब भी पिछड़ा हुआ है. दुनिया भर की शानदार मेट्रो ट्रेनों की बात करें तो

  • दुनिया में कुल 55 देशों में मेट्रो रेल सेवाएं मौजूद हैं

  • इन 55 देशों में 160 शहर में मेट्रो ट्रेनें दौड़ती हैं

  • इसमें सबसे पुरानी रेल सेवा है लंदन की अंडरग्राउंड मेट्रो

  • लेकिन सबसे बड़ी मेट्रो सेवा है शंघाई की मेट्रो रेल

 

भारत की सबसे बड़ा मेट्रो नेटवर्क है दिल्ली एनसीआर मेट्रो नेटवर्क. लेकिन दुनिया का सबसे बड़ा मेट्रो नेटवर्क चीन के शंघाई शहर में है. ये ना सिर्फ तकनीक में आगे है बल्कि दुनिया की कुछ सबसे तेज मेट्रो ट्रेनों में भी गिनी जाती है.

फर्क देखिए

  • दिल्ली मेट्रो की लंबाई है 195 किलोमीटर

  • शंघाई मेट्रो की लंबाई है 548 किलोमीटर

 

दुनिया की एक और मेट्रो रेल सेवा को देखिए ये है अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर की मेट्रो सेवा जिसका नाम है न्यूयॉर्क सिटी सबवे. इसकी खासियत ये है कि पूरी दुनिया में जितने स्टेशनों पर ये ट्रेन रुकती है उतनी कोई दूसरी मेट्रो सेवा नहीं रुकती.
 

फर्क देखिए

  • दिल्ली मेट्रो पर कुल स्टेशन हैं 147

  • लेकिन न्यूयॉर्क की सबवे सेवा 421 स्टेशनों पर रुकती है

 

चीन की मेट्रो सेवाएं भारत से कई लिहाज से बेहतर हैं। आपको चीन की राजधानी बीजिंग की मेट्रो सेवा की तस्वीरें भी दिखाते हैं। ये सेवा भी भारत के मुकाबले इसलिए बेहतर है क्योंकि ये दुनिया में सबसे ज्यादा मुसाफिरों को उनकी मंजिल पर पहुंचाती है

 

फर्क देखिए

  • दिल्ली मेट्रो का इस्तेमाल हर रोज औसतन 24 लाख लोग करते हैं

  • लेकिन बीजिंग की मेट्रो सेवा का इस्तेमाल हर रोज करीब 9 करोड़ 34 लाख लोग सफर करते हैं
     

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