दिल्ली के स्कूलों में इस साल नहीं होंगे नर्सरी के दाखिले ?

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नई दिल्ली: क्या दिल्ली के स्कूलों में इस साल नहीं होंगे नर्सरी के दाखिले ये सवाल खड़ा हुआ नर्सरी एडमिशन की आज हुई सुनवाई के बाद. क्योंकि मामले की सुनवाई करते हुए हाइकोर्ट ने टिप्पड़ी की जिस तरह से इस मामले की सुनवाई चलती जा रही है कहीं ऐसा न हो की ये साल ज़ीरो इयर हो जाए यानी की बिना कोई दाखिले वाला साल.

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कोर्ट ने इसके साथ ही अदालत में मौजूद मनीष सिसोदिया से भी पूछा की अगर आपको शिकायत मिलीं थी तो आपने उनपर कार्रवाई क्यों नहीं की. सुनवाई के दौरान आज दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया एक बार अदालत में पेश हुए.

अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार के वकील ने दलील देते हुए कहा कि

  • सरकार को शिकायत मिली थी स्कूल दाखिले के दौरान मैनेजमेंट कोटा के तहत पैसा मांग रहे थे.
  • मैनेजमेंट कोटा एक रैकेट है जो स्कूल्स की तरफ से चलाया जा रहा है.
  • वकील ने कहा की मनीष सिसोदिया को पेरेंट्स ने शिकायत की थी और सिसोदिया उन शिकायतों को लेकर हाइकोर्ट में आये हैं.
  • स्कूलों ने ऐसे क्राइटेरिया बनाये जो मनमाने थे मसलन माता पिता शराब पीते हैं की नहीं, धूम्रपान करते हैं की नहीं, कितने पढ़े लिखे हैं, कितना कमाते हैं, आदि आदि.

दिल्ली सरकार के वकील के दलीलों पर सुनवाई करते हुए हाइकोर्ट ने एक एक कर कई सवाल खड़े किये और कहा, “अगर इसी तरह से मामले की सुनवाई चलती रही तो ये साल जीरो इयर भी हो सकता है और कोर्ट ये नहीं चाहती. कम से कम दाखिला होने दीजिये वर्ना बच्चों का दाखिला नहीं हो पायेगा इस साल.”

इसके साथ ही अदालत ने कहा, ”अगर आप लोगों को आदेश जारी करने हैं तो समय रहते जारी करें जिससे कि जब मामला अदालत में आये तो उस पर सुनवाई हो सके. अब हमको ये भी देखना है की कैसे दाखिला न प्रभावित हो, बच्चों और अभिवाकों के लिए परेशानी न हो. आपने स्कूलों से ये नहीं कहा की आप मनमानी मत करिये आपने कहा की कोई कोटा नहीं होना चाहिए.”

हाइकोर्ट ने पूछा कि सरकार का इन विषयों पर क्या कहना है. गांगुली कमिटी के सुझाव पर, 2007 में जारी उपराज्यपाल का नोटिफिकेशन पर, और हाइकोर्ट के डबल बेंच के आदेश पर.

हाइकोर्ट ने कहा की समाज बदल रहा है ज़रूरी है की अच्छे स्कूल चलते रहें. अपनी इच्छा से स्कूल चलाने में बुराई नहीं नहीं है पर मनमानी जिससे लोगों को नुकसान हो वहां पर सवाल उठाना सही है. अदालत में मौजूद शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने खुद भी सरकार का पक्ष अदालत में रखा मनीष सिसोदिया ने कहा, ”हम कोशिश कर रहे हैं की हालात सुधरें नेताओं ने स्कूलो से फायदा लेने के लिए स्कूल खुलवा दिए. हाइकोर्ट ने कहा की आपको सरकारी स्कूल के हालात सुधारने ही होंगे. प्राइवेट स्कूल 100 रूपये खर्च नहीं करते और 300-400 रूपये कमाते हैं.”

कोर्ट ने कहा अगर आपके पास सबूत है तो आप कार्रवाई कीजिये. आप 3 महीने से इस पर कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे. सिसोदिया ने कहा कि अगर स्कूल सीटें बेचते नहीं है तो इनको इस आदेश से आपत्ति क्या है. सिसोदिया ने कहा की स्कूल लूट का अड्डा बना हुआ है इसको सरकार और कोर्ट को मिलकर रोकना होगा

जिसके बाद कोर्ट ने सिसोदिया से कहा, ”आप कार्रवाई कीजिये किसी ने आपको रोका नहीं है, बुराई को स्वीकार नहीं किया जा सकता. आप कार्रवाई कीजिये तुरंत कार्रवाई कीजिये. आपको किसी ने रोका नहीं है. दिखाने के लिए ही आप कार्रवाई कीजिये जिससे की लोगों में डर हो.”

कोर्ट ने सिसोदिया से कहा की आपके पास पूरी मशीनरी है आप कार्रवाई कीजिये.कोर्ट ने कहा की सील्ड कवर में नाम/शिकायत देने से कुछ नहीं होगा आप खुद कार्रवाई कीजिये. अगर सरकार कुछ नहीं करेगी तो कौन करेगा कोर्ट के ऊपर सब छोड़ देना सही नहीं है.

सिसोदिया ने कहा की हम स्कूलों को खुला नहीं छोड़ सकते मनमानी के लिए. मामले पर सुनवाई के दौरान दिल्ली हाइकोर्ट ने दिल्ली सरकार के उस सर्कुलर पर भी सवाल खड़े किये जिसके तहत मैनेजमेंट कोटा खत्म करने का आदेश जारी किया गया था. कोर्ट ने दिल्ली सरकार से कहा कि

सिर्फ एडमिनिस्ट्रेटर (उपराज्यपाल) ही सर्कुलर जारी कर सकता है न की वो अधिकारी जिसने जारी किया. सरकार ने दलील दी कि एलजी की पॉवर शिक्षा निदेशक को डेलिगेट की गयी हैं और एलजी कौंसिल ऑफ़ मिनिस्टर की सलाह पर ही कर सकते हैं.

कोर्ट ने कहा कि अगर ये बातमां भी ली जाए कि एलजी मंत्रियों के समूह की सलाह पर काम करते हैं तो भी आदेश/सर्कुलर तो उपराज्यपाल ही जारी कर सकते हैं.

कोर्ट ने कहा कि अगर कैबिनेट का फैसला है भी तो भी उपराज्यपाल को ही आदेश/सर्कुलर जारी करना होगा. कैबिनेट का फैसला सलाह ही हो सकता है आदेश नहीं.

कोर्ट ने कहा कि कई नए तथ्य हैं जिनको देखना ज़रूरी है. पर दाखिले का अंतरिम इंतज़ाम करना भी ज़रूरी है. अब इस मामले की अगली सुनवाई सोमवार यानी 1 फ़रवरी को होगी जब स्कूलों के वकील को अपनी दलील अदालत में रखनी होगीं.

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