जासूसी कांड के घेरे में मुकेश अंबानी की कंपनी, अब तक सात लोग गिरफ्तार

By: | Last Updated: Friday, 20 February 2015 1:42 AM

नई दिल्ली:  केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय से दस्तावेज लीक होने के मामले में दो और गिरफ्तारियां हुई हैं. एक पूर्व पत्रकार तथा एक कंपनी के कर्मचारी को गिरफ्तार किया गया है.  शांतनु सैकिया को गिरफ्तार किया गया है. दूसरा गिरफ्तार शख्स है प्रयास जैन जो ऑस्ट्रेलिया की एनर्जी कंपनी मेडिट का प्रमुख है.

शांतनु सैकिया कई साल तक आपराधिक घटनाओं की रिपोर्टिग कर चुके हैं और फिलहाल वह एक वेब पोर्टल चलाते हैं. उन्हें शुक्रवार सुबह पेट्रोलियम मंत्रालय का गोपनीय दस्तावेज औद्योगिक घरानों को उपलब्ध कराने के मामले में गिरफ्तार किया गया.

 

इस मामले में मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस के एक कर्मचारी को हिरासत में भी लिया गया है.  इससे पहले पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का चपरासी, मंत्रालय का एक क्लर्क समेत पांच लोगों की गिरफ्तारी हुई थी. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार के नीतिगत फैसलों, बैठकों के ब्योरे, मंत्रालय के आदेशों और प्रस्तावों की जासूसी होती थी. जासूसी मंत्रालय की गोपनीय जानकारी कंपनियों, थिंक टैंक और लॉबिस्टों तक पहुंचाते थे. जासूसों का गैंग पेट्रोलियम मंत्रालय के दस्तावेज चुराता था औऱ 5 से 10 हजार में बेचता था.

 

इस मामले ने 1980 के दशक की जासूसी कांड की यादों को ताजा कर दिया है. ऐसा बताया जा रहा है कि कुछ पत्रकारों, जिन्होंने स्वतंत्र उर्जा सलाहकार होने का दावा किया, सहित कुछ पेट्रोलियम कंपनियों के कर्मचारियों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है. इस घटनाक्रम ने राजनीतिक और कॉरपोरेट हलके में सनसनी मचा दी है.

 

कौन-कौन हुआ गिरफ्तार

गुरूवार रात दिल्ली पुलिस ने जिन लोगों को गिरफ्तार किया है उनमें आसाराम, ईश्वर सिंह  मंत्रालय के ही कर्मचारी हैं. इन दोनों में एक क्लर्क हैं तो दूसरे प्यून हैं. इसके साथ ही पुलिस ने राकेश, लतन और चौबे को गिरफ्तार किया है. पुलिस फिलहाल ने सभों से पूछताछ कर रही है. पुलिस का कहना है कि जांच अभी शुरुआती दौर में है. इसलिए किसी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाज़ी होगी. हालांकि पुलिस ये इशारा जरूर दे रही है कि ये जासूसी किसी कंपनी के लिए हो सकती है.

 

जिन दस्तावेज़ों को लीक करने की कोशिश की जा रही थी, वे गोपनीय दस्तावेज़ थे और इन गोपनीय दस्तावेज़ों तक किसी क्लर्क और प्यून की पहुंच नहीं होती, जिससे ये जाहिर होता है कि इस जासूसी कांड में कोई बड़ा अधिकारी भी शामिल हो सकता है.

 

दिल्ली पुलिस का बयान

मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए दिल्ली पुलिस आयुक्त बी. एस. बस्सी ने कहा, सूचना मिली थी कि अपने सहयोगियों के साथ मिलकर दो लोग ‘17 फरवरी को शास्त्री भवन स्थित पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के कार्यालय में अनधिकृत तरीके से प्रवेश कर सरकारी दस्तावेज खरीदने, प्राप्त करने और चोरी करने’ में शामिल हैं.

 

उन्होंने बताया कि ये लोग रात में प्रवेश करते थे. बस्सी ने कहा, ‘‘जाल बिछाया गया और तीन लोग इंडिगो कार में सवार होकर शास्त्री भवन आए. दो लोग कार से नीचे उतरे जबकि तीसरा कार में बैठा रहा. करीब दो घंटे बाद जब दो लोग वापस कार में बैठे तो तीनों को गिरफ्तार कर लिया गया.’’

 

उनकी पहचान लालता प्रसाद (36), राकेश कुमार (30) और राज कुमार चौबे (39) के रूप में हुई है. उनके पास से सरकारी दस्तावेज बरामद हुए हैं. सूत्रों ने बताया कि इस मामले में अगले कुछ दिनों में और लोगों की गिरफ्तारी होने की संभावना है. इसकी जांच दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा कर रही है.

 

दिल्ली पुलिस आयुक्त बी. एस. बस्सी ने कहा कि फोटोकॉपी करके इन दस्तावेजों को धन के एवज में लीक किया गया था. जांचकर्ता जल्द ही दस्तावेज पाने वालों को गिरफ्तार करेंगे. उन्होंने कहा कि गोपनीय दस्तावेजों की चोरी और लीक संभवत: कई सालों से चल रही थी. आयुक्त ने कहा कि गोपनीय दस्तावेजों को कुछ स्वतंत्र सलाहकारों और उर्जा कंपनियों को लीक किया गया है और उनमें से कुछ से पूछताछ की जा रही है.

 

पुलिस के मुताबिक पूछताछ के दौरान पता चला है कि लालता प्रसाद और राकेश कुमार भाई हैं. दोनों पहले शास्त्री भवन में मल्टी टास्किंग स्टाफ के रूप में कार्यरत थे. संयुक्त आयुक्त रवींद्र यादव ने बताया, ‘‘साल 2012 में दोनों ने नौकरी छोड़ दी. शास्त्री भवन में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने महसूस किया कि वे आधिकारिक दस्तावेजों पर आसानी से हाथ डाल सकते हैं.’’

 

यादव ने बताया, ‘‘उन्होंने यह भी खुलासा किया कि इसमें उनके पिता आसाराम और ईश्वर सिंह (दोनों शास्त्री भवन में मल्टी टास्किंग कर्मचारी) ने सहायता की. इसके बाद आसाराम (58) और ईश्वर सिंह (56) को भी गिरफ्तार कर लिया गया.’’

 

यादव ने कहा, ‘‘हमने एओपीएनजी अधिकारियों के कार्यालयों में जाने के लिए उनके द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली डुप्लिकेट चाबी, फर्जी पहचान पत्र और कपटपूर्ण तरीके से हासिल टेंपोररी पास भी बरामद कर ली है.’’ यादव ने कहा, ‘‘इंडिगो कार पर अनधिकृत निशानी थी जिसके जरिए इसे भारत सरकार का बताया गया था और मामला पुलिस की अपराध शाखा में दर्ज कर लिया गया है.’’

 

रिलायंस का पक्ष

रिलायंस ने हिरासत की बात कबूली है. रिलायंस का कहना है कि मंत्रालय की जानकारी से फायदा नहीं है. कंपनी के एक अधिकारी ने कहा, ‘‘हमारे पास ज्यादा जानकारी नहीं है. हमारे गंभीर आंतरिक मानकों के तहत जांच की जा रही है. कानून के तहत मामले की जांच की जा रही है और हम हर संभव तरीके से इसमें सहयोग करने को प्रतिबद्ध हैं.’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम पहले से ही इस मंत्रालय के साथ सभी महत्वपूर्ण मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता में हैं. हमारी एकमात्र यही उम्मीद है कि मध्यस्थ द्वारा हमारे कानूनी अधिकारों एवं दावों का निष्पक्ष एवं तेज गति से समाधान निकाला जाएगा.’’

 

कंपनी ने पहले अपने बयान में कहा था मंत्रालय के पास ऐसी कोई सूचना नहीं है, जो उसके व्यावसायिक उपयोग की हो. हालांकि बाद में कंपनी ने अपना यह बयान वापस ले लिया है.

 

पेट्रोलियम मंत्री का बयान

सूचनाएं लीक होने को गंभीर मामला बताते हुए पेट्रोलियम मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा कि निजी कंपनियों को कथित रूप से दस्तावेज लीक करने वाले मंत्रालय के कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

 

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, ‘‘उनके साथ सख्ती से निपटा जाएगा. पुलिस मामले की जांच कर रही है. दोषियों के खिलाफ हम कड़ी कार्रवाई करेंगे. सरकार उनके साथ सख्ती से पेश आएगी.’’ यह पूछने पर कि क्या इसमें ‘कॉरपोरेट लॉबी’ शामिल है, पेट्रोलियम मंत्री ने कहा कि इसकी जांच पुलिस को करनी है. उन्होंने कहा, ‘‘सरकार सचेत है. एजेंसियां जांच कर रही हैं. वो सभी तथ्यों के साथ आएंगे.’’

 

प्रधान ने कहा कि इस मामले में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा. उन्होंने कहा, ‘‘इस तरह की बातों पर सरकार बेहद सख्त है. कानून के दायरे में इसमें शामिल सभी लोगों के खिलाफ बेहद सख्त कार्रवाई की जाएगी.’’ आधिकारिक दस्तावेजों के सार्वजनिक दायरे में आने के बाद सतर्कता रखी जा रही है. उन्होंने उनके मंत्रालय और बाहर के दो से तीन लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है.

 

उन्होंने कहा कि आधिकारिक दस्तावेजों का लीक होना स्वतंत्र और निष्पक्ष सरकार चलाने की राह में बाधा है. उन्होंने कहा कि इस मामले में कानून अपना काम करेगा. उन्होंने कहा, ‘‘इसके पीछे जो भी है…जो कोई भी इसके पीछे है उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. पुलिस को अपना काम करने दिया जाए. सबकुछ सामने आएगा.’’

 

दफ्तर बंद होने के बाद डुप्लीकेट चाबी से घुसते थे जासूस

हाल में शास्त्री भवन में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे. सीसीटीवी कैमरों की निगरानी से बचने के लिए जब वे शास्त्री भवन में प्रवेश करते थे तो सीसीटीवी कैमरों को बंद करा देते थे.  दिल्ली पुलिस ने सूचना के आधार पर 17 फरवरी की रात शास्त्री भवन से तीन लोगो को गिरफ्तार किया ये लोग एक कार में थे औऱ उस कार पर भी भारत सरकार लिखा हुआ था. इन लोगो के पास से कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए. पूछताछ के दौरान पता चला कि ये लोग पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियो के कमरों की डुप्लीकेट चाबियां बनवा कर कमरों से महत्वपूर्ण दस्तावेज चुराते थे.

 

इन लोगों ने फर्जी कार्ड बनवा रखे थे जिनके आधार पर ये लोग भवन में जाते थे. पुलिस के मुताबिक साजिश इतनी बड़ी थी कि आसारम और ईश्वर जब पेट्रोलियम मंत्रालय के कमरों के अंदर जाते थे तो सीसीटीवी कैमरों को बंद कर देते थे. पुलिस के मुताबिक चोरी किए दस्तावेज प्राइवेट एनर्जी कंस्लटेंसी कंपनी के किसी कर्मचारी को बेचे गए थे.

 

गिरफ्तार लोगों के खिलाफ आईपीसी के तहत अनधिकार प्रवेश, जालसाजी, चोरी और अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है.

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Web Title: Delhi Police arrest five for leaking confidential documents
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