ऑपरेशन निर्भीक: ताकि बच्चियां सुरक्षित रहें

By: | Last Updated: Thursday, 3 September 2015 4:08 PM
delhi police initiative opration nirbhik

नई दिल्ली: स्कूलों, घरों में बच्चे या बच्चियां सुरक्षित नहीं हैं. कुछ गलत होने पर वो किसी को कुछ बताने से भी करताते हैं. ऐसे में दिल्ली पुलिस ने एक नई मुहिम शुरू की है ऑपरेशन निर्भीक.

 

इस मुहिम से दिल्ली पुलिस ना सिर्फ बच्चों के दिल से पुलिस का डर हटा रही है. बल्कि शोषण करने वालों के खिलाफ शिकायत करना भी सीखा रही है.

 

टीवी पर डॉक्यूमेंट्री देखकर स्कूली छात्राएं एक बड़ी मुहिम का हिस्सा बन रही हैं. ये मुहिम है बच्चियों को शारीरिक शोषण से आजादी दिलाने की मुहिम. उत्तरी पश्चिम जिले के डीसीपी वीनू बंसल की पहल पर ये पूरा प्लान तैयार किया गया है जिसमें इलाके के सभी सरकारी और प्राईवेट स्कूलों में पहुंच कर दिल्ली पुलिस बच्चों और बच्चियों को गुड टच और बैड टच का फर्क बता रही हैं.

 

इसी मुहिम के तहत स्कूलों में इस तरह की शिकायत पेटी लगाई जा रही है जिसकी चाभी इलाके की महिला पुलिस कर्मी के पास है. यहां से हर हफ्ते ये शिकायतें सीनियर अफसरों के पास पहुंच रही हैं.

 

ऑपरेशन सखी से नाम बदल कर ऑपरेशन सखी

दिलचस्प ये है कि बच्चों और बच्चियों को शारीरिक शोषण के प्रति जागरूक करने के लिए इस अभियान को नाम दिया गया था ऑपरेशन सखी लेकिन एक महीने में ही ढेरों शिकायतें पुलिस के पास आई.

 

बच्चियों की बहादुरी की वजह से घटिया हरकत करने वाला एक टीचर सलाखों के पीछे पहुंच चुके हैं. इसके साथ ही इतनी शिकायतें आई हैं कि इस मुहिम का नाम बदल कर रख दिया गया ऑपरेशन निर्भीक. बच्चों की बहादुरी और पुलिस के इस कदम से आरोपी कैसे सलाखों के पीछे पहुंचे ये हम आपको आगे बताएगें

 

कैसे काम करता है ऑपरेशन निर्भीक

दिल्ली का बाबरपुर इलाका के जाने माने स्कूल विक्टर पब्लिक स्कूल के बच्चियों और बच्चों को हॉल में बुलाया गया और यहां इनकी क्लास ली इलाके के एसीपी ने. पहले बच्चों से दोस्ती का माहौल बनाया जाता है और उसके बाद बच्चों को बताया जाता है कि शारीरिक शोषण क्या है और इससे कैसे बचा जाए.

 

गुड टच और बैड टच की जानकारी

गुड टच और बैड टच को बताना मुश्किल है इसलिए ग्राफिक्स और चाइल्ड वैलफेयर की तरफ से जारी डॉक्यूमेंट्री की मदद से इसे समझाया जाता है. कोशिश होती है ये सिखाने की कि जुर्म से कैसे लड़ा जाए.

 

जब पुलिस के दोस्ती और भरोसे का माहौल बना तो बच्चियों ने पुलिस को अपनी समस्याएं बतानी शुरु की और पुलिस ने ये शिकायतें नोट भी कीं.

 

पुलिस ने बच्चों को बताया कि स्कूल में शिकायत पेटी लगाई गई है जिसका नाम है निर्भीक शिकायत पेटी. इस पेटी में बच्चियां या बच्चे अपने साथ हुए किसी भी तरह के गलत बर्ताव को लिख कर इसमें डाल सकते है. इसमें घरों के अंदर और घरों के बाहर किसी भी तरह के शारीरिक शोषण के बारे में वो बिना डरें अपनी आवाज़ बुलंद कर सकती है.

 

स्कूलों में रखे ये लैटर बॉक्स उन मासूम बच्चों की खामोश जुबान के लिए एक मजबूत हौसला है जो अपने ही परिवार और जान पहचान वालों के जुल्म और बुरे इरादों का शिकार हो रहे है. अब वो अपने उपर हो रहे जुल्स की कहानी इस लैटर बॉक्स के जरिए पुलिस तक पहुंचा रहे है. ये लैटर बाक्स उनके लिए वरदान साबित हो रहे है.

 

दिल्ली पुलिस एक-एक कर स्कूलों में जाती है. दिल्ली के हर्ष विहार में मौजूद ये है राजीव पब्लिक स्कूल, यहां डीसीपी खुद मौजूद थे. इस स्कूल में भी छुट्टी से थोड़े समय पहले दिल्ली पुलिस ने एक प्रोग्राम के जरिए बच्चों से बात की और उन्हें भरासा दिलाया कि वो पुलिस से अपनी किसी भी तकलीफ को बता सकती है और पुलिस हमेशा उनके साथ है.

 

सिर्फ स्कूलों में नहीं कॉलेजों में भी ऑपरेशन निर्भीक

स्कूलों के साथ ही दिल्ली पुलिस ने कॉलेजों में भी ऑपरेशन निर्भीक चला रही है.  नार्थ ईस्ट दिल्ली का नार्दन इन्डियन इंजीनियरिंग कॉलेज में पुलिस के अफसर और साथ ही डीसीपी ने यहाँ बच्चों के साथ बात की और अपनी आवाज उठाने के लिए कहा. पुलिस के इस कदम से कॉलेज के छात्र और छात्राएं काफी खुश नजर आ रही है.

 

पुलिस के सूत्रों को कहना है कि उत्तरी पश्चिमी जिले में प्राईवेट और सरकारी मिलाकर करीब 550 स्कूल है जिन सभी में इस तरह से बच्चों को प्रोग्राम के जरिए ये ऑपरेशन चलाया जा रहा है जिससे बच्चियां अब जुर्म से लड़ने में पुलिस का साथ दे रही है.

 

कहते है बच्चे भगवान को रुप होते है, वो इसिलिए क्योंकि इस उम्र में वो अपना और पराया कुछ नहीं जानते, उन्हें अच्छे और बुरे के बीच फर्क बहुत कम पता होता है, जिसने उनसे हंसकर बात कर ली वो उसके साथ हो लेते है.

 

बच्चों की इसी मासूमियत का फायदा उठाते है वो वहशी दरिंदे जो घर में भी मौजूद हो सकते है और घर की दहलीज के बाहर भी. इस ऑपरेशन के जरिए पुलिस को कई शिकायते मिल रही है और कुछ मामलों में आरोपी सलाखों के पीछे तक जा चुके है.

 

बच्चों की शिकायत से निकले पुलिस के आंसू

पुलिस के ऑपरेशन निर्भीक में बच्चियों ने अपनी शिकायते डालनी शुरु की और जब शिकायतों को पड़ा गया तो पुलिस के भी आसूं निकल गए. क्योंकि एक चिठ्ठी में एक बच्ची ने लिखा था कि उसका दम घुटता है क्योंकि उसके पिता ही उसका शारीरिक शोषण कर रहे है.

 

बच्ची के दर्द की कहानी उसकी चिठ्ठी में दर्ज है वो सच जो रिश्तों से भरोसा उठा दे. ऑपरेशन निर्भीक में स्कूलों की शिकायत पेटी को खोला जा रहा था. तभी दिल्ली के सीमापुरी थाने की शिकायत पेटी से निकली एक बच्ची के दर्द की कहानी.

 

बच्ची ने लैटर बॉक्स में डाली चिट्ठी में लिखा

निवेदन है कि मैं बहुत मुश्किल से रह पा रही हूं, दम घुटता है मेरे पापा मेरे साथ गलत करते है, मेरे साथ बलात्कार की कोशिश करते है. मां घबराती है वो कुछ कदम नहीं उठाती. वो साफ इंकार करती है कि जैसे मैं सहती हूं, तुम भी सहो.

 

सर मैं आपसे निवेदन करती हूं कि कृपा करके मेरी सहायता करें. मैं इस घर में एक पल भी नहीं रह सकती, प्लीज सर आप मेरी हैल्प कीजिए आपकी अति कृपा होगी. मेरी जिंदगी खराब हो रही है, प्लीज आप मेरी हैल्प कीजिए आप जो भी कर सकते है मैं अब यहां नहीं रह सकती.

 

इस लैटर को पुलिस ने गंभीरता से लेते हुए बच्ची से बात की और फिर बच्ची की शिकायत पर उसकी मां से बात कर बच्ची के पिता के खिलाफ आईपीसी की धारा 354, 506 और पोक्सों एक्ट के तहत मामला दर्ज कर आरोपी को जेल भिजवाया.

 

कहते हैं बचपन में लगी चोट जिंदगी भर परेशान करती है, बेहद छोटी उम्र में किसी मासूम के साथ हो रहा शारीरिक शोषण एक ऐसा ही घाव है जो उसे ताउम्र सालता रहता है, ये एक ऐसा नासूर है जो मासूम बच्चों के दिल पर लगे जख्मों को हमेशा हरा रखता है, जिसकी वजह से न केवल वो अपना खुबसूरत बचपन खो बैठते है बल्कि उनका मानसिक विकास भी रुक जाता है.

 

ऐसा एक और मामला भी सामने आया. इस तस्वीर को जरा ध्यान से देख लीजिए, ये तस्वीर है दिल्ली के खजूरी खास थाने के अंतर्गत आने वाले एक सरकारी स्कूल के मैथ्स टीचर ब्रिजेश कुमार की. ब्रिजेश इन दिनों स्कूल में नहीं बल्कि जेल में है. कुछ ही दिन पहले पुलिस ने इसे गिरफ्तार किया है. इसकी शिकायत भी सरकारी स्कूल की छात्राओं ने यौन शोषण के प्रति जागरूक करने के बाद की थी. ऑपरेशन निर्भीक के बाद छात्राओं ने खजूरी खास थाने आकर पुलिस को अपनी आप बीती बताई और जांच के बाद ये टीचर जेल पहुंच गया.

 

अधिक्तर बच्चे अच्छे और बुरे के बीच फर्क नहीं कर पाते, वो सामने वाले के बुरे बर्ताव और गल्त इरादों को भी नहीं पहचान पाते, उन्हें पता ही नहीं होता कि कोई उनका शारीरिक शोषण हो रहा है, लिहाजा ऑपरेशन निर्भीक के जरिए पुलिस स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को गुड टच और बैड टच का चैप्टर पढ़ा रही है, ताकि ये मासूम अपने साथ हो रहे शारीरिक शोषण को न सिर्फ पहचान सके, बल्कि आरोपियों को सलाखों के पीछे भी पहुंचाया जा सके.

 

दिल्ली पुलिस का ये ऑपरेशन अभी उत्तरी पश्चिमी जिले में चल रहा है, यहां के डीसीपी की शुरुआत को पुलिस कमिश्नर ने भी सराहा है दिलस्प ये है कि इस कार्यक्रम आडइडिया डीसीपी वीनू बंसल को सत्यमेव जयते को देख कर आया था.

 

पुलिस इस बात पर विचार कर रही है कि ऑपरेशन निर्भीक को जल्द से जल्द पूरी दिल्ली के साथ साथ पूरे देश भर के स्कूलों में चलाया जाए ताकि बच्चों को एहसास हो कि पुलिस उनके साथ है और वो पुलिस से कुछ भी साझा कर सकते हैं.

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